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मनकामेश्वर मंदिर: जहां से कोई खाली नहीं लौटता

Tue, 27 Aug 2013 01:10 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 27 Aug 2013 01:10 PM IST
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mankameshwar temple in lucknow

अवध के दिल में भोले बाबा का एक प्राचीन मंदिर है। डालीगंज में गोमती नदी के बाएं तट पर शिव पार्वती का ये मंदिर बहुत सिद्ध माना जता है।

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मंदिर के महंत केशवगिरी के ब्रह्ललीन होने के बाद देव्यागिरी को महंत बनाया गया।

ऐसा प्रमाण मिलता है कि माता सीता को वनवास छोडऩे के बाद लखनपुर के राजा लक्ष्मण ने यहीं रूककर भगवान शंकर की अराधना की थी, जिसके बाद कालांतर में मनकामेश्वर मंदिर की स्थापना कर दी गई।
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राजा हिरण्यधनु ने कराया था निर्माण

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण राजा हिरण्यधनु ने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के बाद किया था। मंदिर के शिखर पर सुसज्जित 23 स्वर्णकलश उसकी शोभा को बढ़ाते हैं।
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कहा जाता है कि दक्षिण के शिव भक्तों और पूर्व के तारकेश्वर मंदिर के उपासक साहनियों ने मध्यकाल तक इस मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखा था। मौजूदा समय में मंदिर का भव्य निर्माण सेठ पूरन शाह ने कराया है।


क्या है मंदिर की मान्यता
इस मंदिर की मान्यता है कि सच्चे मन से आकर यहां जो भी मुराद मांगी जाए, भोले बाबा उसे हर हाल में पूरा करते हैं। सावन के हर सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है।

मंदिर में काले रंग का शिवलिंग है और उसपर चांदी का छत्र विराजमान होने के साथ मंदिर के पूरे फर्श में चांदी के सिक्के लगे होने से यह मंदिर मनोहारी लगता है।

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