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रिहाई पर उठे सवाल: 12 साल से अमरमणि त्रिपाठी अस्पताल में, फिर किस बात की दया याचिका, क्या थी बीमारी?
Fri, 25 Aug 2023 10:59 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Fri, 25 Aug 2023 10:59 PM IST
सार
निधि ने कहा कि उनके अच्छे आचरण के कारण उन्हें जेल की सजा पूरी होने से पहले जल्दी रिहाई कैसे दी जा सकती है, जबकि उन्होंने बिना किसी वास्तविक बीमारी के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहते हुए जेल की सजा का एक बड़ा समय बिताया है।
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अमरमणि त्रिपाठी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद कहा कि अमरमणि के रिहा होने से उनके पूरे परिवार की जान को खतरा है। मैं सालों से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही हूं लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला। जो व्यक्ति बीते 12 साल से जेल की जगह अस्पताल में है, उसे दया याचिका पर रिहा कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अदालतों द्वारा अमरमणि और उनकी पत्नी को उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के बावजूद कोई भी सरकार उन्हें जेल में नहीं रख पाई।
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बता दें कि निधि शुक्ला अपनी बहन की हत्या होने के बाद लगातार इंसाफ पाने के लिए जूझ रही हैं। अमरमणि और उनकी पत्नी को सजा दिलाने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई जारी रखी। उनकी दया याचिका पर रिहाई के आदेश को भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर हुई सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि रिहाई का आदेश 24 अगस्त की देर रात जल्दबाजी में जारी किया गया, जबकि उन्होंने रिहाई पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी थी।
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इस याचिका पर आज सुनवाई होनी थी। निधि ने कहा कि उनके अच्छे आचरण के कारण उन्हें जेल की सजा पूरी होने से पहले जल्दी रिहाई कैसे दी जा सकती है, जबकि उन्होंने बिना किसी वास्तविक बीमारी के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहते हुए जेल की सजा का एक बड़ा समय बिताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरमणि और मधुमणि ने समयपूर्व रिहाई पाने के लिए अधिकारियों को गुमराह किया है।
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उनको एक आरटीआई जवाब में बताया गया है कि अमरमणि और मधुमणि 2012 से 2023 तक लगातार बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निजी वार्ड में भर्ती थे। उनके लिए अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध थी। अस्पताल के एक निजी कमरे में दिन बिताने को जेल की सजा कैसे माना जा सकता है? उन्हें ऐसी कोई गंभीर बीमारी भी नहीं थी। मैंने अमरमणि द्वारा पेश किए गए झूठे तथ्यों को उजागर करने के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री और आलाधिकारियों को ई-मेल और फोन के जरिए जानकारी भी दी थी।