भारत में है जिनकी ससुराल उन नेपालियों को सुनने पड़ रहे हैं ताने
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मधेस आंदोलन के चलते भारतीय और नेपाली मूल के नागरिकों में खुन्नस बढ़ गई है। ईर्ष्या इतनी है कि दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे को नहीं सुहा रहे हैं।
भारत से रिश्ते करने वाले नेपाल के निवासी मधेसी नागरिकों को वहां के लोगों के बोल और ताने सुनने पड़ रहे हैं। जिंदगी कशमकश भरी हो गई है।
जैसे-तैसे गुजर बसर हो रहा है। इसके चलते रोटी-बेटी के संबंधों को नजर लग गई। रिश्तों में भी खटास की बू आने लगी है। हालांकि लोग अभी भी सब कुछ बेहतर होने की आस संजोये हुए हैं।
भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। यह संबंध त्रेतायुग से कायम है। जिसके चलते नेपाल में भारतीयों को सम्मान मिलता था। वहीं भारत में नेपालियों का भी सम्मान होता रहा है।
नेपाल में भारतीय मूल के मधेसी नागरिकों की आबादी लगभग सवा करोड़ के आसपास है। लेकिन हाल ही में शुरू हुए मधेस आंदोलन से रोटी-बेटी के संबंधों में नजर लगने की आशंका बढ़ गई है।
55 फीसदी लोगों के हैं भारत में रिश्ते
गौरतलब हो कि नेपाल में 55 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनके यहां भारतीय परिवारों से रिश्ते हैं। यह संबंध नेपाल की देवराली पहाड़ी के मैदानी इलाके में अधिक है। यह क्षेत्र सिर्फ बांके जिले तक ही सीमित नहीं है।
बल्कि बर्दिया व मैदानी इलाके की बिहार तक लगने वाली सीमा के बीच रहने वाले नेपाली मधेसी परिवारों में भारतीय रिश्ते हैं। मधेसी आंदोलन के बाद भारतीय परिवारों से रिश्ते रखने वाले नेपाल के मधेसी नागरिकों को नेपाली मूल के लोग हेय दृष्टि से देख रहे हैं।
आए दिन भारत को नेपाल के संकट का जिम्मेदार ठहराते हुए वहां रह रहे मधेसी नागरिकों को तरह-तरह की बोली सुननी पड़ रही है।
जिसके चलते कभी-कभी मधेसी नागरिकों को लगता है कि भारत में रिश्ते करके शायद बड़ी भूल कर दी। हालांकि फिर हालात सुधरने की बात सोचकर सभी मन मसोस कर रह जाते हैं।