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Budget 2023 : मायावती ने कहा, बजट में कुछ नया नहीं है, बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर
Wed, 01 Feb 2023 05:03 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 01 Feb 2023 05:03 PM IST
सार
यह बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं है । पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नई वादों की झड़ी लगा देती है। जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसा पहले था ।
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बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि बजट में कुछ नया नहीं है । पिछले 9 वर्षों से भी केंद्र सरकार के बजट इसी तरह से आते जाते रहे हैं । इसमें घोषणाओं वादों दावों में उम्मीदों की बरसात होती रही।
उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि वास्तव में यह घोषणाएं सब बेमानी हो गए जब भारत का मिडिल क्लास महंगाई गरीबी व बेरोजगारी आदि की मार के कारण लोअर मिडिल क्लास बन गया। यह बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं है । पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नई वादों की झड़ी लगा देती है। जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसा पहले था। वे उम्मीदों के सहारे जीते हैं लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों।
मायावती ने कहा कि सरकार की नीतियों में गलत सोच का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव उन करोड़ों गरीबों, किसानों, मेहनतकश लोगों के जीवन पर पड़ता है जो ग्रामीण भारत से जुड़े हैं। सरकार उनके आत्मसम्मान में आत्मनिर्भरता पर ध्यान दें ताकि आमजन की जेब भरे । केंद्र जब भी लाभार्थियों के आंकड़ों की बात करें उसे जरूर याद रखना चाहिए कि भारत एक लगभग 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, किसानों का देश है । ये अपने अमृत काल को तरस रहे हैं।
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उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि वास्तव में यह घोषणाएं सब बेमानी हो गए जब भारत का मिडिल क्लास महंगाई गरीबी व बेरोजगारी आदि की मार के कारण लोअर मिडिल क्लास बन गया। यह बजट भी कोई ज्यादा अलग नहीं है । पिछले साल की कमियां कोई सरकार नहीं बताती और नई वादों की झड़ी लगा देती है। जमीनी हकीकत में 100 करोड़ से अधिक जनता का जीवन वैसे ही दांव पर लगा रहता है जैसा पहले था। वे उम्मीदों के सहारे जीते हैं लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों।
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मायावती ने कहा कि सरकार की नीतियों में गलत सोच का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव उन करोड़ों गरीबों, किसानों, मेहनतकश लोगों के जीवन पर पड़ता है जो ग्रामीण भारत से जुड़े हैं। सरकार उनके आत्मसम्मान में आत्मनिर्भरता पर ध्यान दें ताकि आमजन की जेब भरे । केंद्र जब भी लाभार्थियों के आंकड़ों की बात करें उसे जरूर याद रखना चाहिए कि भारत एक लगभग 130 करोड़ गरीबों, मजदूरों, किसानों का देश है । ये अपने अमृत काल को तरस रहे हैं।
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