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UP: पहनावा देखकर मदरसा छात्रों के साथ किया था भेदभाव... RPF के अफसरों की गंभीर भूमिका; अब होगी कार्रवाई

Fri, 31 May 2024 09:33 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 May 2024 09:33 AM IST
सार

कानपुर सेंट्रल में पहनावा देखकर मदरसा छात्रों के साथ भेदभाव किया था। अल्पसंख्यक आयोग की जांच में भेदभाव का आरोप सही पाया गया है। आयोग ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।

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Madrassa students were discriminated against in Kanpur Central based on their attire
Madrassa students - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर सेंट्रल में आरपीएफ द्वारा 14 मदरसा बच्चों को पकड़कर कर बाल सुधार भेजने में अधिकारियों और कर्मचारियों की गंभीर भूमिका सामने आई है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग में इस मामले की सुनवाई के बाद उनके इस कृत्य को भेदभावपूर्ण माना गया है। 
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टोपी-पाजामा में बच्चों को देखकर ये कार्रवाई की गई। आयोग ने दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। आयोग ने रेलवे सुरक्षा बल नार्थ सेंट्रल रेलवे के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (प्रयागराज डिवीजन) को कार्रवाई कर सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
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घाटमपुर के मदरसा इस्लामिया के प्रधानाचार्य ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में इस मामले की शिकायत की थी। उनके मुताबिक घाटमपुर के मदरसे में पढ़ने वाले 14 बच्चे ईद की छुट्टी में अपने घर बिहार गए थे। 24 अप्रैल को सभी बच्चे वापस मदरसा जाने के लिए कानपुर सेंट्रल पर उतरे। 
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सभी के पास वैध टिकट, पहचानपत्र आदि जरूरी दस्तावेज थे। प्रिंसिपल ने कहा कि स्टेशन पर रेलले सुरक्षा बल के उप निरीक्षक अमित द्विवेदी व अन्य सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक लिया। मदरसा प्रशासन द्वारा सारे दस्तावेज दिखाने के बावजूद बच्चों की मुस्लिम वेशभूषा देखकर दोपहर से रात 11 बजे तक भूखा-प्यासा रोके रखा।
 

उन्होंने कहा कि बच्चों को छोड़ने की बात कहकर देर रात सभी को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। सात दिन तक मदरसा छात्र आपराधिक प्रवृत्ति के बच्चों के साथ रहे। बच्चों के मौलिक अधिकारियों के हनन का आरोप लगाया गया।

इस मामले में 15 मई को राज्य अल्पसंख्यक आयोग की पहली सुनवाई थी। जिसमें रेलवे सुरक्षा बल की तरफ से कोई नहीं आया। लगातार सुनवाई के साथ आयोग ने सभी दस्तावेजों , तथ्यों और प्रकरण का अध्ययन किया। जांच के बाद पाया गया कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद रेलवे सुरक्षा बल ने बच्चों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया।

आयोग ने कहा कि बच्चों को जबरन बाल सुधार गृह भेजना उत्पीड़न है, क्योंंकि वहां उन्ही बच्चों को भेजा जाता है जो अपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं या नशे की हालत में पाए जाते हैं। किसी जायज कारण के रेलवे द्वारा की गई इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण मानते हुए आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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