लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के सहायक प्रो. कुणाल अगम कनौजिया ने फेफड़ों की गंभीर बीमारी सिस्टिक फाइब्रोसिस के उपचार में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उनका शोध प्रतिष्ठित स्प्रिंगर नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक नैनो टेक्नोलॉजी आधारित ड्रग डिलीवरी सिस्टम विकसित किया है। यह प्रणाली दवा को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाकर उपचार को अधिक प्रभावी बनाएगी और दुष्प्रभावों को कम करेगी। विकसित नैनोपार्टिकल्स को विशेष रूप से चिटोसान और सेल मेम्ब्रेन से कोट किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह शोध सिस्टिक फाइब्रोसिस और अन्य गंभीर श्वसन रोगों के उपचार में नई संभावनाएं खोलेगा। यह शोध बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. पीएस रजनीकांत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कनौजिया ने बताया कि यह शोध मरीजों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और लक्षित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।