Lucknow: रहमानखेड़ा लौटकर आया बाघ, ट्रैप कैमरे में दिखा, बीते चार दिन से वन विभाग भी नहीं लगा पा रहा था पता
वन विभाग की टीम रविवार से लेकर सोमवार रात भर भैंस के बच्चे (पड़वा) को पिंजरे में बांधकर इंतजार करती रही, पर बाघ उसके पास नहीं आया। ये बाघ करीब 60 गांव के लोगों के लिए दहशत का कारण बना हुआ है।
विस्तार
रहमानखेड़ा जंगल में 74 दिनों से बाघ की दहशत कायम है। इससे 60 गांव के लोग दहशत में जीने को विवश है। एक बार फिर संस्थान में चार दिनों बाद बाघ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वन विभाग की टीम रविवार से लेकर सोमवार रात भर भैंस के बच्चे (पड़वा) को पिंजरे में बांधकर इंतजार करती रही, पर बाघ उसके पास नहीं आया। सोमवार को संस्थान पहुंचे कर्मचारियों ने बाघ को आम के बागों की ओर से जाते देखा। इससे कर्मचारियों में भी दहशत बन गयी और सभी घबरा गए। कर्मचारियों ने अफसरों को जानकारी दी। बाघ ट्रैप कैमरे में भी देखा गया। टीम ने जंगल में ट्रैकिंग की जोन एक और जोन दो में बाघ के ताजे पगचिह्न भी पाए गए हैं।
सोमवार सुबह केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के जोन एक बेल वाले ब्लॉक में टहल रहे बाघ को कर्मचारियों ने जंगल इलाके में जाते देखा। चार दिन पहले जोन दो व मीठेनगर खड़ंजा पर बाघ ने वनरोज का शिकार कर लगभग सिर को छोड़ कर पूरे हिस्से का मांस खाकर बंशीगढ़ी गांव के जंगल की ओर करीब 15 किमी दूर निकल गया था। चार दिन बाद बाघ ने संस्थान में अपनी वापसी की उपस्थिति सीसीटीवी और अंदर लगे ट्रैप कमरे में दर्ज कराई। एक ट्रैप कैमरे में बाघ के चहल-कदमी करते हुए चेहरे की तस्वीर भी कैद हुई है। बाघ के शिकार करने के लिए संस्थान में 6 भैस के बच्चे पड़वे को भी अलग- अलग जगहों पर बांधा गया है। वही 7 पिंजरे भी अलग -अलग हिस्सों में लगाये गए हैं।
अंदेशा था कि रात में बाघ आएगा और 15 फुट गहरे गड्ढे में या पिंजरे में फंस जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। अचानक जोन एक से बाहर निकल कर बाघ आया और चंद सेकंड में ही जोन दो के बाहर जंगल की ओर निकल गया। वन विभाग की टीमें और अफसर बस लाईव सीसीटीवी कैमरे में ताकते रह गए। एसडीओ चंदन चौधरी ने बताया जॉन दो के इलाके में बाघ होने की जानकारी पर कांबिंग कराई गई है। बाघ रेस्क्यू आपरेशन का निरीक्षण एवं समीक्षा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक रेनू सिंह ,डीएफओ सीतापुर नवीन खंडेलवाल एवं डीएफओ लखनऊ सितान्शु पांडेय ने किया गया व डॉक्टर्स एवं टीम को जरूरी दिशा-निर्देश दिये।
जोन दो के इलाके में लंगूर बता रहे थे बाघ की मौजूदगी
ग्रामीण वीरेंद्र और राजकुमार की माने तो बाघ की लोकेशन गजरिया फार्म के पास बैठे 70 से अधिक लंगूर बता रहे थे। बाघ की चहलकदमी अधिक होती है या मौजूदगी रहती है, वहां पक्षी और लंगूर चीखने-चिल्लाने लगते हैं। कुछ ऐसा ही नजर सोमवार शाम को रहा। टीम भी इन दोनों की लोकेशन का सहारा लेकर बाघ को रेस्क्यू करने का प्रयास कर रहा। बाघ को ट्रैकुलाइज करने का काम भी एक्सपर्ट कानपुर प्राणी उद्यान और दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट के डॉक्टर की टीम के साथ अलग अलग दिशा में काम कर रहे हैं।
युवा एकत्रित हो बना रहे रील
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया की बाघ को रेस्क्यू करने के लिए हर प्रयास किये जा रहे। वही सहिलामऊ, मीठेनगर, सिरगामऊ, कसमंडली कलां, किठाईपारा, फतेहनगर, शिवदासपुर ,बंशीगढ़ी, कसमडी खुर्द आदि गांवो में जन-जागरूकता अभियान चलाते हुए स्थानीय लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन रील बनाने में मदहोश युवा अपनी जान को जोखिम में डालकर थोड़ी सी सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए जान की भी बाजी लगाने को तैयार हैं।
सुबह से लेकर शाम तक बड़ी संख्या में युवा मीठेनगर गांव की तरफ जाने वाले खड़ंजे पर बाघ की सबसे अधिक चहल कदमी रहती है इस सड़क के आसपास दोनों और जंगल है जहां पर युवा खड़े होकर रील बनाते हैं। मना करने के बावजूद भी नहीं मान रहे। वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि लोग अपनी जान को जोखिम में ना डालें।