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लखनऊ : पावर एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम दर 12 रुपये यूनिट ही रहेगी, 17 रुपये तक बिजली बेचेने पर रिपोर्ट तलब
Sat, 07 May 2022 08:45 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 07 May 2022 08:45 PM IST
सार
सीईआरसी ने 1 अप्रैल से पूरे देश में पावर एक्सचेंज पर डे अहेड मार्केट (डीएएम) व रियल टाइम मार्केट (आरटीएम) के तहत 12 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा कीमत पर बिजली बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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झारखंड में बिजली संकट
- फोटो : ANI
विस्तार
पावर एक्सचेंज में महंगी बिजली बेचने की पेशबंदी में जुटी निजी उत्पादक कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने साफ कर दिया है कि पावर एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम दर 12 रुपये प्रति यूनिट ही रहेगी। इससे ज्यादा कीमत पर बिजली नहीं बेची जा सकेगी। कुछ उत्पादकों द्वारा पिछले दिनों एक्सचेंज में 13 से 17 रुपये यूनिट तक बिजली बेचे जाने की शिकायत पर रिपोर्ट तलब करते हुए सीईआरसी ने यह आदेश दिया है।
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दरअसल, सीईआरसी ने 1 अप्रैल से पूरे देश में पावर एक्सचेंज पर डे अहेड मार्केट (डीएएम) व रियल टाइम मार्केट (आरटीएम) के तहत 12 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा कीमत पर बिजली बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। एक्सचेंज में बेची जाने वाली बिजली की अधिकतम सीमा तय करने का मांग करने वाले राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कु मार वर्मा ने 27 अप्रैल को टर्म अहेड मार्केट (टीएएम) के तहत 13 से 17 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचे जाने का खुलासा किया था। उन्होंने इसकी शिकायत केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार, सीईआरसी के अध्यक्ष व राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से की थी। वर्मा ने निजी बिजली उत्पादकों पर सीईआरसी के कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस पर तत्काल रोक की मांग की थी। यही नहीं पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज ने भी भारत सरकार को पत्र भेजकर इस पर एतराज जताया था।
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ऊर्जा मंत्रालय ने 29 अप्रैल को पूरा मामला सीईआरसी को भेजा था। इस पर सीईआरसी की पूर्ण पीठ ने टीएएम के तहत 13 से 17 रुपये प्रति यूनिट में बिजली बेचने पर दो दिन में रिपोर्ट तलब करते हुए अब पूरे पावर एक्सचेंज पर बिजली बेचने की अधितकम सीमा 12 प्रति यूनिट तय कर दी है। यानी एक्सचेंज में डीएएम, आरटीएम व टीएएम के तहत 12 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा कीमत पर बिजली नहीं बेची जा सकेगी। यही नहीं सीईआरसी ने अपने आदेश में आयातित कोयला आधारित परियोजनाओं की उत्पादन लागत का विश्लेषण करते हुुए इसकी कीमत 7.30 से 8.82 रुपये प्रति यूनिट तक होने की बात कही है। ऐसे में आयातित कोयला आधारित परियोजनाओं की बिजली की कीमत 9 रुपये प्रति यूनिट तक आ रही है इसलिए इन उत्पादन गृहों के लिए भी बिजली बेचने की अधिकतम सीमा 12 रुपये प्रति यूनिट उचित है।
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इस मामले में शिकायतकर्ता अवधेश वर्मा का कहना है कि सीईआरसी ने निजी घरानों को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में आयातित कोयले से उत्पादित बिजली की लागत ज्यादा आने का तर्क देकर 12 रुपये की तय की गई सीलिंग हटवाने की पेशबंदी न करें। वर्मा का कहना है कि 12 रुपये कीमत भी बिजली की कि ल्लत से जूझ रहे यूपी जैसे राज्यों के लिए काफी ज्यादा है। इसे और कम किया जाना चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने केंद्र व सीईआरसी के फैसले का स्वागत करते हुए एक्सचेंज में बिजली बेचने की अधिकतम सीलिंग 6 रुपये करने के लिए संघर्ष जारी रखने का एलान किया है।