लखनऊ यूनिवर्सिटी में शिक्षकों का धरना, पीएचडी में सिर्फ आठ सीटें बढ़ने से नाराज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएचडी प्रवेश को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय के टीचर्स एसोसिएशन ने विरोध करने का निर्णय किया है। इसके लिए उन्होंने 14 को आकस्मिक जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाई है। सोमवार को लविवि ने पीएचडी करने वाले शिक्षकों के लिए सिर्फ आठ सीटें बढ़ाईं थी।
इससे पहले लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) की कवायद और 15 दिन चले घमासान का कोई खास नतीजा नहीं निकला। विवि के 30 शिक्षकों लिखकर दिया था कि 6 महीने में अपने अधीन रजिस्टर्ड शोधार्थियों की थीसिस जमा करा देंगे, इसके बाद भी पीएचडी सीटों की संख्या मात्र आठ ही बढ़ी। पूर्व में घोषित 514 की जगह सीटों की संख्या अब 522 हो गई है। जबकि ब्रोशर के साथ विवि ने 648 सीटों पर आवेदन मांगे थे। इस तरह पहले के मुकाबले 126 सीटें कम होंगी।
विवि द्वारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद बीच में नियमों को संशोधित करके उन शिक्षकों को सीटें अलॉट करने से मना कर दिया गया जो अगले तीन साल में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। हालांकि शिक्षकों के विरोध के बाद इसमें राहत दी गई, फिर भी अंतिम रूप से मार्च 2022 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को सीटें नहीं दी गईं। इसी तरह विवि ने असिस्टेंट, एसोसिएट व प्रोफेसर को एक साथ आठ सीटें आवंटित करने की जगह तीन साल में चरणबद्ध सीटों के आवंटन का निर्णय लिया। इसमें राहत दी गई लेकिन प्रोफेसर्स को एक साल में सिर्फ तीन सीटें ही दी गई हैं। सीटों का मामला लूटा चुनाव का मुद्दा भी बना और नए पदाधिकारियों ने इसके लिए कवायद भी शुरू की। समझौता हुआ, लेकिन नतीजा अंतिम रूप से उनके पक्ष में नहीं रहा। पूर्व में घोषित सीटों में अपेक्षाकृत बहुत कम वृद्धि हुई। अब इसे लेकर लूटा भी खिन्न है, लेकिन इस पर बोलने के लिए कोई तैयार नहीं है। विवि में पीएचडी के आधे इंटरव्यू भी हो चुके हैं।
लूटा पदाधिकारी प्रति कुलपति से मिले
विवि प्रशासन द्वारा सीटों को अंतिम रूप देने की जानकारी लेने लूटा अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन व महामंत्री डॉ. विनीत वर्मा प्रति कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह से मिले। प्रो. सिंह ने बताया कि सीटों की संख्या कुल 522 हुई है। आवेदन करने वाले शिक्षकों को नियमानुसार सीट आवंटन किया गया है। वहीं डीआरसी में सीटों की गणना गलत थी, वहां सीटें कम की गई हैं। लूटा महामंत्री डॉ. विनीत वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को आवंटित सीटों का विस्तृत ब्योरा आने के बाद अगला निर्णय होगा। कोई शिक्षक अगर अलग से आवेदन देते हैं तो उस पर भी विचार होगा।
...तो अगले सत्र में नहीं बचेगी एक भी सीट
विवि प्रशासन का एक तर्क ये भी है कि अगले पांच-छह महीने के अंदर ही नए सत्र के लिए अगली पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया होगी। ऐसे में अगर शिक्षकों की सभी सीटें अभी भर जाएंगी तो नए सत्र में एक भी सीट नहीं होगी। इसलिए शिक्षकों को धैर्य रखना चाहिए, जिन शिक्षकों की इस बार सीटें कम हुई हैं वे अगले सत्र में आवंटित होंगी।
विभागवार सीटों का ब्योरा
प्राचीन भारतीय इतिहास व आर्कियोलॉजी- 6
एंथ्रोपोलॉजी- 4
अरब कल्चर- 1
अरेबिक- 9
अर्थशास्त्र- विवि 13, कॉलेज 1, कुल 14
अंग्रेजी- विवि 15, कॉलेज 16, कुल 31
फ्रेंच- 2
हिंदी- विवि 10, कॉलेज 18, कुल 28
मध्यकालीन व मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री- 2
पत्रकारिता- 1
ज्योर्तिविज्ञान- 1
लाइब्रेरी व इंफार्मेशन साइंस- 2
लिंग्विशटिक- 4
ओरिएंटल संस्कृत- 3
परसियन- 2
फिलॉशिफी- 15
फिजिकल एजुकेशन- 2
राजनीति विज्ञान- 8
पॉपुलेशन एजुकेशन एंड रूरल डेवलपमेंट- 2
साइकोलॉजी- 10
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन- 5
संस्कृत व प्रकृत लैंग्वेज- 9
सोशल वर्क- 6
समाजशास्त्र- विवि 9, कॉलेज 23, कुल 32
उर्दू- विवि 12, कॉलेज 5, कुल 12
वेस्टर्न हिस्ट्री- 4
अप्लाइड इकोनॉमिक्स- विवि 12, कॉलेज 2, कुल 14
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन- 7
कॉमर्स- 16 कॉलेज में
लॉ- 37
एजुकेशन- 7
फाइन आर्ट्स- 7
बायोकेमेस्ट्री- 6
बॉटनी व ईवीएस- 27
केमेस्ट्री- विवि 21, कॉलेज 7, कुल 28
कंप्यूटर साइंस- 6
जियोलॉजी व ईवीएस- 18
मैथ्स- 16
फिजिक्स- 47
स्टेटिक्स व बायो स्टेटिक्स- विवि 8, कॉलेज 6, कुल 14
जूलॉजी- विवि 30, कॉलेज 22, कुल 52