{"_id":"634d641e6cd17236e365ea50","slug":"lucknow-news-hearing-in-the-case-of-deployment-of-government-lawyers-in-the-high-court-on-october-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News : हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की तैनाती मामले में सुनवाई 21 अक्तूबर को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News : हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की तैनाती मामले में सुनवाई 21 अक्तूबर को
Mon, 17 Oct 2022 07:48 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 17 Oct 2022 07:48 PM IST
सार
24 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति की क्या प्रक्रिया है? कोर्ट प्रमुख सचिव न्याय को इस केस में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
लखनऊ हाईकोर्ट
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में बीते अगस्त में राज्य सरकार की तरफ से पैरवी के लिए सरकारी वकीलों की तैनाती को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होगी। सोमवार को सुनवाई के वक्त सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि जवाबी हलफनामा लगभग तैयार है।
विज्ञापन
सरकारी वकील ने इसकी जांच करने को समय दिए जाने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को नियत की है। गत 24 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति की क्या प्रक्रिया है? कोर्ट प्रमुख सचिव न्याय को इस केस में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश लखनऊ के तीन वकीलों की याचिका पर दिया। इसमें सीएससी, एसीएससी, स्थायी अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर्स की नियुक्ति संबंधी गत एक अगस्त के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है।
विज्ञापन
अधिवक्ता रमा शंकर तिवारी, शशांक कुमार शुक्ला व अरविंद कुमार ने याचिका में पंजाब राज्य बनाम बृजेश्वर सिंह चहल के फैसले के अनुसार राज्य को सरकारी वकीलों के रूप में योग्य अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए राज्य को निर्देश देने की गुजारिश की है। साथ ही उच्च न्यायालय लखनऊ में मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं (सीएससी) के पदों की संख्या कम करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया है।
याचियों के वकील का कहना था कि हालिया 220 नए सरकारी वकीलों की सूची में कुछ अधिवक्ता राज्य के प्रमुख राजनेताओं के रिश्तेदार हैं। कुछ न्यायिक अधिकारियों के रिश्तेदार हैं। कुछ उच्च न्यायालय लखनऊ या उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अतिरिक्त महाधिवक्ता के कनिष्ठ या सहयोगी हैं। ऐसे में सरकारी वकीलों की तैनाती संबंधी दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से याचिका का विरोध किया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में सरकार से जवाब तलब करते हुए गत 1 अगस्त को जारी की गई सरकारी वकीलों की नियुक्ति के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया था। कोर्ट ने आगे किसी प्रकार की सूची जारी करने पर रोक लगाने की याचिकाकर्ताओं की मांग भी नामंजूर कर दी थी।