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Lucknow News: चूल्हे के धुएं से घुट रहा फेफड़ों का दम
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लखनऊ। चूल्हे में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी, उपले और फसल अवशेष जैसे बायोमास ईंधनों का धुआं फेफड़ों की गंभीर बीमारी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का बड़ा कारण बन रहा है। चिंता की बात यह है कि केवल धुएं के करीब रहने वाले ही नहीं, बल्कि घर के बाकी लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। राजधानी स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों की ओर से किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
लोहिया संस्थान के डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. अनुज कुमार पांडेय और उनके सहयोगियों की ओर से किए गए इस अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल लंग इंडिया में प्रकाशित किया गया है। 416 सीओपीडी मरीजों किए गए अध्ययन में करीब 35 प्रतिशत मरीजों ने कभी धूम्रपान नहीं किया था। ऐसे मरीजों में बायोमास ईंधन के धुएं का संपर्क सबसे फेफड़ों की समस्या का बड़ा जोखिम कारक पाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे के ज्यादा इस्तेमाल के कारण वहां की महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित पाई गईं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि धुएं के लगातार संपर्क से फेफड़ों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय गिरावट आती है। डॉ. अजय कुमार वर्मा ने स्वच्छ ईंधन अपनाने, रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने और घरेलू वायु प्रदूषण कम करने पर जोर दिया।
- फैक्ट फाइल
- 416 सीओपीडी मरीजों पर किया गया अध्ययन
- 35 फीसदी मरीज गैर-धूम्रपान करने वाले मिले
- लकड़ी, कोयला व बायोमास ईंधन का धुआं प्रमुख - जोखिम कारक
- ग्रामीण महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित
- 2.6 अरब लोग दुनिया में अब भी ठोस ईंधन का उपयोग करते हैं
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लोहिया संस्थान के डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. अनुज कुमार पांडेय और उनके सहयोगियों की ओर से किए गए इस अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल लंग इंडिया में प्रकाशित किया गया है। 416 सीओपीडी मरीजों किए गए अध्ययन में करीब 35 प्रतिशत मरीजों ने कभी धूम्रपान नहीं किया था। ऐसे मरीजों में बायोमास ईंधन के धुएं का संपर्क सबसे फेफड़ों की समस्या का बड़ा जोखिम कारक पाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे के ज्यादा इस्तेमाल के कारण वहां की महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित पाई गईं।अध्ययन में यह भी पाया गया कि धुएं के लगातार संपर्क से फेफड़ों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय गिरावट आती है। डॉ. अजय कुमार वर्मा ने स्वच्छ ईंधन अपनाने, रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने और घरेलू वायु प्रदूषण कम करने पर जोर दिया।
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- फैक्ट फाइल
- 416 सीओपीडी मरीजों पर किया गया अध्ययन
- 35 फीसदी मरीज गैर-धूम्रपान करने वाले मिले
- लकड़ी, कोयला व बायोमास ईंधन का धुआं प्रमुख - जोखिम कारक
- ग्रामीण महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित
- 2.6 अरब लोग दुनिया में अब भी ठोस ईंधन का उपयोग करते हैं