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लखनऊ विश्वविद्यालय: काशी विश्वनाथ मंदिर पर दिए बयान पर एसोसिएट प्रोफेसर की सफाई, बर्खास्तगी पर अड़े एबीवीपी के छात्र

Thu, 26 May 2022 01:56 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 26 May 2022 01:56 PM IST
सार

डॉ. रविकांत ने सफाई दी और कहा कि अगर इससे किसी को ठेस पहुंची तो माफी मांगते हैं, लेकिन छात्र बर्खास्तगी पर अड़े रहें। उधर, इस पर शिक्षकों ने भी नाराजगी जताई है।

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Lucknow University: Associate professor made controversial statement on Kashi Vishwanath temple, students protested
लविवि के डॉ. रविकांत (कुर्ते में) ने दी सफाई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने सोमवार को एक डिबेट में काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर विवादित बयान दिया। जिससे आक्रोशित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बीच डॉ. रविकांत ने इस पर अपनी सफाई देते हुए खेद जताया लेकिन छात्र उनको बर्खास्त करने पर अड़े रहे। देर शाम विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है।

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डॉ. रविकांत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ज्ञानवापी सर्वे पर आयोजित डिबेट में पट्टाभि सीतारमैया की किताब का हवाला देते हुए मंदिर को लेकर अपनी बात रखी साथ ही साधु-संतों को लेकर भी टिप्पणी की। इससे एबीवीपी कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। सुबह विश्वविद्यालय खुलने के साथ ही काफी संख्या में छात्र हिंदी विभाग के सामने पहुंच गए और डॉ. रविकांत के खिलाफ नारेबाती करते हुए प्रदर्शन करने लगे। यहां छात्रों का यह भी कहना था कि वह एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर रणनीति बना रहे थे। प्रदर्शन की सूचना पर एसीपी महानगर जया शांडिल्य यहां भारी पुलिस बल के साथ पहुंची।
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छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एक छात्र को पकड़ा लिया और उसे मारा भी। इस बीच डॉ. रविकांत प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचे तो काफी संख्या में छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रॉक्टर कार्यालय का घेराव किया। यहां उनकी प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, प्रॉक्टोरियल बोर्ड व पुलिस वालों से तीखी नोकझोंक हुई। विरोध बढ़ता देख प्रॉक्टर ऑफिस के सभी दरवाजे व चैनल बंद कर दिए गए। छात्र इसके बाद भी डटे रहे।
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शिक्षक ने दी सफाई, जताया खेद
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन व पुलिस के हस्तक्षेप के बीच डॉ. रविकांत छात्रों के बीच आए और इस पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि मैंने पट्टाभि सीतारमैया की किताब का हवाला देते हुए अपनी बात कही और यह भी कहा कि यह कहानी भी हो सकती है। इसमें फैक्ट कितना है किसी को नहीं पता। फिर भी आपकी भावना को किसी तरह ठेस पहुंची है तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। हालांकि छात्र इस पर भी नहीं माने और उनकी बर्खास्तगी पर अड़े रहे।

फेसबुक पोस्ट से फिर बढ़ा आक्रोश

लगभग तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद मामला शांत होने लगा। इसी बीच डॉ. रविकांत द्वारा एक अन्य पोस्ट शेयर करने से छात्र आक्रोशित हो उठे। इस पोस्ट में उन्होंने  विवि प्रशासन पर सवाल खड़ा करने के साथ ही लिंचिग की तैयारी होने का भी उल्लेख किया। हालांकि थोड़ी ही देर में उन्होंने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया और लिखा कि विवि प्रशासन के सहयोग और विद्यार्थियों से बातचीत से मामला सुलझ गया है लेकिन छात्रों ने उनकी पूर्व की पोस्ट का स्क्रीन शॉट ले लिया था। नाराज छात्रों ने परिसर के अंदर जाने वाले रास्ते पर ताला बंदकर सरस्वती प्रतिमा पर धरना शुरू कर दिया। शाम को प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी के कार्रवाई के आश्वासन पर छात्र माने।

विवि ने मांगा स्पष्टीकरण
लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि छात्रों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित शिक्षक से अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसका पत्र भेजा जा रहा है।

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