22 साल बाद संघ की गतिविधियों का केंद्र बना यूपी
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करीब 22 साल बाद राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक यूं ही नहीं हो रही। संघ ने यूपी को अपनी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
वजह यह है कि संघ 2017 में प्रदेश में भाजपा की और 2019 में दिल्ली में दूसरी बार भाजपा की सरकार चाहता है। संघ जानता है कि भले ही यूपी में भाजपा को कई बार बड़ी कामयाबियां मिलती रही हों लेकिन वैचारिक अधिष्ठान के स्तर पर बहुत कुछ करना बाकी है।
लखनऊ में संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 1992 में उस समय हुई थी, जब मंदिर आंदोलन की गूंज थी। 2011 में संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक गोरखपुर में हुई थी। अब, जब लखनऊ में 17, 18 व 19 अक्तूबर को बैठक प्रस्तावित है तब मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 282 और एनडीए को 336 सीटें मिली हैं लेकिन, संघ उनकी सरकार केवल एक कार्यकाल तक सीमित नहीं रखना चाहता। संघ परिवार और खुद मोदी दस साल के शासन की बात कर रहे हैं। इसके लिए यूपी पर ध्यान देने को सबसे जरूरी माना गया है।
मेरठ में संघ को मिली बड़ी कामयाबी
लोकसभा चुनाव में यूपी में भले ही भाजपा को भारी जीत हासिल हुई हो लेकिन उपचुनाव में उसे झटका लगा है। यूपी में भाजपा को एक चेहरे की जरूरत थी।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को मोदी के नाम पर वोट मिले लेकिन केंद्र में सरकार और मोदी के प्रधानमंत्री होने के बावजूद उपचुनाव में उसे चमत्कारिक और जनता में भरोसा पैदा करने वाला कोई चेहरा नहीं मिला। संघ यूपी के संदर्भ में इस बात पर भी मंथन करेगा कि यूपी में कैसे भरोसेमंद नेतृत्व विकसित किया जाए।
वैचारिक जमीन तैयार करने पर जोर
यूपी में आधार मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति के तहत संघ ने वैचारिक जमीन मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके लिए धर्म जागरण सभाओं और धर्मांतरित लोगों की घर वापसी के कार्यक्रम बनाए गए हैं। पश्चिमी यूपी में ही एक लाख लोगों की घर वापसी का लक्ष्य रखा गया है।
संघ के ग्रास रूट संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य संख्या में वृद्धि हुई है। प्राथमिक शिक्षा वर्ग में उपस्थिति से भी संघ उत्साहित है। उदाहरण के तौर पर मेरठ प्रांत के प्राथमिक शिक्षा वर्ग में 2013 में तीन हजार स्वयंसेवकों की उपस्थिति थी। इस बार यह संख्या बढ़कर छह हजार पहुंच गई है।
प्रदेश में संघ की छोटी-बड़ी 12 हजार शाखाएं
आरएसएस की योजना युवाओं में पैठ बढ़ाने की है। इसके लिए कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। लखनऊ विभाग में तरुण शक्ति संगम नाम से संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके लिए ग्रेजुएशन स्तर के छात्रों को संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका से अवगत कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के प्रभारी आशुतोष बीबीडी यूनिवर्सिटी के करीब चार सौ छात्रों के मार्गदर्शन के साथ इसकी शुरुआत कर चुके हैं।
लखनऊ में ही 20-21 सितंबर को विद्यार्थी परिषद की महिला शाखा का सम्मेलन हो चुका है। इसी में विद्यार्थी परिषद ने लव जेहाद का विरोध करने का निर्णय किया। आगरा में एक से तीन नवंबर तक संघ का युवा शिविर होने जा रहा है। इसमें बारहवीं क्लास से ऊपर के पांच सौ स्वयंसेवक शामिल होंगे। तकनीकी और प्रोफेशनल रुझान वाले छात्रों पर भी संघ की नजर है।
शाखाओं में भागीदारी बढ़ाने की चिंता
प्रदेश में लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत के बावजूद संघ की शाखाओं में स्वयंसेवकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। कुछ शाखाएं और प्रतिभागी बढ़े जरूर हैं लेकिन इससे संघ परिवार संतुष्ट नहीं है।
संघ के एक पदाधिकारी के मुताबिक प्रदेश में इस समय संघ की छोटी-बड़ी 12 हजार शाखाएं चल रही हैं लेकिन इनमें पहले जैसी उपस्थिति नहीं रहती। युवाओं की भागीदारी भी अपेक्षाकृत कम है। संघ का प्रयास है कि शाखाएं भी बढ़ें और उनमें प्रतिभाग करने वाले स्वयंसेवक भी।
शीर्ष नेतृत्व में यूपी की कम भागीदारी
जनसंख्या के लिहाज से उप्र भले ही देश का सबसे बड़ा राज्य हो लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व में उसकी भागीदारी बहुत कम है। संघ के शीर्षस्थ 39 पदाधिकारियों में केवल चार उप्र से हैं। 1925 में संघ की स्थापना के बाद से केवल राजेन्द्र सिंह उर्फ रज्जू भैया ही एकमात्र सरसंघ चालक रहे जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे।
यूपी से संबंध रखने वाले संघ के प्रमुख पदाधिकारियों में डॉ. कृष्ण गोपाल सह सरकार्यवाह हैं। बालकृष्ण त्रिपाठी सह व्यवस्था प्रमुख और विनोद कुमार सह प्रचारक प्रमुख हैं। रामनारायण संघ के नागपुर मुख्यालय (हेडगेवार भवन) के प्रभारी हैं।
इससे पहले रज्जू भैया के अलावा सह सेवा प्रमुख के रूप में ओमप्रकाश और श्यामजी गुप्त, बौद्घिक प्रमुख के रूप में कौशल किशोर, संपर्क प्रमुख के रूप में जगमोहन गर्ग और प्रचार प्रमुख के रूप में अधीश कुमार संघ की राष्ट्रीय टीम में रह चुके हैं। संभव है, आने वाले समय में यूपी की भागीदारी कुछ बढ़ जाए।