MNREGA: 100 दिनों में सिर्फ 11 को रोजगार
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केंद्र की मनरेगा योजना मंशा पर खरी नहीं उतर रही है। वित्तीय वर्ष के छह माह बीतने के बाद भी सौ दिन रोजगार का सपना पूरा नहीं हुआ है।
अब तक मात्र 11 श्रमिकों को ही सौ दिन रोजगार मिल सका है। काम न मिलने के कारण श्रमिकों के सपने टूट रहे हैं। उन्हे रोजी रोटी की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है।
विभाग की ओर से श्रमिकों को रोजगार गांव में ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
मनरेगा घोटाले की जांच शुरू होने के बाद जिले में मनरेगा की प्रगति खराब हो गई है।
श्रमिकों को गांवों में काम नहीं मिल रहा है। साथ ही काम करने के बाद मजदूरी का भुगतान भी नहीं मिल रहा है।
ऐसी स्थिति में श्रमिकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष के छह महीने में करीब सौ श्रमिकों को सौ दिन रोजगार मिल गया था।
जानें, कहां कितनों को मिला रोजगार
पिछले साल की तुलना में इस साल की स्थिति काफी खराब नजर आ रही है। पिछले साल जहां सौ श्रमिकों को सौ दिनों में रोजगार प्राप्त हुआ था। वहीं इस साल सिर्फ 11 श्रमिकों का सपना पूरा हुआ है।
अमावां, छतोह व लालगंज में एक-एक, बछरावां व खीरों में तीन-तीन और सलोन में दो श्रमिकों को ही सौ दिन रोजगार मिल सका है।
इसके अलावा डलमऊ, गौरा, डीह, हरचंदपुर, जगतपुर, महराजगंज, राही, रोहनियां, सरेनी, शिवगढ़ व ऊंचाहार में एक भी श्रमिक को सौ दिन रोजगार नहीं मिल सका है।
उपायुक्त मनरेगा एसके उपाध्याय ने बताया कि मनरेगा में प्रगति लाने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य की पूर्ति का प्रयास किया जा रहा है।
मनरेगा की स्थिति जहां सुधरने का नाम नहीं ले रही। वहीं प्रदेश के श्रमिक भी रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं।