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लखनऊ: अब पूर्व सैनिकों के जिम्मे बदहाल गोमती का कायाकल्प करने की जिम्मेदारी, सीएम ने स्वीकार किया प्रस्ताव

Fri, 06 Sep 2024 09:45 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 06 Sep 2024 09:45 AM IST
सार

Gomti river in Lucknow: लखनऊ आकर प्रदूषित हो जाने वाली गोमती नदी के रखरखाव का जिम्मा अब पूर्व सैनिक संभालेंगे। सांसद राजनाथ सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रादेशिक सेना (टीए) की एक अतिरिक्त कंपनी तैनात करने का निर्देश दिया है। 

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Lucknow: Now the responsibility of rejuvenating the dilapidated Gomti lies with the ex-servicemen, CM accepted
लखनऊ की गोमती नदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने लखनऊ में चल रही नमामि गंगे परियोजना के तहत गोमती नदी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रादेशिक सेना (टीए) की एक अतिरिक्त कंपनी तैनात करने का निर्देश दिया है। इसमें पूर्व सैनिकों को तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह प्रस्ताव रक्षामंत्री के सामने रखा था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

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इस परियोजना का संचालन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत जल शक्ति मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का कायाकल्प करना है। दरअसल, 2016 में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए पूर्व सैनिकों को नियुक्त करके बेहतर परिणाम देने का निर्णय लिया था। 
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इसके बाद मई 2019 में पूर्व सैनिकों के मॉडल पर आधारित पहला समग्र पारिस्थितिकी कार्य बल 137 सीईटीएफ का गठन किया गया। इसका मुख्यालय प्रयागराज में है। हालांकि कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में एक-एक कंपनी तैनात है। बटालियन ने बहुत कम समय में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से सुधारात्मक कार्रवाई के लिए नालों की मैपिंग के साथ-साथ प्रदूषण निगरानी और आंकलन में योगदान दिया है। भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने बताया कि कंपनी एक जनवरी 2025 से या फिर उससे पहले काम शुरू कर देगी।
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 राष्ट्र निर्माण में यह कंपनी अपना योगदान देगी। कंपनी की स्थापना का उद्देश्य गोमती नदी के कायाकल्प के अलावा जैव विविधता का संरक्षण और स्थानीय जल निकायों का पुनरुत्थान है। इससे क्षेत्र में भूतपूर्व सैनिक समुदाय की पुनर्वास आकांक्षाओं को भी पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा राज्य के भीतर स्थानीय रोजगार के अवसरों का लाभ मिलेगा।

समय के साथ बढ़ती गई गोमती की बदहाली
गोमती के सुंदरीकरण के लिए खूब पहल हुईं। नई-नई कार्ययोजना तैयार की गई, लेकिन समय के साथ इसकी बदहाली बढ़ती गई। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2022 में पीलीभीत से वाराणसी तक गोमती के दोनों किनारों से 100 मीटर तक अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होने से गोमती में गंदगी की भरमार है। सिंचाई विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया था कि नदी अपने उद्गम स्थल माधो टांडा के समीप स्थित फुलहार झील, पीलीभीत से निकलकर शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर से होकर गाजीपुर, वाराणसी सीमा के निकट सैदपुर कैथी में गंगा में मिलती है। गोमती के दोनों किनारों से 100 मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण, अतिक्रमण, व्यवसायिक गतिविधि, पट्टे नीलामी, प्रदूषण करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए इस क्षेत्र को फ्लड प्लेन जोन तय किया था।


नदी में गिर रहा नाले का पानी
गोमती बैराज के पास नाले का गंदा पानी नदी में गिर रहा है। यही नहीं, डालीगंज पुल के पास झुग्गी-झोपड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है। पक्का पुल के पास नदी के किनारे मछली मंडी सजाई जाती है। इस ओर अधिकारियों के ध्यान न देने से अवैध कब्जा बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य में स्थायी अतिक्रमण का रूप ले सकता है। गोमती की सफाई के लिए कई बार अभियान चलाया गया, पर हालात जस के तस हैं।

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