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स्कूटर इंडिया की लाखों रुपये की मशीनें चुराकर कबाड़ में बेची, चार गिरफ्तार
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लखनऊ। वर्षों से बंद पड़े स्कूटर इंडिया के सामानों को चोरी कर कबाड़ में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश सरोजनीनगर पुलिस ने किया है। इस गिरोह के चार सदस्यों को दबोचकर उनके पास से लाखों रुपये का सामान बरामद किया है। आरोपी इसे कबाड़ में बेचने जा रहे थे।
प्रभारी निरीक्षक सरोजनीनगर संतोष कुमार आर्या के मुताबिक ,कानपुर रोड पर स्कूटर इंडिया लि. है जो कई साल पहले बंद हो गई थी। कर्मचारियाें ने सूचना दी कि बंद फैक्ट्री में रात में गाड़ियां आती-जाती हैं। जांच में पता चला कि कुछ शातिर रात में दो बजे के बाद फैक्टरी के पिछले गेट से अंदर दाखिल होकर कीमती मशीनें, लोहा, तांबा जैसे सामान चुराते हैं। शनिवार रात पुलिस ने चार लोगों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में मूलरूप से बलरामपुर के पटेलनगर का रहने वाला (वर्तमान में सरोजनीनगर के गहरू गांव मे रहता है) प्रभु कश्यप, बंथरा केगढ़ी चुनौटी का राजू सिंह, विजय सिंह उर्फ रिंकू और पवन कश्यप शामिल हैं।
कबाड़ का कारोबारी था चोर गिरोह का सरगना
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक पकड़े गये शातिर चोर गिरोह का सरगना कबाड़ कारोबारी प्रभु कश्यप है। प्रभु इसके पहले चिनहट में चोरी के माल सहित पकड़ा गया था। जहां से जेल भेजा गया था। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि स्कूटर इण्डिया कंपनी में काफी मशीनरी का सामान मौजूद है। यहां से मशीनरी को करीब 10-12 बार चोरी किया गया है। कंपनी के पिछले हिस्से से फैक्ट्री में कूदकर फैक्ट्री का कीमती सामान चुराकर प्रभु कश्यप अपनी ईको-स्पोर्ट गाड़ी में लादकर ले जाता था। राजू सिंह थाना बंथरा में मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार हो चुका है। आरोपी इतने शातिर हैं कि लग्जरी कार में चोरी का माल लेकर सामान को बेचते हैं। जिससे कोई भी इनके ऊपर शक ना कर सके।
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1972 में स्थापित हुई थी स्कूटर इंडिया
1971 में मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से स्कूटर इंडिया को लखनऊ में नया नाम देकर बसाने की सिफारिश की। 1972 में इटली से प्लांट व मशीनरी, डाक्यूमेंट और ट्रेडमार्क खरीद लिए गए और देसी ब्रांड स्कूटर इंडिया की स्थापना हुई। कानपुर रोड के पास 147.49 एकड़ जमीन पर आठ अप्रैल 1973 को स्कूटर इंडिया की नीव पड़ी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिलान्यास किया। यहां खासतौर पर तिपहिया विक्रम लैम्ब्रो बनाना मकसद था। लेकिन शुरुआत स्कूटर से हुई। यहां से विजय डीलक्स और एक्सपोर्ट के लिए लम्ब्रेटा ब्रांड का उत्पादन होता रहा। देश भर में टू व्हीलर के क्षेत्र में स्कूटर इंडिया को नई पहचान दी।
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प्रभारी निरीक्षक सरोजनीनगर संतोष कुमार आर्या के मुताबिक ,कानपुर रोड पर स्कूटर इंडिया लि. है जो कई साल पहले बंद हो गई थी। कर्मचारियाें ने सूचना दी कि बंद फैक्ट्री में रात में गाड़ियां आती-जाती हैं। जांच में पता चला कि कुछ शातिर रात में दो बजे के बाद फैक्टरी के पिछले गेट से अंदर दाखिल होकर कीमती मशीनें, लोहा, तांबा जैसे सामान चुराते हैं। शनिवार रात पुलिस ने चार लोगों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में मूलरूप से बलरामपुर के पटेलनगर का रहने वाला (वर्तमान में सरोजनीनगर के गहरू गांव मे रहता है) प्रभु कश्यप, बंथरा केगढ़ी चुनौटी का राजू सिंह, विजय सिंह उर्फ रिंकू और पवन कश्यप शामिल हैं।
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कबाड़ का कारोबारी था चोर गिरोह का सरगना
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक पकड़े गये शातिर चोर गिरोह का सरगना कबाड़ कारोबारी प्रभु कश्यप है। प्रभु इसके पहले चिनहट में चोरी के माल सहित पकड़ा गया था। जहां से जेल भेजा गया था। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि स्कूटर इण्डिया कंपनी में काफी मशीनरी का सामान मौजूद है। यहां से मशीनरी को करीब 10-12 बार चोरी किया गया है। कंपनी के पिछले हिस्से से फैक्ट्री में कूदकर फैक्ट्री का कीमती सामान चुराकर प्रभु कश्यप अपनी ईको-स्पोर्ट गाड़ी में लादकर ले जाता था। राजू सिंह थाना बंथरा में मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार हो चुका है। आरोपी इतने शातिर हैं कि लग्जरी कार में चोरी का माल लेकर सामान को बेचते हैं। जिससे कोई भी इनके ऊपर शक ना कर सके।
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1972 में स्थापित हुई थी स्कूटर इंडिया
1971 में मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से स्कूटर इंडिया को लखनऊ में नया नाम देकर बसाने की सिफारिश की। 1972 में इटली से प्लांट व मशीनरी, डाक्यूमेंट और ट्रेडमार्क खरीद लिए गए और देसी ब्रांड स्कूटर इंडिया की स्थापना हुई। कानपुर रोड के पास 147.49 एकड़ जमीन पर आठ अप्रैल 1973 को स्कूटर इंडिया की नीव पड़ी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिलान्यास किया। यहां खासतौर पर तिपहिया विक्रम लैम्ब्रो बनाना मकसद था। लेकिन शुरुआत स्कूटर से हुई। यहां से विजय डीलक्स और एक्सपोर्ट के लिए लम्ब्रेटा ब्रांड का उत्पादन होता रहा। देश भर में टू व्हीलर के क्षेत्र में स्कूटर इंडिया को नई पहचान दी।