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ब्रेन डेड महिला के लिवर से मिली युवक को नई जिंदगी, पति ने कही ये बड़ी बात
Thu, 27 Jun 2019 04:49 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 27 Jun 2019 04:49 PM IST
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वंदना (फाइल फोटो))
- फोटो : अमर उजाला
सुल्तानपुर की महिला वंदना के लिवर से मेरठ के 32 वर्षीय युवक को नई जिंदगी मिली है। हादसे में घायल वंदना को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला किया। लिवर प्रत्यारोपण के साथ ही केजीएमयू के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई।
यह पहला मौका है जब यहां कैडवर यानी मृत देह से लिवर लेकर प्रत्यारोपण किया गया। युवक की हालत में सुधार है और वह होश में आ गया है। सुल्तानपुर के गोसाईंसिंहपुर निवासी हरि प्रसाद की पत्नी वंदना (35) नौ जून को बहन के साथ बाजार जा रही थीं।
रास्ते में बाइक से टक्कर लगने से वह घायल हो गईं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बलरामपुर अस्पताल और फिर 12 जून को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने ऑपरेशन किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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यह पहला मौका है जब यहां कैडवर यानी मृत देह से लिवर लेकर प्रत्यारोपण किया गया। युवक की हालत में सुधार है और वह होश में आ गया है। सुल्तानपुर के गोसाईंसिंहपुर निवासी हरि प्रसाद की पत्नी वंदना (35) नौ जून को बहन के साथ बाजार जा रही थीं।
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रास्ते में बाइक से टक्कर लगने से वह घायल हो गईं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बलरामपुर अस्पताल और फिर 12 जून को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने ऑपरेशन किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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ब्रेन डेड होने पर परिवारीजनों ने वंदना का लिवर दान करने का फैसला किया
- फोटो : अमर उजाला
25 जून को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव, शिक्षित वर्मा व सोशल वर्कर अश्वनी सिंह ने वंदना के परिवारीजनों से उसके अंगदान करने को लेकर बात की। उनके तैयार होने पर वंदना का लिवर और कार्निया सुरक्षित रख लिया गया। यही लिवर मेरठ के युवक को प्रत्यारोपित किया गया। खास बात है कि वंदना और युवक का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव था।
13 घंटे तक चला प्रत्यारोपण
युवक करीब नौ माह से लिवर सिरोसिस से जूझ रहा था। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे से शुरू हुई प्रत्यारोपण की प्रक्रिया बुधवार तड़के चार बजे तक चली।
केजीएमयू में 20वां अंगदान
हालांकि केजीएमयू में अंगदान करने की प्रक्रिया वर्ष 2013 से चल रही है। अब तक 19 मल्टी आर्गन डोनेशन कराए जा चुके हैं। यह 20वां अंगदान था।
मरीज की 21 दिन तक विशेष निगरानी
लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज को 21 दिन गहन चिकित्सा कक्ष में रखा जाएगा। उसके खाने से लेकर अन्य चीजों पर ध्यान रखा जाएगा। इस दौरान संक्रमण से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरे दिन एक परिवारीजन से मुलाकात कराई जाएगी। इस दौरान उन्हें भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट में जाने से पहले सभी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
13 घंटे तक चला प्रत्यारोपण
युवक करीब नौ माह से लिवर सिरोसिस से जूझ रहा था। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे से शुरू हुई प्रत्यारोपण की प्रक्रिया बुधवार तड़के चार बजे तक चली।
केजीएमयू में 20वां अंगदान
हालांकि केजीएमयू में अंगदान करने की प्रक्रिया वर्ष 2013 से चल रही है। अब तक 19 मल्टी आर्गन डोनेशन कराए जा चुके हैं। यह 20वां अंगदान था।
मरीज की 21 दिन तक विशेष निगरानी
लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज को 21 दिन गहन चिकित्सा कक्ष में रखा जाएगा। उसके खाने से लेकर अन्य चीजों पर ध्यान रखा जाएगा। इस दौरान संक्रमण से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरे दिन एक परिवारीजन से मुलाकात कराई जाएगी। इस दौरान उन्हें भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट में जाने से पहले सभी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
जिंदगी की उम्मीद जगा गईं वंदना
सुल्तानपुर की वंदना ने मध्यवर्गीय परिवार को एक धागे में बांध रखा था। उनका जाना परिवार के लिए कभी न भुलाने वाला दर्द है, लेकिन परिवारीजनों को जब अंगदान के बारे में समझाया गया तो वे तैयार हो गए। वहीं, दूसरी ओर लिवर सिरोसिस से पीड़ित जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे मेरठ के युवक को डोनर मिलने की सूचना मिली तो वह केजीएमयू चला आया। बेटे के लिए जिंदगी की उम्मीद देख उसकी मां की आंखें भर आईं। वंदना ने एक परिवार को उम्मीदों से भर दिया।
ग्राम पंचायत विभाग में कार्यरत हरिप्रसाद ने बताया कि उनकी पत्नी ने पूरे परिवार को संभाल रखा था। अब मौत के बाद उसके अंग किसी के काम आ सकते हैं। यही सोचकर अंगदान कराया है। इस तरह वह इस दुनिया में न होकर भी होने का आभास कराती रहेगी। वंदना का एक बेटा सातवीं और दूसरा आठवीं में है। एक बेटी को गोद ले रखा है।
इतने घंटे में हाे जाए प्रत्यारोपण
अंग प्रत्यारोपण तय समय में होना चाहिए। ब्रेन डेड से अंग निकालने के बाद किडनी को 24 घंटे के अंदर, हार्ट चार घंटे, लिवर 12 घंटे, कार्निया 14 दिन में प्रत्यारोपित कर देना चाहिए।
ग्राम पंचायत विभाग में कार्यरत हरिप्रसाद ने बताया कि उनकी पत्नी ने पूरे परिवार को संभाल रखा था। अब मौत के बाद उसके अंग किसी के काम आ सकते हैं। यही सोचकर अंगदान कराया है। इस तरह वह इस दुनिया में न होकर भी होने का आभास कराती रहेगी। वंदना का एक बेटा सातवीं और दूसरा आठवीं में है। एक बेटी को गोद ले रखा है।
इतने घंटे में हाे जाए प्रत्यारोपण
अंग प्रत्यारोपण तय समय में होना चाहिए। ब्रेन डेड से अंग निकालने के बाद किडनी को 24 घंटे के अंदर, हार्ट चार घंटे, लिवर 12 घंटे, कार्निया 14 दिन में प्रत्यारोपित कर देना चाहिए।