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Lucknow News : हर महीने समीक्षा का नियम, फिर भी महाठग को मिलता रहा गनर
Tue, 07 Nov 2023 09:42 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 07 Nov 2023 09:42 PM IST
सार
इसमें प्रत्येक माह डीएम और एसपी द्वारा महानुभावों को सुरक्षा देने की समीक्षा करने का नियम भी शामिल था। यह भी साफ किया गया था कि आपराधिक कृत्यों में लिप्त किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा नहीं दी जाएगी।
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महाठग अनूप चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अयोध्या से गिरफ्तार महाठग अनूप कुमार चौधरी को सुरक्षा मुहैया कराने में गाजियाबाद के अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर दिया था। उसे तीन साल तक सुरक्षा दी जाती रही, जबकि दस वर्ष पूर्व ही इस बारे में शासन ने सख्त नियम बना दिए थे। इसमें प्रत्येक माह डीएम और एसपी द्वारा महानुभावों को सुरक्षा देने की समीक्षा करने का नियम भी शामिल था। यह भी साफ किया गया था कि आपराधिक कृत्यों में लिप्त किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा नहीं दी जाएगी।
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अनूप चौधरी को जिस तरह गाजियाबाद में तीन साल से और वाराणसी में एक साल के भीतर सात बार सुरक्षा मुहैया करायी गयी, उसने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। बता दें कि सुरक्षा देने में तमाम अनियमितताएं सामने आने पर वर्ष 2014 में तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता ने पुराने शासनादेशों को समाप्त करते हुए नया आदेश जारी किया था।
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इसमें सुरक्षा देने की त्रिस्तरीय समीक्षा की व्यवस्था की गयी थी, जिसमें जिला स्तर के बाद मंडलायुक्त और शासन को शामिल किया गया था। यह भी तय हुआ था कि किसी भी महानुभाव को एके-47 और एमपी-5 गन व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं लगायी जाएगी।
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पीएसी के किसी भी प्रशिक्षित कर्मी को भी सुरक्षा के काम में नहीं लगाया जाएगा। यह भी तय हुआ था कि किसी व्यक्ति को सुरक्षा देने का औचित्य पाए जाने पर आवश्यतानुसार निजी व्यय पर सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सुरक्षा के लिए आवेदन करने पर आवेदक के जीवन भय का सही आंकलन कर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित जिल सुरक्षा समिति द्वारा इस बाबत निर्णय लिया जाएगा।
इस समिति में डीएम के अलावा एसएसपी/एसपी एवं स्थानीय अभिसूचना इकाई के प्रभारी को सदस्य बनाया गया था। जीवनभय पर आधारित सुरक्षा का औचित्य पाए जाने पर आवेदक को एक माह के लिए सुरक्षा देने और उसे केवल तीन माह तक बढ़ाने का नियम भी बनाया गया था।