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Lucknow News : राज्यपाल ने वापस किया गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021, दोबारा पेश किया जाएगा
Thu, 30 Nov 2023 05:40 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 30 Nov 2023 05:40 AM IST
सार
बता दें कि प्रदेश में कमिश्नरेट की स्थापना के बाद राज्य सरकार ने उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 सदन में पेश किया था। दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा गया था, जिसे राजभवन द्वारा वापस कर दिया गया है।
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राज्यपाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वापस कर दिया है। बुधवार को विधानसभा में राज्यपाल के संदेश सहित पुनर्विचार के लिए यह विधेयक प्राप्त हुआ, जिसे सदन के पटल पर रखा गया। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार कुछ बदलावों के साथ नया विधेयक लेकर आएगी।
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बता दें कि प्रदेश में कमिश्नरेट की स्थापना के बाद राज्य सरकार ने उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 सदन में पेश किया था। दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा गया था, जिसे राजभवन द्वारा वापस कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पहली बार कमिश्नरेट का गठन होने पर गुण्डा एक्ट के तहत जिला बदर करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिया गया था।
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तत्पश्चात कुछ अन्य जिलों में भी कमिश्नरेट गठित हुआ, जिसके बाद कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इसमें संशोधन किया गया और गुण्डा एक्ट लगाने का अधिकार कमिश्नर के अधीनस्थ डीसीपी, एडीसीपी और जेसीपी को दे दिया गया। जबकि अपीलीय अधिकारी कमिश्नर को बना दिया गया।
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इस तरह कमिश्नर को गुण्डा एक्ट के तहत जिला बदर करने और अपीलीय अधिकारी होने की दोनों शक्तियां प्राप्त हो गयी, जो नियमों के मुताबिक उचित नहीं है। इसी वजह से राज्यपाल ने इस विधेयक को वापस कर दिया है। बता दें कि जिलों में गुण्डा एक्ट लगाने का अधिकार डीएम को होता है, जबकि अपील सुनने का अधिकार मंडलायुक्त के पास होता है।