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Lucknow News: लविविः चार वर्षीय स्नातक में अब मिलेंगे तीन नए विकल्प
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लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अब चौथे वर्ष में विद्यार्थियों को शोध, उद्यमिता और ऑनर्स के रूप में तीन शैक्षणिक विकल्प मिलेंगे। इससे 7.5 सीजीपीए से कम अंक वाले छात्रों को भी चौथा वर्ष पूरा करने का अवसर देगा।
विश्वविद्यालय सत्र 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। पहले की व्यवस्था के अनुसार चौथे वर्ष में केवल यूजी ऑनर्स विद रिसर्च का विकल्प था। इसके लिए न्यूनतम 7.5 सीजीपीए अनिवार्य था, जिससे कई छात्र वंचित रह जाते थे। ऐसे में नए विकल्पों से छात्रों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार मार्ग चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी। कुलपति जेपी सैनी ने कहा, नई व्यवस्था के तहत 7.5 से कम सीजीपीए वाले विद्यार्थियों के लिए भी 160 क्रेडिट की पूर्ण चार वर्षीय स्नातक डिग्री पाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को उनके कॅरिअर लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगी। यह बदलाव यूजीसी के पाठ्यक्रम और क्रेडिट ढांचे के अनुरूप है।
तीनों विकल्पों की अर्हता और स्वरूप
यूजी ऑनर्स विद रिसर्च के लिए पहले छह सेमेस्टर में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए आवश्यक है। इसमें 12 क्रेडिट का शोध प्रोजेक्ट पूरा करना अनिवार्य होगा। यूजी ऑनर्स विद उद्यमिता के लिए पहले छह सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्र पात्र हैं। इसमें 12 क्रेडिट का औद्योगिक प्रशिक्षण शामिल है। यूजी ऑनर्स विकल्प भी सभी उत्तीर्ण छात्रों के लिए है, जिसमें 12 क्रेडिट के उन्नत पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएंगे। इन उन्नत पाठ्यक्रमों में से 50 फीसदी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगे।
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सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन
इस नई त्रि-मार्गीय व्यवस्था का विस्तृत शैक्षणिक विनियम बनाने के लिए प्रो. मनुका खन्ना की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। यह समिति क्रेडिट संरचना, उद्योग से जुड़ाव की रूपरेखा और कार्यान्वयन के दिशानिर्देश तैयार करेगी। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सक्षम वैधानिक निकायों को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी।
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विश्वविद्यालय सत्र 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। पहले की व्यवस्था के अनुसार चौथे वर्ष में केवल यूजी ऑनर्स विद रिसर्च का विकल्प था। इसके लिए न्यूनतम 7.5 सीजीपीए अनिवार्य था, जिससे कई छात्र वंचित रह जाते थे। ऐसे में नए विकल्पों से छात्रों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार मार्ग चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी। कुलपति जेपी सैनी ने कहा, नई व्यवस्था के तहत 7.5 से कम सीजीपीए वाले विद्यार्थियों के लिए भी 160 क्रेडिट की पूर्ण चार वर्षीय स्नातक डिग्री पाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को उनके कॅरिअर लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ने का उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगी। यह बदलाव यूजीसी के पाठ्यक्रम और क्रेडिट ढांचे के अनुरूप है।
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तीनों विकल्पों की अर्हता और स्वरूप
यूजी ऑनर्स विद रिसर्च के लिए पहले छह सेमेस्टर में न्यूनतम 7.5 सीजीपीए आवश्यक है। इसमें 12 क्रेडिट का शोध प्रोजेक्ट पूरा करना अनिवार्य होगा। यूजी ऑनर्स विद उद्यमिता के लिए पहले छह सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्र पात्र हैं। इसमें 12 क्रेडिट का औद्योगिक प्रशिक्षण शामिल है। यूजी ऑनर्स विकल्प भी सभी उत्तीर्ण छात्रों के लिए है, जिसमें 12 क्रेडिट के उन्नत पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएंगे। इन उन्नत पाठ्यक्रमों में से 50 फीसदी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगे।
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सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन
इस नई त्रि-मार्गीय व्यवस्था का विस्तृत शैक्षणिक विनियम बनाने के लिए प्रो. मनुका खन्ना की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। यह समिति क्रेडिट संरचना, उद्योग से जुड़ाव की रूपरेखा और कार्यान्वयन के दिशानिर्देश तैयार करेगी। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सक्षम वैधानिक निकायों को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी।