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एयरपोर्ट लिंक फ्लाईओवर निर्माण की डगर कठिन, एलडीए ही नहीं काश्तकारों की जमीन का भी हल नहीं निकला, विवाद पर बैठक आज
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एयरपोर्ट लिंक फ्लाईओवर के निर्माण की राह आसान नजर नहीं आ रही। एलडीए अधिकारियों के मुआवजे की मांग शुरू कर देने से विवाद बना हुआ है। वहीं जिला प्रशासन से मुआवजे की दरें तय होने के बाद भी अधिकारी काश्तकारों से जमीन लेने के लिए सहमति नहीं बना पाए हैं। ऐसे में यहां भी पीडब्ल्यूडी को जमीनें मिलना शुरू नहीं हो सका है। एलडीए की जमीनों के लिए मुआवजे के विवाद पर खुद मुख्य सचिव आरके तिवारी सोमवार को बैठक लेंगे।
बैठक में एलडीए के अलावा पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम, वित्त आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाया गया है। सेतु निगम की मांग है कि पूर्व की तरह एलडीए से मुफ्त जमीन दिलाई जाए। अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी नितिन रमेश गोकर्ण के स्तर पर इसका फैसला नहीं हो पाने के बाद मुख्य सचिव से बैठक बुलाने की मांग एमडी सेतु निगम अरविंद श्रीवास्तव ने की थी। इधर, समय लंबा खिंचने से सेतु निगम के सामने भी प्रोजेक्ट पर काम रोक देने के हालात खड़े होने लगे हैं। अभी केवल एनएचएआई से मिली जमीन पर ही सेतु निगम धीमी गति से काम कर पा रहा है।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजीव राय ने बताया कि जिला प्रशासन ने मौजूदा डीएम सर्किल रेट को आधार बनाकर मुआवजा की दरें तय कर दी हैं। लेकिन, काश्तकारों की बिना सहमति के उनकी रजिस्ट्री करा जमीनों पर कब्जा लेना शुरू नहीं किया जा सकता है। ऐसे में काश्तकारों के साथ कई बार वार्ता हो चुकी है। इसके बाद भी सहमति नहीं बन पाई है। उनकी दिक्कतों केे अलावा वाजिब मांगों का भी परीक्षण किया जा रहा है जिससे मुआवजा बंटना शुरू हो सके। इसके बाद जमीनों की रजिस्ट्री भी शुरू हो सकेगी।
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नहीं शुरू होगा एलडीए की जमीन पर काम
इधर, सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि जब तक एलडीए की जमीनों पर लिखित में कोई फैसला नहीं होता। वहां मौके पर कोई काम शुरू नहीं किया जाएगा। यह उस समय है जबकि एलडीए सचिव पवन गंगवार अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी की बैठक तक में एलडीए की जमीनों पर काम होने पर इसे नहीं रुकवाने का आश्वासन दे चुके हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि विधिक वाद होने पर कोई अप्रिय स्थिति से बचने के लिए ऐसा किया गया है। यह भी साफ कर दिया गया है कि एलडीए के अधिकारियों के मौजूदा रवैये को देखते हुए यह उचित भी नहीं होगा कि बिना मुआवजा पर फैसला हुए वहां काम शुरू करा दिया जाए।
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बैठक में एलडीए के अलावा पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम, वित्त आदि विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाया गया है। सेतु निगम की मांग है कि पूर्व की तरह एलडीए से मुफ्त जमीन दिलाई जाए। अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी नितिन रमेश गोकर्ण के स्तर पर इसका फैसला नहीं हो पाने के बाद मुख्य सचिव से बैठक बुलाने की मांग एमडी सेतु निगम अरविंद श्रीवास्तव ने की थी। इधर, समय लंबा खिंचने से सेतु निगम के सामने भी प्रोजेक्ट पर काम रोक देने के हालात खड़े होने लगे हैं। अभी केवल एनएचएआई से मिली जमीन पर ही सेतु निगम धीमी गति से काम कर पा रहा है।
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पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजीव राय ने बताया कि जिला प्रशासन ने मौजूदा डीएम सर्किल रेट को आधार बनाकर मुआवजा की दरें तय कर दी हैं। लेकिन, काश्तकारों की बिना सहमति के उनकी रजिस्ट्री करा जमीनों पर कब्जा लेना शुरू नहीं किया जा सकता है। ऐसे में काश्तकारों के साथ कई बार वार्ता हो चुकी है। इसके बाद भी सहमति नहीं बन पाई है। उनकी दिक्कतों केे अलावा वाजिब मांगों का भी परीक्षण किया जा रहा है जिससे मुआवजा बंटना शुरू हो सके। इसके बाद जमीनों की रजिस्ट्री भी शुरू हो सकेगी।
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नहीं शुरू होगा एलडीए की जमीन पर काम
इधर, सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि जब तक एलडीए की जमीनों पर लिखित में कोई फैसला नहीं होता। वहां मौके पर कोई काम शुरू नहीं किया जाएगा। यह उस समय है जबकि एलडीए सचिव पवन गंगवार अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी की बैठक तक में एलडीए की जमीनों पर काम होने पर इसे नहीं रुकवाने का आश्वासन दे चुके हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि विधिक वाद होने पर कोई अप्रिय स्थिति से बचने के लिए ऐसा किया गया है। यह भी साफ कर दिया गया है कि एलडीए के अधिकारियों के मौजूदा रवैये को देखते हुए यह उचित भी नहीं होगा कि बिना मुआवजा पर फैसला हुए वहां काम शुरू करा दिया जाए।