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14 की शाम 7:09 पर मकर संक्रांति, खिचड़ी 15 को
आशुतोष मिश्र,अमर उजाला ब्यूरो/लखनऊ
Updated Wed, 08 Jan 2014 09:07 AM IST
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स्नान-दान और अक्षय पुण्य के पर्व मकर संक्राति पर बुधवार 15 जनवरी को भोर से ही स्नान की डुबकी लगेगी। खिचड़ी बुधवार को मनाई जायेगी।
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ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मंगलवार शाम 7:09 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के चलते बुधवार को मकर संक्राति का स्नान और खिचड़ी का दान करना श्रेयस्कर रहेगा और बुधवार सुबह 11 बजे तक स्नान-दान, भोजन करना उत्तम रहेगा।
इसी केसाथ सूर्य की गति बदलने केचलते 16 दिसंबर से चल रहा खरमास भी समाप्त होगा और वैवाहिक मूूहूर्त भी मिलने शुरू हो जायेंगे और शहनाईयां गूंजने लगेंगी।
महानगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि मकर संक्राति में पुण्यकाल 40 घड़ी या लगभग 16 घंटे का माना जाता है। इसी समय के भीतर ही खिचड़ी का दान-भोजन करना श्रेयस्कर रहेगा।
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चूंकि इस बार 14 जनवरी मंगलवार को शाम 7:09 बजे के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं।शाम को मकर संक्रांति के बाद 16 घंटों के भीतर स्नान, दान और भोजन करना उत्तम रहेगा।
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मकर संक्रांति के दिन सुबह घर में स्नान करते समय काले तिल-गंगाजल और नदी में स्नान करते समय काले तिलों कुशा के साथ स्नान करना चाहिये।
स्नान केसमय ‘माधौ नारायण अच्युतं केशव..’ का जप करते रहना चाहिए। स्नान के बाद ब्राह्मण को खिचड़ी, काले तिल, अग्नि के लिये लकड़ी, ऊनी कपड़े, कंबल, मिष्ठान्न, गुड़, आंवला, घृत और मौसमी फल दान करने से माधौ बहुत ही प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने बताया कि भविष्यपुराण के मुताबिक खिचड़ी के दिन परमसुख केलिये काले तिल-घृत का हवन करना चाहिये।
उधर खिचड़ी के नजदीक आते ही बाजारों में चहल-पहल दिखने लगी है। नगर के डालीगंज, नरही, डंडइया, निशातगंज, आलमबाग, अमीनाबाद, गणेशगंज, चौक-चौपटिया, ठाकुरगंज के बाजारों में तमाम दुकानों पर जगह-जगह सजे तिल, रामदाना, लैय्या केलड्डू लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
गूंज उठेंगी शहनाई, मिलेंगे मूहूर्त
आचार्य प्रदीप के मुताबिक वर्ष 2014 चालू हिंदू संवत्सर में 18 जनवरी से 14 मार्च तक लगभग 38 उत्तम मूहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी को शाम 7:09 बजे से सूर्य मकर राशि में आ जायेंगे।
सूर्य के मकर राशि में आते ही खरमास समाप्त हो जायेगा। सूर्य भी उत्तरायण हो जायेंगे, शिशिर ऋतु भी शुरू हो जायेगी। पहली वैवाहिक लग्न 18 जनवरी से मिलेगी।
जनवरी-फरवरी का मूहूर्त
आचार्य कृष्णकांत ने बताया कि साल 2014 में लोकसभा चुनावों के चलते जनवरी फरवरी के मूहूर्त हाट बने हुये हैं। जिनके घर में शादी है वो पहले ही अपने मन की तारीखें बुक करा चुके हैं।
फिर भी उनकेपास आने वाले तमाम जजमान अपने बेटे-बेटियों की शादियों के लिये जनवरी-फरवरी का मूहूर्त ही मांग रहे हैं।
लोकसभा चुनावों केचलते मार्च-अप्रैल में लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता के चलते वे आयोजनों में किसी भी प्रकार केझंझट केपचड़े से दूर ही रहना चाहते हैं।