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Lucknow News: 30 से 75 हजार वेतन पर रखे जाएंगे 58 इंजीनियर-विशेषज्ञ, पीएमयू संभालेंगी नगर निगम के विकास कार्यों की कमान
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प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। नगर निगम में कचरा प्रबंधन, मार्ग प्रकाश, नगर नियोजन और पर्यावरण जैसे अहम कार्यों के लिए 58 इंजीनियर-विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। ये इंजीनियर-विशेषज्ञ इन कार्यों के लिए खासतौर पर बनाई जा रही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) में रखे जाएंगे। टीम लीडर सहित अलग-अलग ट्रेड के लिए 30 से 75 हजार रुपये वेतन दिए जाएंगे।
शहर में सफाई, मार्ग प्रकाश, निर्माण कार्य सहित जनता से जुड़े कार्यों के लिए नगर निगम में 1960 में उस समय की आबादी को देखते हुए पद स्वीकृत हुए थे। पर, इस समय उसके आधे भी कर्मचारी नहीं हैं, जबकि आबादी करीब चार गुना बढ़ गई है। ऐसे में कर्मचारियों और इंजीनियरों की कमी से शहर के विकास से जुड़े कामों पर भी असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए पीएमयू के रूप में वैकल्पिक रास्ता निकाला गया है।
एक साल के लिए होगा चयन
चयन क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र करेगा। इसके लिए नगर निगम की ओर से पत्र भी भेज दिया गया है। केंद्र एक महीने के अंदर यह प्रक्रिया पूरी कर नगर निगम को पीएमयू सौंप देगा। जिनकी नियुक्ति होगी उनको 30 से 75 हजार रुपये तक वेतन पद के अनुसार दिया जाएगा। बहरहाल चयन एक साल के लिए किया जाएगा। काम के आधार पर आगे विस्तार दिया जाएगा।
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पीएमयू से ये फायदे होंगे
नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा का कहना है कि इंजीनियरों की कमी के कारण एस्टीमेट बनाने, सर्वे करने, ड्राइंग बनाने सहित अन्य जरूरी काम प्रभावित होते हैं। टाउन प्लानर नहीं होने से अभी ड्राइंग बाहर से बनवानी पड़ती है, जिस पर पैसा खर्च होता है। स्टाफ की कमी के कारण ही काम की निगरानी पूरी तरह से नहीं हो पाती है। पीएमयू रहेगी तो काम की निगरानी और उसे समय से पूरा कराना भी उसकी जिम्मेदारी होगी।
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पद और नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यता
इनके एक पद
टीम लीडर : सिविल इंजीनियरिंग में एमटेक और पांच साल का अनुभव।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर : स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक और तीन साल का अनुभव।
मैनेजर (सिविल) : सिविल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक, तीन साल का अनुभव चाहिए।
अरबन प्लानर : आर्किटेक्ट में बीटेक या समान योग्यता व तीन साल का अनुभव।
साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट : एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग मेंं एमटेक व तीन साल का अनुभव।
प्रोक्योरमेंट एक्सपर्ट : एमबीए या अर्थशास्त्र में एमए व तीन साल का अनुभव
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इनके दो पद
एन्वायर्नमेंट इंजीनियर : एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग में बीटेक या एम टेक व तीन साल का अनुभव।
मैनेजर (इलेक्ट्रिकल): -इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक व तीन साल का अनुभव।
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असिस्टेंट मैनेजर सिविल के सबसे ज्यादा 40 पद
असिस्टेंट मैनेजर (सिविल) : बीई या बीटेक या सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और तीन साल का अनुभव।
असिस्टेंट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) : इसके आठ पद हैं। इसके लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक या डिप्लोमा, तीन साल का अनुभव चाहिए।
ये काम करने होंगे
चल रहे कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और समय से काम को पूरा कराना। शासन को भेजे जाने वाले प्रस्तावों के लिए सर्वे, डिजाइन, ड्राइंग, एस्टीमेट तैयार करना, डीपीआर तैयार करना, सोशल एंड एन्वायर्नमेंटल स्टडी, प्रोजेक्ट को लेकर संबंधित विभागों से अनापत्ति के लिए समन्वय, आरपीएफ व टेंडर डाॅक्यूमेंट तैयार करना, टेंडर की तकनीकी व वित्तीय बिड का परीक्षण, अर्बन प्लानिंग मेंं सुव्यवस्थित विकास के लिए सुझाव व सेवाएं, समीक्षा बैठकों में शामिल होना और उनकी रिपोर्ट तैयार करना।
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जलकल विभाग में चार रिटायर्ड पंप स्टेशन अधीक्षक की होगी नियुक्ति
जलकल विभाग में 19 जेई और 9 पंप स्टेशन अधीक्षक (पीएसएस) की कमी है। इसको देखते हुए नगर निगम कार्यकारिणी ने जलकल विभाग में चार सेवानिवृत्त पीएसएस को निश्चित वेतनमान पर रखने की मंजूरी दी है। इसमें अमरदेव वर्मा, विजय कुमार त्रिपाठी, सफदर अली और रवि कुमार मिश्रा शामिल हैं। जलकल विभाग के सचिव राम कैलाश ने बताया कि इनके अंतिम वेतनमान में पेंशन निकालकर जो पैसा बचेगा उतना वेतन दिया जाएगा।
पीएमयू के लिए सदन से मिल चुकी है मंजूरी
