अब नहीं रही लखनऊ चिड़िया घर की शान ‘शुभांगी’
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अरसे तक लखनऊ जू का आकर्षण बनी रही सबसे बुजुर्ग बब्बर शेरनी शुभांगी नहीं रही। बढ़ती उम्र के चलते वह कई महीनों से बीमार थी जिससे बेहद कमजोर हो गई थी। इसके चलते वह गोश्त नहीं खा पा रही थी।
उसे बोनलेस मीट दिया जा रहा था। उम्र अधिक हो जाने के कारण शुभांगी शेरनी के उसके दांत भी घिस गये थे और पंजों के नाखून भी हद तक घिस गये थे।
सोमवार सुबह 21 साल की मादा हाईब्रिड लॉयन शुभांगी ने अपने बाड़े में दम तोड़ दिया। गुजरात से आए बब्बर शेरों और उसके बाद वसुंधरा के शावकों की पैदाइश के बाद शुभांगी का बेड़ा बदल दिया गया था।
तीन-चार साल से वह संग्रहालय परिसर में खड़े हवाई जहाज के पीछे बब्बर शेर के बाड़े में बिल्कुल पीछे के बाड़े में रह रही थी। पर्सनल स्टाफ, साथी बब्बर शेर ही उसके नजदीक जा पाते थे।
कई दिनों से सिर्फ बोनलेस मीट पर जी रही थी
निदेशक लखनऊ प्राणि उद्यान अनुपम गुप्ता ने बताया कि शुभांगी को छतबीर प्राणि उद्यान चंडीगढ़ से अप्रैल 2003 में लाया गया था। तब वह साढ़े 6 वर्ष से अधिक की थी।
बीमारी के चलते उसे डॉक्टरों व कीपरों की विशेष निगरानी में रखा गया था। उसे खाने के लिये बिना हड्डी वाला नरम गोश्त दिया जा रहा था ताकि उसे खाने में दिक्कत न हो और उसे पचा सके।
निदेशक के मुताबिक उसे रेगुलर डोज के अलावा अलग से कैल्शियम, विटामिन दिए जा रहे थे। पोस्टमार्टम में उसके अंदरूनी अंगों का काम करना बंद करना पाया गया। सोमवार को जू परिसर में ही उसका शवदाह किया गया।
17-18 साल ही होती है उम्र
सामान्यत: शेरनी की उम्र लगभग 17 से 18 वर्ष की होती हैै। हालांकि विशेष रखरखाव और दिनचर्या के चलते ये कुछ और साल भी जीवित रह सकते हैं। शुभांगी का भी विशेष ध्यान दिया जाता था। शायद इसी वजह से वह 21 साल तक जीवित रही।
लेकिन शुभांगी की निशानी तक नहीं
हाइब्रिड लॉयन प्रजाति की होने के चलते शुभांगी को कभी भी क्रास नहीं कराया गया। यही कारण है कि हाइब्रिड लायन प्रिंस या शुभांगी की कोई संतान नहीं है।
जू में इस वक्त 21-22 साल का बुजुर्ग बब्बर शेर प्रिंस ही है, जो शुभांगी के बगल के बाड़े में रहता है। इसके अलावा वयस्क नर बब्बर शेर पृथ्वी, मादा वसुंधरा और 22 महीनों से अधिक उम्र के उनके चार शावक रह रहे हैं।