क्या 60 लाख में बच जाएगा यूपी का सबसे बड़ा स्टेडियम?
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अगर प्रदेश में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने वाले स्टेडियमों की बात की जाए, तो शहर के केडी सिंह बाबू स्टेडियम की छवि सभी के सामने उभरकर आएगी।
बावजूद इसके खेल विभाग का सबसे महत्वपूर्ण स्टेडियम दुर्दशा को अछूता नहीं रहा। स्टेडियम की आउटफील्ड और मेंटीनेंस के मामले में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है, लेकिन ‘देर आए दुरस्त आए’ मुहावरे की तर्ज पर आखिरकार खेल विभाग का ध्यान स्टेडियम की बदहाली पर गया और अब यहां तकरीबन साठ लाख रुपए की लागत से इसे फिर से चमकाने की कवायद शुरू हो गई है।
इस संबंध में मंगलवार क्षेत्रीय क्रीड़ा विभाग की ओर स्टेडियम की आउटफील्ड के अलावा तमाम मेंटीनेंस के लिए दस लाख का इस्टीमेट निदेशालय के माध्यम से शासन को भेजने का फैसला किया गया है।
सबसे पहले सुधरेंगे इस स्टेडियम के हालात
इससे पूर्व ग्राउंड में तकरीबन 50 लाख की लागत वाले नए स्प्रिंकलर्स को लगाने जाने का प्रस्ताव शासन भेजा जा चुका है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एसएस मिश्रा ने बताया कि मुझे स्टेडियम प्रभारी के रूप में नियुक्त हुए अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता है, लेकिन यहां की स्थिति वाकई सोचनीय है।
इसलिए शहर में खेल विभाग के अन्य स्टेडियमों से पहले हम बाबू स्टेडियम को सुधारेंगे। यहां सीवर लाइन का काम चल ही रहा है। बारिश से पहले स्टेडियम के बाथरूम निश्चित रूप से बेहतर स्थिति में आ जाएंगे।
स्प्रिंकलर्स से भी स्टेडियम की हरियाली बनी रहेगी। साथ ही यहां की आउटफील्ड को भी समतल किए जाने की योजना है। हो सकता है कि बारिश के दिनों में स्टेडियम को एक-डेढ़ माह के लिए बंद भी करना पड़े, जिससे ग्राउंड की स्थिति बेहतर होगी।