दरिंदे को फांसीः तगड़ी पैरवी के चलते पहली बार लखनऊ पुलिस ने चार माह में दिलवाई इस केस में सजा
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सआदतगंज के वजीरबाग में छह साल की मासूम बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म के बाद दरिंदे बबलू उर्फ अरफात ने उसकी नृशंस हत्या कर दी। मासूम का शव पुलिस ने आरोपी के घर से बरामद किया। इसके बाद दरिंदे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए छह दिन में ही चार्जशीट दाखिल कर दी। यही नहीं, 27 दिन के अंदर ही दरिंदे के खिलाफ रासुका लगाया था।
शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम/अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद मिश्रा की कोर्ट ने बबलू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राजधानी में अब तक के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि पुलिस की तगड़ी पैरवी के चलते चार महीने में मासूम को न्याय मिला है।
एडीसीपी पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, 15 सितंबर 2019 को बबलू उर्फ अरफात ने सआदतगंज के वजीरबाग मोहल्ले में छह साल की मासूम को टॉफी दिलाने के बहाने अगवा किया। इसके बाद ठाकुरगंज के गढ़ी पीर खां स्थित अपने घर ले जाकर दुष्कर्म किया। पहले गला दबाया फिर धारदार हथियार से बच्ची की हत्या कर दी।
शव छिपाने के लिए बबलू ने बॉक्स बेड का इस्तेमाल किया। पुलिस ने दरिंदे को गिरफ्तार किया। लेकिन शव तलाशने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। पिता ने मासूम बेटी की उंगली बेड के बाहर देखी तो चीख पड़ा। पुलिस ने बॉक्स बेड से शव को बाहर निकाला। इससे पहले एक बार पुलिस उसके घर से खाली हाथ लौट आई थी। दरवाजे पर बैठी बुजुर्ग महिला ने किसी के होने से साफ इन्कार कर दिया था।
नाराज लोगों ने किया था प्रदर्शन
मासूम के साथ दुष्कर्म उसके बाद हत्या की वारदात से नाराज लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। करीब हजारों लोग वजीरबाग इलाके में सड़कों पर उतर आए थे। पुलिस ने लोगों को शांत कराया। इस दौरान कुछ लोगों ने बवाल कर दिया। ऐसे 15 लोगों को पुलिस ने चिह्नित कर मुकदमा भी दर्ज किया थ। एक आरोपी की गिरफ्तारी की गई थी।
दरिंदे को मामू कहती थी मासूम
पुलिस के मुताबिक, मासूम बच्ची दरिंदे बबलू उर्फ अरफात को मामू कहती थी। 26 साल के बबलू का घर मृतका के घर से करीब 400 मीटर दूर गढ़ी पीर खां मुहल्ले में टीबी अस्पताल के पास था। वहां वह किराए पर पत्नी, बहन व मां के साथ रहता था। बबलू और बच्ची के पिता कई साल से एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों एक साथ ठेला लगाते थे। बबलू लगभग रोज बच्ची के घर आता-जाता था। वह वारदात के तीन पहले से लगातार मासूम के घर आ रहा था।
पुलिस के मुताबिक, दरिंदा जब मासूम बच्ची को अपने साथ ले जा रहा था, उस वक्त बबलू की मां भी घर के बाहर ही बैठी थी। उन्होंने बबलू को बच्ची को साथ ले जाते हुए देखा था। बच्ची के गायब होने और उसकी खोजबीन शुरू होने पर उन्होंने ही बबलू के बारे में जानकारी दी थी।
पिता के साथ घूमकर गुमराह किया
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद दरिंदा शाम करीब साढ़े छह बजे बच्ची के पिता के साथ ही घूम रहा था। शाम करीब साढ़े छह बजे बच्ची को लापता देख उसकी मां व सगे मामा ने तलाश शुरू की। पता चला कि बच्ची बबलू के साथ कहीं गई थी तो मामा ने बबलू को फोन किया। इस पर शातिर ने बच्ची के बारे में जानकारी से इन्कार कर दिया था।
इसके बाद बच्ची के मामा ने उसके पिता को फोन कर उसके गायब होने की जानकारी दी। वह तुरंत घर पहुंचे और बेटी को ढूंढने में जुट गए। इस बीच बबलू इलाके में ही आराम से टहलता रहा।
माथे-आंख पर कई चोटें, गला भी दबाया
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। साथ ही उसके माथे और दायीं आंख की भौहों के पास चोट के निशान थे। गले में करीब 6.50 सेंटीमीटर गहरा घाव था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची को मौत के घाट उतारने से पहले दरिंदे ने उसका गला दबाया था। पुलिस ने आरोपी के घर से हत्या में इस्तेमाल चाकू, मौके पर मिला हथौड़ा और कपड़ों समेत कई सामान बरामद किया।
अलग वकील व कोर्ट मोहर्रिर किया नियुक्त
अपर पुलिस उप आयुक्त पश्चिमी विकास चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, मासूम बच्ची के दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम देने वाले दरिंदे के खिलाफ विवेचना की कार्रवाई के लिए विशेष तौर पर पैरवी की गई। जल्द सुनवाई के लिए इस केस के लिए ही अलग से कोर्ट मोहर्रिर की तैनाती की गई।
यहीं नहीं, सरकारी वकील के पास अधिक काम होने के कारण एक अतिरिक्त सरकारी वकील की नियुक्ति कराने के लिए शासन से सिफारिश की गई। जिसे मंजूर कर लिया गया। फोरेंसिक रिपोर्ट से लेकर वारदात से संबंधित साक्ष्य को हर हालत में जल्द से जल्द जुटाकर कोर्ट में पेश किया गया।
लखनऊ पुलिस की प्रभावी पैरवी से छह साल की मासूम बच्ची के रेप व हत्या के दोषी के खिलाफ न केवल छह दिन में चार्जशीट दाखिल की गई बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी कोर्ट में पेश किया। दरिंदे के खिलाफ एनएसए की भी कार्रवाई की गई। इस मामले मेें दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। यह अपने आप में पहला मामला होगा, जहां लखनऊ पुलिस की त्वरित कार्रवाई से दरिंदे को चार महीने में सजा मिली है। - सुजीत पांडेय, पुलिस कमिश्नर