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Lucknow News: बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर कर रहे जांच
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बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर कर रहे जांच
करीब पांच माह पहले बिड के बाद हुई थी तैनाती, टुडियागंज अस्पताल का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। एनएचएम की बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर पिछले पांच माह
से जांच कर रहे हैं। एनएचएम से हर माह लाखों रुपये का वेतन भी उनके खाते
में पहुंच रहा है। मरीज जांच के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अफसरों ने
रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे केंद्र से संबंद्व तक नहीं किया। नतीजा जांच भी बंद
और हर माह मुफ्त का वेतन रेडियोलॉजिस्ट उठा रहे हैं।
एनएचएम की बिड में इस साल पांच रेडियोलॉजिस्ट मिले थे। इसमें चार सेवाएं
देने को राजी हुए थे। इसमें एक रेडियोलॉजिस्ट को लोकबंधु अस्पताल में तैनात
किया गया था। जबकि तीन सीएमओ के अधीन सीएचसी पर तैनात किए गए थे। इसमें
टुडियागंज सीएचसी पर डॉ. एसके वत्स की तैनाती हुई थी। सीएचसी पर करीब साल
भर से मशीन खराब पड़ी है। इसके बाद भी अफसरों ने यहां पर तैनाती कर दी।
रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर मरीजों की जांच करके हर माह तीन लाख रुपये का
वेतन एनएचएम से उठा रहे हैं। अफसरों ने लापरवाही में उन्हें दूसरे केंद्र
से संबंद्व तक नहीं किया। नतीजा जांच भी बंद और हर माह वेतन भी निकल रहा।
वहीं सीएचसी पर आने वाली गर्भवती को जांच के लिए निजी केंद्र का रास्ता
दिखाया जा रहा है। एनएचएम की योजना पर अफसरों ने पानी फेर दिया। सीएमओ डॉ.
एनबी सिंह का कहना है रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे केंद्र से संबंद्व किया जाएगा
ताकि उनकी सेवाएं ली जा सके।
मशीन लगी मगर जांच के लिए विशेषज्ञ नहीं
मलिहाबाद, माल, सरोजनीनगर सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है। जांच के
लिए इन तीनों सीएचसी पर विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में तीनों सीएचसी पर गर्भवती
व सामान्य मरीज मिलाकर करीब 150 मरीज हर दिन सीएचसी से वापस लौट रहे हैं।
सोनोलॉजिस्ट को बनाया सीएचसी प्रभारी
इंदिरा नगर सीएचसी प्रभारी डॉ. मयंक जलोटे को सीएचसी का प्रभारी बना दिया
गया है। ऐसे में उनके जरिये जांच का कार्य नहीं किया जा रहा है। वहां पर
बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट को तैनात किया गया है।
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करीब पांच माह पहले बिड के बाद हुई थी तैनाती, टुडियागंज अस्पताल का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। एनएचएम की बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर पिछले पांच माह
से जांच कर रहे हैं। एनएचएम से हर माह लाखों रुपये का वेतन भी उनके खाते
में पहुंच रहा है। मरीज जांच के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अफसरों ने
रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे केंद्र से संबंद्व तक नहीं किया। नतीजा जांच भी बंद
और हर माह मुफ्त का वेतन रेडियोलॉजिस्ट उठा रहे हैं।
एनएचएम की बिड में इस साल पांच रेडियोलॉजिस्ट मिले थे। इसमें चार सेवाएं
देने को राजी हुए थे। इसमें एक रेडियोलॉजिस्ट को लोकबंधु अस्पताल में तैनात
किया गया था। जबकि तीन सीएमओ के अधीन सीएचसी पर तैनात किए गए थे। इसमें
टुडियागंज सीएचसी पर डॉ. एसके वत्स की तैनाती हुई थी। सीएचसी पर करीब साल
भर से मशीन खराब पड़ी है। इसके बाद भी अफसरों ने यहां पर तैनाती कर दी।
रेडियोलॉजिस्ट खराब मशीन पर मरीजों की जांच करके हर माह तीन लाख रुपये का
वेतन एनएचएम से उठा रहे हैं। अफसरों ने लापरवाही में उन्हें दूसरे केंद्र
से संबंद्व तक नहीं किया। नतीजा जांच भी बंद और हर माह वेतन भी निकल रहा।
वहीं सीएचसी पर आने वाली गर्भवती को जांच के लिए निजी केंद्र का रास्ता
दिखाया जा रहा है। एनएचएम की योजना पर अफसरों ने पानी फेर दिया। सीएमओ डॉ.
एनबी सिंह का कहना है रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे केंद्र से संबंद्व किया जाएगा
ताकि उनकी सेवाएं ली जा सके।
मशीन लगी मगर जांच के लिए विशेषज्ञ नहीं
मलिहाबाद, माल, सरोजनीनगर सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है। जांच के
लिए इन तीनों सीएचसी पर विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में तीनों सीएचसी पर गर्भवती
व सामान्य मरीज मिलाकर करीब 150 मरीज हर दिन सीएचसी से वापस लौट रहे हैं।
सोनोलॉजिस्ट को बनाया सीएचसी प्रभारी
इंदिरा नगर सीएचसी प्रभारी डॉ. मयंक जलोटे को सीएचसी का प्रभारी बना दिया
गया है। ऐसे में उनके जरिये जांच का कार्य नहीं किया जा रहा है। वहां पर
बिड में मिले रेडियोलॉजिस्ट को तैनात किया गया है।