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महात्मा गांधी पुण्य-स्मरण : चारबाग स्टेशन, जहां नेहरू से पहली बार मिले थे बापू , शिला पर दर्ज है स्मृति
Sun, 30 Jan 2022 01:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 30 Jan 2022 01:16 AM IST
सार
स्मृतिस्वरूप आज भी स्टेशन पर लगा है शिलापट। अमीनाबाद में महिलाओं के लिए बनाया था जनाना पार्क। गोखले मार्ग पर गांधी जी ने शीला कौल के घर पर लगाया था पेड़।
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चारबाग रेलवे स्टेशन
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
क्रिसमस का उल्लास चारों ओर था। गिरिजाघरों को भव्य रूप से सजाया गया था। साल था 1916, तारीख थी 26 दिसंबर और जगह थी चारबाग रेलवे स्टेशन। यह वही पवित्र तिथि थी, जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पंडित जवाहरलाल नेहरू से पहली मुलाकात हुई थी। इस यादगार मुलाकात के निशां आज भी स्टेशन पर मौजूद हैं और रेलवे ने स्मृति स्वरूप यहां गांधी उद्यान बनवाया है, जहां एक शिलापट भी लगा हुआ है।
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चारबाग रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे का एवन श्रेणी का स्टेशन है। यह स्टेशन ऐतिहासिक है। स्मारक के लिहाज से भी और इस मामले में भी कि गांधीजी और जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात यहीं हुई थी। इतिहासविद् विनीत चतुर्वेदी बताते हैं कि इंडियन नेशनल कांग्रेस की वार्षिक मीटिंग में शामिल होने के लिए 26 दिसंबर, 1916 को 27 वर्षीय जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद से लखनऊ ट्रेन से आए थे। इसी मीटिंग में शामिल होने के लिए महात्मा गांधी भी आए हुए थे और चारबाग स्टेशन के पास ही दोनों की मुलाकात हुई। करीब 20 मिनट तक दोनों के बीच वार्ता हुई।
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इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के बाबत बाचतीत हुई। पं. नेहरू ने इस बारे में अपनी आत्मकथा में भी जिक्र किया है, जिसमें लिखा है कि महात्मा गांधी साउथ अफ्रीका में हुई घटना को लेकर कैसे आगे आए। इसमें अहिंसा आंदोलन व चम्पारण जीत वगैरह का जिक्र भी किया गया है। नेहरू ने गांधीजी से देश के युवाओं और मजदूर वर्ग की ओर ध्यान देने की अपील की थी।
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नेहरू चाहते थे कि गांधी देश के मजदूरों को विदेशों में जाकर काम करने से रोकें। दरअसल, उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत हिंदुस्तानियों को अफ्रीका, कैरिबियाई देशों, फिजी में मजदूरी के लिए ले जाया करते थे, जिसका विरोध किया गया। इस बिल को नेहरू ने कांग्रेसियों के सामने रखा था, जिसका गांधीजी ने समर्थन भी किया था। इसके बाद जब चारबाग रेलवे स्टेशन का विस्तार हुआ और देश आजाद हुआ तो रेलवे ने इस यादगार लमहों को संजोने के लिए वहां गांधी उद्यान बना दिया, जहां हेरिटेज इंजन रखा हुआ है और एक शिलापट भी लगा है, जिसमें इस मुलाकात का जिक्र है।
बापू ने गोखले मार्ग पर लगाया था पेड़
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लखनऊ आनाजाना लगा रहता था। पर, आजादी के कुछ बरस पहले, जब वह लखनऊ आए तो यहां गोखले मार्ग पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शीला कौल के घर गए थे, जहां अपने हाथों से उन्होंने एक पौधा लगाया था। जो पेड़ बन गया। ऐसे ही महिलाओं के लिए एक पार्क की नींव डाली, जिसे जनाना पार्क के नाम से जाना जाता है। यह पार्क अमीनाबाद में है।