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Lucknow News: समुद्री संसाधनों के प्रबंधन से पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर

Sat, 14 Mar 2026 01:46 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:46 AM IST
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Management of marine resources will create new employment opportunities
लविवि के भूविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मौजूद प्रोफेसर।
लखनऊ। समुद्र केवल जल का विशाल भंडार ही नहीं, ये दुर्लभ खनिजों का भंडार भी है। इसके सही प्रबंधन से देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सकती है। साथ ही इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा। ये बातें राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान गोवा के निदेशक प्रो. सुनील कुमार सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी ''जियोकॉन'' में कहीं।
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प्रो. सुनील ने ''नीली अर्थव्यवस्था'' पर बोलते हुए कहा कि समुद्र में मौजूद खनिज, रेयर अर्थ मेटल, मत्स्य संसाधन, ऊर्जा और समुद्री जैव विविधता का सही और सतत उपयोग देश को समृद्ध बना सकती है। लेकिन उसे प्राॅसेस करने की उन्नत तकनीक की देश में कमी है। लविवि के भूविज्ञान विभाग के इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के कई वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने पृथ्वी विज्ञान से जुड़े समकालीन मुद्दों पर अपने शोध और अनुभव साझा किए। संगोष्ठी में देश के 29 विश्वविद्यालयों और करीब 20 राष्ट्रीय शोध संस्थानों के वैज्ञानिक, शिक्षक और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। पहले दिन आठ विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए और 200 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. टीएन. सिंह ने हिमालयी क्षेत्रों में सुरंगों और लैंड-स्लाइड के जोखिम और पर्यावरण पर उसके प्रभाव पर बात की। उत्तर-पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जोरहाट के निदेशक डॉ. वीएम तिवारी ने गंगा बेसिन क्षेत्र में भूजल के अत्यधिक दोहन व भू-धंसाव पर अपने शोध के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने उपग्रह आधारित तकनीक से इस समस्या की गंभीरता को समझाया। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और देश के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में इन खनिजों की अहम भूमिका है।
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लविवि भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने कहा कि पृथ्वी एक अनोखा जीवनदायी ग्रह है और इसके संतुलन को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र तिरुवनंतपुरम के निदेशक प्रो. एनवी. चलपति राव ने दक्कन वृहद् आग्नेय प्रांत में मैग्मावाद पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. अरविंद मोहन ने की।

संगोष्ठी में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के डॉ. हिमांशु कुमार सचान, जेएनयू नई दिल्ली के डीन स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज के प्रो. एन. जनार्दना राजू, बीएसआईपी के डॉ. प्रभाष पांडेय, दिल्ली विवि के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. पंकज श्रीवास्तव, नागालैंड विवि के प्रो. संतोष कुमार सिंह, बीएचयू के प्रो. उमाकांत शुक्ला, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च धनबाद के डॉ. अभय कुमार सिंह और आईआईटी भुवनेश्वर के प्रो. राज कुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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