पीएमयू के गठन को लेकर नगर निगम कार्यकारिणी और सदन से मंजूरी मिल चुकी है। नियुक्ति को लेकर आदेश भी अपर निदेशक नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र को भेज दिया गया है।
महेश वर्मा, मुख्य अभियंता नगर निगम
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लखनऊ। नगर निगम में कचरा प्रबंधन, मार्ग प्रकाश, नगर नियोजन और पर्यावरण जैसे अहम कार्यों के लिए 58 इंजीनियर-विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। ये इंजीनियर-विशेषज्ञ इन कार्यों के लिए खासतौर पर बनाई जा रही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) में रखे जाएंगे। टीम लीडर सहित अलग-अलग ट्रेड के लिए 30 से 75 हजार रुपये वेतन दिए जाएंगे।
शहर में सफाई, मार्ग प्रकाश, निर्माण कार्य सहित जनता से जुड़े कार्यों के लिए नगर निगम में 1960 में उस समय की आबादी को देखते हुए पद स्वीकृत हुए थे। पर, इस समय उसके आधे भी कर्मचारी नहीं हैं, जबकि आबादी करीब चार गुना बढ़ गई है। ऐसे में कर्मचारियों और इंजीनियरों की कमी से शहर के विकास से जुड़े कामों पर भी असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए पीएमयू के रूप में वैकल्पिक रास्ता निकाला गया है।
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एक साल के लिए होगा चयन
चयन क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र करेगा। इसके लिए नगर निगम की ओर से पत्र भी भेज दिया गया है। केंद्र एक महीने के अंदर यह प्रक्रिया पूरी कर नगर निगम को पीएमयू सौंप देगा। जिनकी नियुक्ति होगी उनको 30 से 75 हजार रुपये तक वेतन पद के अनुसार दिया जाएगा। बहरहाल चयन एक साल के लिए किया जाएगा। काम के आधार पर आगे विस्तार दिया जाएगा।
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पीएमयू से ये फायदे होंगे
नगर निगम के मुख्य अभियंता महेश वर्मा का कहना है कि इंजीनियरों की कमी के कारण एस्टीमेट बनाने, सर्वे करने, ड्राइंग बनाने सहित अन्य जरूरी काम प्रभावित होते हैं। टाउन प्लानर नहीं होने से अभी ड्राइंग बाहर से बनवानी पड़ती है, जिस पर पैसा खर्च होता है। स्टाफ की कमी के कारण ही काम की निगरानी पूरी तरह से नहीं हो पाती है। पीएमयू रहेगी तो काम की निगरानी और उसे समय से पूरा कराना भी उसकी जिम्मेदारी होगी।
पद और नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यता
इनके एक पद
टीम लीडर : सिविल इंजीनियरिंग में एमटेक और पांच साल का अनुभव।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर : स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक और तीन साल का अनुभव।
मैनेजर (सिविल) : सिविल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक, तीन साल का अनुभव चाहिए।
अरबन प्लानर : आर्किटेक्ट में बीटेक या समान योग्यता व तीन साल का अनुभव।
साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट : एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग मेंं एमटेक व तीन साल का अनुभव।
प्रोक्योरमेंट एक्सपर्ट : एमबीए या अर्थशास्त्र में एमए व तीन साल का अनुभव
इनके दो पद
एन्वायर्नमेंट इंजीनियर : एन्वायर्नमेंट इंजीनियरिंग में बीटेक या एम टेक व तीन साल का अनुभव।
मैनेजर (इलेक्ट्रिकल): -इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक व तीन साल का अनुभव।
असिस्टेंट मैनेजर सिविल के सबसे ज्यादा 40 पद
असिस्टेंट मैनेजर (सिविल) : बीई या बीटेक या सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और तीन साल का अनुभव।
असिस्टेंट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) : इसके आठ पद हैं। इसके लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक या डिप्लोमा, तीन साल का अनुभव चाहिए।
ये काम करने होंगे
चल रहे कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और समय से काम को पूरा कराना। शासन को भेजे जाने वाले प्रस्तावों के लिए सर्वे, डिजाइन, ड्राइंग, एस्टीमेट तैयार करना, डीपीआर तैयार करना, सोशल एंड एन्वायर्नमेंटल स्टडी, प्रोजेक्ट को लेकर संबंधित विभागों से अनापत्ति के लिए समन्वय, आरपीएफ व टेंडर डाॅक्यूमेंट तैयार करना, टेंडर की तकनीकी व वित्तीय बिड का परीक्षण, अर्बन प्लानिंग मेंं सुव्यवस्थित विकास के लिए सुझाव व सेवाएं, समीक्षा बैठकों में शामिल होना और उनकी रिपोर्ट तैयार करना।
जलकल विभाग में चार रिटायर्ड पंप स्टेशन अधीक्षक की होगी नियुक्ति
जलकल विभाग में 19 जेई और 9 पंप स्टेशन अधीक्षक (पीएसएस) की कमी है। इसको देखते हुए नगर निगम कार्यकारिणी ने जलकल विभाग में चार सेवानिवृत्त पीएसएस को निश्चित वेतनमान पर रखने की मंजूरी दी है। इसमें अमरदेव वर्मा, विजय कुमार त्रिपाठी, सफदर अली और रवि कुमार मिश्रा शामिल हैं। जलकल विभाग के सचिव राम कैलाश ने बताया कि इनके अंतिम वेतनमान में पेंशन निकालकर जो पैसा बचेगा उतना वेतन दिया जाएगा।
पीएमयू के लिए सदन से मिल चुकी है मंजूरी
पीएमयू के गठन को लेकर नगर निगम कार्यकारिणी और सदन से मंजूरी मिल चुकी है। नियुक्ति को लेकर आदेश भी अपर निदेशक नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र को भेज दिया गया है।
महेश वर्मा, मुख्य अभियंता नगर निगम