{"_id":"5d0e3ce28ebc3e02f670f50c","slug":"mango-festival-in-lucknow-deshari-mango-in-avtar-local-and-foreign-varieties-shines","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ में आम महोत्सव : नए रंग रूप में दिखी दशहरी, देशी संग विदेशी प्रजातियों ने लुभाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ में आम महोत्सव : नए रंग रूप में दिखी दशहरी, देशी संग विदेशी प्रजातियों ने लुभाया
Sat, 22 Jun 2019 08:06 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 22 Jun 2019 08:06 PM IST
विज्ञापन
आम महोत्सव
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अवध की शान और पहचान रहे दशहरी को नए-नए रंग-रूप में पेश किया जा रहा है। दशहरी का ऐसा ही एक हाईब्रिड वेरियंट राजधानी में शुरू हुए दो दिवसीय उप्र आम महोतसव में प्रस्तुत किया गया है। इस दशहरी को चौसा से मिलाकर तैयार केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच) में किया गया है।
नए हाईब्रिड आम एम-2 को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों में शामिल सीआईएसएच के निदेशक डॉ. शैलेंद्र राजन ने बताया कि 90 के दशक में यह हाईब्रिड आम तैयार करने के प्रयास शुरू हुए थे। करीब 15 वर्ष इसका पौध तैयार करने में लगे। अब यह दशहरी और चौसा के मिलेजुले स्वाद का आम तैयार हो चुका है। इसे फिलहाल एम-2 नाम दिया गया है, एक प्रजाति के तौर पर नामकरण समय आने पर किया जाएगा।
विज्ञापन
नए हाईब्रिड आम एम-2 को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों में शामिल सीआईएसएच के निदेशक डॉ. शैलेंद्र राजन ने बताया कि 90 के दशक में यह हाईब्रिड आम तैयार करने के प्रयास शुरू हुए थे। करीब 15 वर्ष इसका पौध तैयार करने में लगे। अब यह दशहरी और चौसा के मिलेजुले स्वाद का आम तैयार हो चुका है। इसे फिलहाल एम-2 नाम दिया गया है, एक प्रजाति के तौर पर नामकरण समय आने पर किया जाएगा।
विज्ञापन
चौसा नर, दशहरी की भूमिका मादा
सीआईएसएच के रिटायर्ड तकनीकी अधिकारी राम शरण ने बताया कि हाईब्रिड प्रजाति तैयार करने की प्रकिया, दो प्रजातियों के आमों की कलम को जोड़कर की जाने वाली ग्राफ्टिंग से अलग है। एम-2 को तैयार करने में चौसा के परागकण उपयोग किए गए।
इन्हें दशहरी के मादा फूलों के स्टिग्मा में पहुंचाया गया दशहरी की जिन शाखाओं पर यह प्रयोग किया गया, वहां से समस्त नर फूलों को हटाया गया। इस प्रकार चौसा ने एक प्रकार से नर और दशहरी ने मादा की भूमिका निभाई। इसके लिए दोनों प्रजातियों के श्रेष्ठ और ज्ञात पृष्ठभूमि के वृक्षों का चयन किया गया। इस प्रक्रिया से तैयार हुए फलों की गुठलियों से नए पौधे तैयार किए गए, जिनसे यह एम-2 प्रजाति तैयार हुई।
इन्हें दशहरी के मादा फूलों के स्टिग्मा में पहुंचाया गया दशहरी की जिन शाखाओं पर यह प्रयोग किया गया, वहां से समस्त नर फूलों को हटाया गया। इस प्रकार चौसा ने एक प्रकार से नर और दशहरी ने मादा की भूमिका निभाई। इसके लिए दोनों प्रजातियों के श्रेष्ठ और ज्ञात पृष्ठभूमि के वृक्षों का चयन किया गया। इस प्रक्रिया से तैयार हुए फलों की गुठलियों से नए पौधे तैयार किए गए, जिनसे यह एम-2 प्रजाति तैयार हुई।
खासियतें : ज्यादा ताजा, सख्त गूदा
डॉ. राजन के अनुसार हाईब्रिड दशहरी एम-2 में दशहरी और चौसा दोनों का न केवल स्वाद मौजूद हैं, बल्कि इसका गूदा भी सख्त है। इस वजह से इसकी शेल्फ-लाइफ ज्यादा है, यानी इसे पेड़ से तोड़ने के बाद भी ज्यादा समय तक ताजा रखा जा सकता है। इससे यह निर्यात में उपयोगी साबित होगा।
देशी-विदेशी आम से भी नई प्रजाति
प्रदर्शनी में सीआईएसएच द्वारा ही तैयार किया गया एक अन्य आम एच2046 भी आकर्षण का केंद्र बना। इसे भारतीय प्रजाति आम्रपाली और अमेरिकी टॉमीएटकिन से तैयार किया गया है। आम्रपाली आमतौर पर हरा होता है, टॉमीएटकिन से इसे लाल रंग मिला है, जो इसे ज्यादा आकर्षक बना रहा है। साथ ही यह कम मीठा होने की वजह से वजन नियंत्रित रखने और सेहत के लिए भी बेहतर माना जा रहा है।
देशी-विदेशी आम से भी नई प्रजाति
प्रदर्शनी में सीआईएसएच द्वारा ही तैयार किया गया एक अन्य आम एच2046 भी आकर्षण का केंद्र बना। इसे भारतीय प्रजाति आम्रपाली और अमेरिकी टॉमीएटकिन से तैयार किया गया है। आम्रपाली आमतौर पर हरा होता है, टॉमीएटकिन से इसे लाल रंग मिला है, जो इसे ज्यादा आकर्षक बना रहा है। साथ ही यह कम मीठा होने की वजह से वजन नियंत्रित रखने और सेहत के लिए भी बेहतर माना जा रहा है।