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Lucknow News : 25 करोड़ का मुआवजा दिलाने की ‘मृतक’ की याचिका खारिज
Fri, 03 Mar 2023 04:05 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 03 Mar 2023 04:05 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के मामले में सच तक पहुंचने में काफी वक्त बर्बाद हुआ है। याची का कहना था कि उसे राज्य सरकार ने मृतक घोषित किया है जबकि सरकार ने कभी उसे मृतक घोषित नहीं किया था।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजस्व रिकॉर्ड में 18 साल तक मृतक रहे लाल बिहारी ‘मृतक’ की 25 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलवाने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने लाल बिहारी पर 10 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने दिया।
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कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के मामले में सच तक पहुंचने में काफी वक्त बर्बाद हुआ है। याची का कहना था कि उसे राज्य सरकार ने मृतक घोषित किया है जबकि सरकार ने कभी उसे मृतक घोषित नहीं किया था। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि इस मामले को सबसे पहले विधानसभा में एक विधायक ने उठाकर चर्चित बनाया था। इसके बाद एक पत्रिका ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जोकि एक अनुचित सहयोग था।
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कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में मृतक घोषित कर दिए जाने के कारण उसे अपने अधिकार पाने की लड़ाई में इतना व्यस्त होना पड़ा कि वह बनारसी सिल्क साड़ी से जुड़े अपने कारोबार पर भी ध्यान नहीं दे पाया। न्यायालय ने परीक्षण में इस दावे को गलत पाया। दरअसल याची वर्ष 1972 से अपने गांव में रहते हुए सभी अधिकारों का प्रयोग कर रहा है। उसने भू संपत्ति की खरीद की है।
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इतना ही नहीं उसका एक बेटा गैस एजेंसी भी चलाता है। याची के रिश्तेदारों ने उसकी गैरमौजूदगी का लाभ उठाते हुए राजस्व रिकॉर्ड से उसका नाम हटवाकर अपना दर्ज करवाया। कोर्ट ने कहा कि याची को कभी भूत कहकर संबोधित करने का प्रामाणिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसलिए 25 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने की याचिका को खारिज करते हुए याची पर 10 हजार का हर्जाना लगाया जाता है।