लखनऊ विश्वविद्यालय विवाद, 116 पर एफआईआर, प्रोवोस्ट ने छोड़ा हॉस्टल
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चार दिन तक लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन, कैलाश हॉस्टल की प्रोवोस्ट व समर्थकों के बीच चली नूरा-कुश्ती बुधवार को देर रात खत्म हो गई। इधर हसनगंज पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोवोस्ट के पिता व भाई समेत 116 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई।
उधर, रात 10.45 बजे प्रो. शीला मिश्रा ने भाई समेत हॉस्टल खा्ली कर दिया। कैलाश हॉस्टल प्रकरण में मंगलवार रात हुए उपद्रव के बाद हसनगंज पुलिस ने प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा और उनके पिता व भाई सहित 116 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी।
विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से भी 21 उपद्रवियों के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। हॉस्टल खाली कराने को लेकर बुधवार सुबह से रात तक प्रोवोस्ट और उनकी समर्थक छात्राओं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नूरा-कुश्ती चल रही थी।
विश्वविद्यालय का माहौल इस कदर बिगड़ गया कि दोपहर को चीफ प्रोवोस्ट, डीएसडब्ल्यू और चीफ प्रॉक्टर ने इस्तीफे की पेशकश कर गरमी बढ़ा दी। कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने प्रोवोस्ट की मान-मनौव्वल करने पहुंचे थे।
प्रोवोस्ट को तीसरी बार दिया गया मौका
इससे पूर्व बुधवार दोपहर कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में कई बिंदुओं पर सहमति बनी। कार्य परिषद ने प्रोवोस्ट को शाम पांच बजे तक हॉस्टल खाली करने का तीसरा मौका देने, प्रोवोस्ट का साथ देने वाली 20 छात्राओं के स्थानीय अभिभावकों को बुलाकर उन्हें जाने के लिए कहने, कैलाश हॉस्टल के चपरासियों को छोड़कर सभी पुरुषों को छात्रावास से बाहर निकालने, पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च समिति गठित करने का प्रस्ताव पास किया था।
शाम होते ही पुलिस व पीएसी ने संभाल लिया था मोर्चा
कार्य परिषद के निर्णय के अनुसार प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा को हॉस्टल खाली करने के लिए तीसरा पत्र दोपहर में रिसीव करा दिया गया। शाम पांच बजते-बजते भारी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान हॉस्टल के बाहर तैनात हो गए।
विवि प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने भी एक -दो बार कैलाश हॉस्टल का राउंड लगाया। प्रो. शीला मिश्रा द्वारा सात बजे तक हॉस्टल न छोड़ने पर कुलपति प्रो. एसबी निमसे खुद कैलाश हॉस्टल पहुंच गए। उन्होंने करीब एक घंटे तक प्रोवोस्ट की मान-मनौव्वल। कुलपति का दावा था कि वार्ता सकारात्मक रही है। कार्यपरिषद के सभी निर्णयों का पालन होगा।
इनके खिलाफ मुकदमा, ये लगे आरोप
हसनगंज एसओ दिनेश सिंह ने बताया कि प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा, उनके भाई राजेश मिश्रा राजन, पिता सहित अनुराग तिवारी, अभय सिंह, प्रभात सिंह, अनूप सिंह, शशांक बाजपेयी, विश्वजीत, अविनाश राय, नीरज पांडेय, शैलेंद्र सिंह, पंकज पाठक, आशुतोष सिंह, अंकित, विनय, शुभम और विनय विक्रम सिंह को नामजद करने के साथ ही 100 से अधिक अज्ञात छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
ये हैं आरोप
प्रोवोस्ट और उनके समर्थकों पर बलवा, उपद्रव, हत्या का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा, लूट, गाली-गलौज और सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
दो माह से छुट्टी पर, फिर भी देखती रहीं प्रोवोस्ट का कार्य
कैलाश हॉस्टल की प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा ने पिछले दो महीने से विश्वविद्यालय से छुट्टी ले रखी है। उन्होंने अपनी बेटी के बोर्ड एग्जाम की वजह से चाइल्ड केयर लीव ली थी। इसको लेकर भी विश्वविद्यालय में खूब चर्चा चलती रही।
प्रो. शीला मिश्रा का विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब वे दो महीने से विवि से छुट्टी पर हैं तो प्रोवोस्ट का काम कैसे रख सकती हैं।
प्रो. शीला मिश्रा पर हॉस्टल की छात्राओं ने भ्रष्टाचार और अश्लील टिप्पणी करने की शिकायत दर्ज कराई थी।
समाजवादी छात्र सभा और आइसा ने इसके बाद प्रोवोस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रोवोस्ट के बेटे के हॉस्टल के भीतर लड़कियों के साथ होली खेलते हुए वीडियो आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
अपने भाई को बुलाकर धमकाना शुरू कर दिया
कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कैलाश हॉस्टल की प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा को जांच पूरी होने तक उनको पद से हटाकर उनके स्थान पर प्रो. मनुका खन्ना को यह जिम्मेदारी दी थी।
जांच के दौरान प्रो. शीला मिश्रा के हॉस्टल जाने पर भी रोक लगाई गई थी। रविवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया। इसके बावजूद प्रो. शीला मिश्रा ने बुधवार रात दस बजे तक हॉस्टल नहीं छोड़ा। उल्टे अपने भाई को बुलाकर उन्होंने छात्राओं को धमकाना शुरू कर दिया।
समाजवादी युवजन सभा के महासचिव दिग्विजय सिंह देव के अनुसार, छुट्टी के दौरान हॉस्टल प्रोवोस्ट का चार्ज किसी और को दिया जाना चाहिए था। अगर वे विवि से छुट्टी पर हैं तो फिर प्रोवोस्ट पद पर कैसे रह सकती हैं।
प्रॉक्टर, चीफ प्रोवोस्ट और डीएसडब्यू ने सौंपा इस्तीफा
लखनऊ विश्वविद्यालय के माहौल को लेकर बुधवार दोपहर प्रॉक्टर प्रो. निशि पांडेय, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. एसपी त्रिवेदी और डीएसडब्ल्यू प्रो. अनिल शुक्ला ने अपने-अपने इस्तीफे कुलपति को सौंप दिए।
हालांकि कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने उनके इस्तीफे मंजूर नहीं किए। कुलपति ने कहा कि स्थिति से निपटना जरूरी है इस्तीफा देना समाधान नहीं है।