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Lucknow News: लविवि में अमेरिकी पढ़ेंगे उर्दू और पर्शियन का पाठ
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लखनऊ। अमेरिका वासियों के लिए उर्दू और पर्शियन सीखने का बड़ा सेंटर बनेगा अब लखनऊ विश्वविद्यालय।अमेरिकी संस्थान नई दिल्ली और लखनऊ के सहयोग से लविवि में अगले महीने से विशेष पाठ्यक्रम शुरू होगा। इसमें संस्थान की ओर से नामित विद्यार्थी पढ़ाई कर सकेंगे। पूरे देशभर में लखनऊ विवि को इस विशिष्ट पाठ्यक्रम को संचालित करने का मौका मिला है। संस्थान की ओर से तैयार छह सप्ताह के विशिष्ट मॉड्यूल के माध्यम से इसकी पढ़ाई अगले महीने से शुरू होगी।
विवि की डीन एकेडमिक्स प्रो. पूनम टंडन के अनुसार, इन विभागों की ओर से पेश किया जाने वाला अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के लिए विवि का चयन होना गौरव की बात है। अभी तक अमेरिका से उर्दू और पर्शियन जैसी भाषाएं सीखने के लिए अरब देश जाने की परंपरा थी। राजनैतिक बदलाव के बाद अब वे भारत का रुख कर रहे हैं। लविवि में पर्शियन और उर्दू जैसे विभागों की समृद्ध परंपरा है। इन विभागों के माध्यम से अमेरिकी भी उर्दू और पर्शियन का पाठ पढ़ सकेंगे।
लविवि में अंतरराष्ट्रीय छात्र सलाहकार प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि भाषा और संस्कृति साथ-साथ चलती हैं। इन पर कम अवधि के पाठ्यक्रम संचालन से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। अच्छी बात है कि इस तरह के लघु कार्यक्रमों की शुरुआत हो रही है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट में नामांकित छात्र लविवि परिसर में पर्शियन और उर्दू विभागों के साथ ही भाषा, संस्कृति और संचार में छह सप्ताह का प्रशिक्षण लेंगे। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि हम वैज्ञानिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक ज्ञान और परंपरा को विश्व में फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। परिसर में इस समय दो सौ से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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विदेशी विद्यार्थियों के लिए संचालित है हिंदी का विशेष पाठ्यक्रम
लविवि में पर्शियन और उर्दू से पहले ही विदेशी विद्यार्थियों के लिए हिंदी में बातचीत करने के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम संचालित है। कम्युनिकेटिव हिंदी नाम के इस पाठ्यकम का संचालन भाषा विज्ञान विभाग में किया जाता है। इसमें विदेशी विद्यार्थी दाखिला लेकर हिंदी सीख रहे हैं।
जल्द शुरू होंगे भाषा पर आधारित शॉर्ट टर्म कोर्स
लविवि में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अरेबिक, संस्कृत, फ्रेंच सहित कई भाषाओं के विभाग हैं। इन भाषाओं के प्रसार तथा बढ़ावा देने के लिए इन पर आधारित शॉर्ट टर्म के कोर्स शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को भाषाओं का ज्ञान होगा तो वहीं दूसरी ओर इन विभागों में दाखिले कम होने का संकट भी दूर होगा।
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विवि की डीन एकेडमिक्स प्रो. पूनम टंडन के अनुसार, इन विभागों की ओर से पेश किया जाने वाला अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के लिए विवि का चयन होना गौरव की बात है। अभी तक अमेरिका से उर्दू और पर्शियन जैसी भाषाएं सीखने के लिए अरब देश जाने की परंपरा थी। राजनैतिक बदलाव के बाद अब वे भारत का रुख कर रहे हैं। लविवि में पर्शियन और उर्दू जैसे विभागों की समृद्ध परंपरा है। इन विभागों के माध्यम से अमेरिकी भी उर्दू और पर्शियन का पाठ पढ़ सकेंगे।
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लविवि में अंतरराष्ट्रीय छात्र सलाहकार प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि भाषा और संस्कृति साथ-साथ चलती हैं। इन पर कम अवधि के पाठ्यक्रम संचालन से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। अच्छी बात है कि इस तरह के लघु कार्यक्रमों की शुरुआत हो रही है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट में नामांकित छात्र लविवि परिसर में पर्शियन और उर्दू विभागों के साथ ही भाषा, संस्कृति और संचार में छह सप्ताह का प्रशिक्षण लेंगे। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि हम वैज्ञानिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक ज्ञान और परंपरा को विश्व में फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। परिसर में इस समय दो सौ से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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विदेशी विद्यार्थियों के लिए संचालित है हिंदी का विशेष पाठ्यक्रम
लविवि में पर्शियन और उर्दू से पहले ही विदेशी विद्यार्थियों के लिए हिंदी में बातचीत करने के लिए विशिष्ट पाठ्यक्रम संचालित है। कम्युनिकेटिव हिंदी नाम के इस पाठ्यकम का संचालन भाषा विज्ञान विभाग में किया जाता है। इसमें विदेशी विद्यार्थी दाखिला लेकर हिंदी सीख रहे हैं।
जल्द शुरू होंगे भाषा पर आधारित शॉर्ट टर्म कोर्स
लविवि में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अरेबिक, संस्कृत, फ्रेंच सहित कई भाषाओं के विभाग हैं। इन भाषाओं के प्रसार तथा बढ़ावा देने के लिए इन पर आधारित शॉर्ट टर्म के कोर्स शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को भाषाओं का ज्ञान होगा तो वहीं दूसरी ओर इन विभागों में दाखिले कम होने का संकट भी दूर होगा।