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मनमाने ढंग से भुगतान के आरोप में मंडी परिषद के लेखा एवं संप्रेक्षाधिकारी सस्पेंड
Tue, 13 Oct 2020 10:42 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 13 Oct 2020 10:42 PM IST
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Corruption
- फोटो : सोशल मीडिया
मंडी परिषद के लेखा एवं संप्रेक्षाधिकारी मैकू लाल को सस्पेंड कर दिया गया है। मनमाने ढंग से भुगतान और धांधली के आरोप में उन पर कार्रवाई की गई है। वे वाराणसी के निर्माण खंड में तैनात थे। निलंबन के बाद उन्हें उप निदेशक (निर्माण), कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
मंडी निदेशक जेपी सिंह की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि मैकूलाल ने विभागीय व्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से इतर मनमाने ढंग से गंभीर अनियमितताएं की हैं। इन सब कदाचार को देखते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले में आगे की जांच उप निदेशक (निर्माण), कानपुर को सौंपी गई है।
बता दें, निर्माण खंड वाराणसी में तैनाती के दौरान मैकू लाल को अनुबंधों के गठन में अनियमितता, कर्मचारियों के देयों के भुगतान में धांधली और बिना सक्षम स्तर कीमंजूरी के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बैक डेट में भुगतान करने के आरोप में 30 जून को नोटिस दिया गया था। जौनपुर में तैनाती के दौरान भी उन पर धांधली के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया कि निर्माण खंड, जौनपुर में तैनाती के दौरान मैकूलाल ने परिषद मुख्यालय से धन आवंटित न होने के बावजूद विभिन्न 25 अनुबंधों के तहत 5.72 करोड़ रुपये का भुगतान कराया। इस तरह कुल 92 अनुबंधों में 7.02 करोड़ से अधिक भुगतान की गड़बड़ी सामने आई।
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मंडी निदेशक जेपी सिंह की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि मैकूलाल ने विभागीय व्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से इतर मनमाने ढंग से गंभीर अनियमितताएं की हैं। इन सब कदाचार को देखते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले में आगे की जांच उप निदेशक (निर्माण), कानपुर को सौंपी गई है।
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बता दें, निर्माण खंड वाराणसी में तैनाती के दौरान मैकू लाल को अनुबंधों के गठन में अनियमितता, कर्मचारियों के देयों के भुगतान में धांधली और बिना सक्षम स्तर कीमंजूरी के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बैक डेट में भुगतान करने के आरोप में 30 जून को नोटिस दिया गया था। जौनपुर में तैनाती के दौरान भी उन पर धांधली के आरोप लगे थे। जांच में सामने आया कि निर्माण खंड, जौनपुर में तैनाती के दौरान मैकूलाल ने परिषद मुख्यालय से धन आवंटित न होने के बावजूद विभिन्न 25 अनुबंधों के तहत 5.72 करोड़ रुपये का भुगतान कराया। इस तरह कुल 92 अनुबंधों में 7.02 करोड़ से अधिक भुगतान की गड़बड़ी सामने आई।
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