Lucknow News : निलंबित एलडीए कर्मचारी के कोड से किया गया था रजिस्ट्री का फर्जीवाड़ा, हाईकोर्ट का वकील भी नामजद
विराजखंड 2/81 का फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। इसके बाद गलत तरीके से रजिस्ट्री की गई। इस मामले में निलंबित एलडीए कनिष्ठ लिपिक अजय प्रताप वर्मा के कोड का प्रयोग किया गया।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण के भूखंडों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री का खेल बड़े गिरोह ने किया है। इस गिरोह में कर्मचारी व अधिकारियों के अलावा प्रॉपर्टी डीलर व दलाल शामिल हैं। वहीं एक मामले में हाईकोर्ट लखनऊ का वकील भी शामिल है। एलडीए के उप सचिव माधवेश कुमार की तहरीर पर चार मुकदमें गोमतीनगर थाने में दर्ज किये गये हैं। इसमें निलंबित कर्मचारी के कोड का प्रयोग करने का मामला सामने आया है। इस मामले में दो कर्मचारी, एक वकील सहित कुल 18 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक एलडीए के उप सचिव माधवेश कुमार ने तहरीर दी। जिसमें आरोप लगाया कि विराजखंड 2/81 का फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया। इसके बाद गलत तरीके से रजिस्ट्री की गई। इस मामले में निलंबित एलडीए कनिष्ठ लिपिक अजय प्रताप वर्मा के कोड का प्रयोग किया गया। भूखंड को आदर्शपुरम त्रिवेणीनगर निवासी शिवानी रस्तोगी ने खुद को मालिक बताकर ठाकुरगंज के सरायमाली खां की वैष्णवी सोनी को रजिस्ट्री कर दी। दावा किया गया कि जमीन 2 मई 2000 को शिवानी को एलडीए ने बेचा था।
इस भूखंड को 19 साल बाद शिवानी ने वैष्णवी को बेची। इस फर्जी वाड़े के क्रय-विक्रय में बतौर गवाह बरेली के नगलाजसी निकसुआ के भानू प्रताप शर्मा व नेहरू इंक्लेव गोमतीनगर के अभिनव सिंह शामिल हुए थे। इसी तरह निलंबित कर्मचार अजय प्रताप वर्मा के कोड का प्रयोग कर दो अन्य भूखंड की रजिस्ट्री की गई। इसमें वास्तुखंड 3/521 की जमीन को इसी खंड की रहने वाली विमला तिवारी ने 15 मई 2019 को निधि पांडेय को बेच दी।फर्जी दस्तावेज में दावा किया गया कि यह जमीन विमला तिवारी को मई 2000 में एलडीए ने रजिस्ट्री की थी। इस मामले में गवाही देने वालों में वास्तुखंड निवासी अमित कुमार व विनय खंड के आशीष सक्सेना शामिल है। इसके अलावा निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप वर्मा के कोड से वास्तुखंड 3/564 का फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किया गया। फिर इसकी रजिस्ट्री कर दी गई। इस भूखंड को बाराबंकी के दरियाबाद निवासी रईसा खातून ने बाराबंकी रामसनेही घाट सादुल्लापुर निवासी सत्यदेव को अपना बताते हुए 2020 में रजिस्ट्री कर दी। दस्तावेजों में हेराफेरी कर दावा किया कि भूखंड को एलडीए ने उनको रजिस्ट्री की थी। इस मामले में हाईकोर्ट के वकील मनोज कुमार और बाराबंकी सादुल्लापुर रामसनेही घाट निवासी उमाशंकर ने की थी।
इसके अलावा विकल्प खंड के भूखंड संख्या 2/387-ए की भी फर्जी रजिस्ट्री की गई थी। इस जमीन को 19 अक्तूबर 2019 को भिलावां के रहने वाले राजकिशोर राजवंशी ने अंबेडकरनगर अकबरपुर के शास्त्रीनगर गदावां निवासी आशीष चौरसिया को बेची। जाली दस्तावेज तैयार किया गया। जिसमें दावा किया गया कि यह जमीन एलडीए ने उनको 14 जून 2000 को रजिस्ट्री की थी। इस मामले में गवाही विवेक खंड के इंद्रजीत कुमार व बाराबंकी के छोटी छेरियां के शिव कुमार ने दी थी। इस जमीन के फर्जीवाड़े में कनिष्ठ लिपिक आलोक नाथ के कोड का प्रयोग किया गया था।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक उप सचिव माधवेश कुमार की तहरीर पर निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप वर्मा, आलोक नाथ, रईसा खातून, सत्यदेव, उमाशंकर, मनोज कुमार, विमला तिवारी, निधि पांडेय, अमित कुमार, आशीष सक्सेना, रामकिशोर राजवंशी, आशीष चौरसिया, इंद्रजीत कुमार, शिव कुमार, शिवानी रस्तोगी, वैष्णवी सोनी, भानू प्रताप शर्मा और अभिनव सिंह के खिलाफ जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने व साजिश रचने का केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।