{"_id":"0aa50cf9e12f446573234b572b750814","slug":"lucknow-university-changes-hindi-syllabus","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस यूनिवर्सिटी ने ‘झांसी की रानी’ को किया आउट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस यूनिवर्सिटी ने ‘झांसी की रानी’ को किया आउट
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 13 Sep 2013 12:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी के कोर्स में अब वृंदावन लाल वर्मा का उपन्यास ‘झांसी की रानी’ और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को नहीं पढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
‘झांसी की रानी’ के स्थान पर तुलसीराम का उपन्यास ‘मुर्दइया’ और विशेष रचनाकार के तौर पर मैथिलीशरण के गुप्त के बजाय मैत्रेयी पुष्पा का अध्ययन होगा।
विश्वविद्यालय यह बदलाव सत्र शुरू होने के दो महीने बाद करने जा रहा है।
बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में नए सिलेबस को मंजूरी मिल चुकी है। आगे की मंजूरी के लिए 21 सितंबर को प्रस्तावित फैकल्टी बोर्ड की बैठक में नए सिलेबस को रखा जाएगा।
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय का सत्र 16 जुलाई से शुरू हो चुका है। स्नातक और परास्नातक प्रथम वर्ष को छोड़कर बाकी की कक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। लेकिन सत्र शुरू होने के करीब दो महीने बाद सिलेबस बदलने का फैसला डिग्री कॉलेजों के गले नहीं उतर रहा है।
विज्ञापन
कॉलेजों को इस संबंध में कोई जानकारी भी नहीं है। कॉलेजों में पुराने सिलेबस के हिसाब से पढ़ाई शुरू हो चुकी है। पीजी लेवल पर कई कॉलेजों में आधे सेमेस्टर की पढ़ाई भी हो चुकी है।
एलयू में बीए द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में वृंदावन लाल वर्मा का उपन्यास झांसी की रानी पढ़ाया जाता था। लेकिन, अब कोर्स में तुलसीराम के उपन्यास मुर्दइया को शामिल करने की तैयारी है।
इसी तरह एमए के प्रथम सेमेस्टर में एक प्रश्न पत्र के तौर पर एक विशेष रचनाकार का अध्ययन किया जाता है। नए सिलेबस में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के स्थान पर मैत्रेयी पुष्पा का नाम प्रस्तावित है।
इसके अलावा स्नातक और परास्नातक स्तर पर कई बदलाव किए जा रहे हैं। सभी बदलावों को विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज ने पारित कर दिया है। 21 सितंबर को कला संकाय की फैकल्टी बोर्ड की बैठक होनी है।
नए सिलेबस को मंजूरी के लिए फैकल्टी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद एकेडमिक काउंसिल और कार्यपरिषद की मंजूरी ली जाएगी। पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक महीना लग जाएगा।
स्नातक में वार्षिक प्रणाली होने के चलते शायद परीक्षा होने में ज्यादा मुश्किल न आए पर सेमेस्टर प्रणाली पर चलने वाले पीजी पाठ्यक्रम में समस्या खड़ी हो सकती है।
दिसंबर के पहले सप्ताह से पीजी की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू भी हो जाती हैं। इस लिहाज से परीक्षा शुरू होने में केवल ढाई महीने बचे हैं। जानकारी के अभाव में कॉलेजों ने तो पीजी की पढ़ाई शुरू कर दी है, लेकिन एलयू ने अभी तक पूरा टाइम टेबल ही नहीं जारी किया है।
नियमानुसार सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन कक्षाएं चलना अनिवार्य है। ऐेसे में सत्र पिछड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है। दूसरी ओर सिलेबस बदलने की सूरत में कॉलेजों को नए सिरे से पढ़ाई करवानी पड़ेगी।
ज्यादातर को जानकारी भी नहीं
पाठ्यक्रम में समय के साथ बदलाव जरूरी है। इसी के तहत बदलाव किया जा रहा है। पूरा सिलेबस नहीं बदला जा रहा है इसलिए कोर्स पूरा करवाने में परेशानी नहीं होगी।
-प्रो. कालीचरण सनेही, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, एलयू
सिलेबस बदलने की जानकारी नहीं है, लेकिन ऐसा है तो यह ठीक नहीं है। कॉलेज में एमए तृतीय सेमेस्टर और बीए सेकंड ईयर और थर्ड ईयर की कक्षाएं 16 जुलाई से चल रही हैं।
-डॉ. नीरजा गुप्ता, प्राचार्य, नवयुग कन्या डिग्री कॉलेज
हिंदी का सिलेबस बदलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो कोर्स बदलने का यह उपयुक्त समय नहीं है। सिलेबस बदला जाना था तो जून के महीने में बदल जाना चाहिए था।
-डॉ. एस डी शर्मा, प्राचार्य, श्री जय नारायण पीजी कॉलेज