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Lucknow News : गायत्री और पूर्व एमएलसी रमेश मिश्रा का कनेक्शन तलाश रही सीबीआई और ईडी
Wed, 28 Feb 2024 09:27 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 28 Feb 2024 09:27 PM IST
सार
सीबीआई और ईडी ने खनन घोटाले में नामजद आधा दर्जन से ज्यादा आईएएस अधिकारियों के बयान कई बार तलब कर दर्ज तो किए, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। कुछ अफसरों की संपत्तियों की जांच भी ईडी ने शुरू की थी, हालांकि बीते कई सालों से यह भी ठंडे बस्ते में है।
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विस्तार
हमीरपुर खनन घोटाले में 2 जनवरी 2019 को सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम ब्रांच-3 द्वारा दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आरोपी नहीं बनाया गया था। हालांकि इसमें तत्कालीन डीएम, खनन अधिकारियों, पूर्व सपा एमएलसी एवं लीज होल्डर रमेश मिश्रा और उनके भाई आदि नामजद किए गए थे। सीबीआई ने खनन निदेशालय से घोटाले से जुड़े सारे दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे। इन दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही अखिलेश यादव को पूछताछ के लिए नोटिस दिया गया है।
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बता दें कि सीबीआई ने खनन निदेशालय से 23 फाइलों को अपने कब्जे में लिया था। इन फाइलों में कई 'बड़ों' की भूमिका के प्रमाण मिलने की आशंका जताई जा रही थी। वहीं ईडी ने भी खनन निदेशक से इन दस्तावेजों की प्रतियां जांच के लिए मांगी थी। हालांकि ईडी को दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गये। इसकी वजह से जांच रफ्तार नहीं पकड़ सकी। बता दें कि ईडी खनन घोटाले में तत्कालीन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की 50 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त कर चुका है। ईडी पूर्व सपा एमएलसी रमेश मिश्रा की संपत्तियों का पता लगा रही है। अब तक की जांच में उनकी दिल्ली और कानपुर में कई बेशकीमती संपत्तियां होने का पता लगा है, जिनके दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
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आईएएस अधिकारियों के केवल बयान हुए दर्ज
बता दें कि सीबीआई और ईडी ने खनन घोटाले में नामजद आधा दर्जन से ज्यादा आईएएस अधिकारियों के बयान कई बार तलब कर दर्ज तो किए, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। कुछ अफसरों की संपत्तियों की जांच भी ईडी ने शुरू की थी, हालांकि बीते कई सालों से यह भी ठंडे बस्ते में है। अब अखिलेश यादव को नोटिस के बाद ईडी फिर से इस प्रकरण की फाइलों को पलटने की तैयारी में है।
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23 पट्टों की दी थी अनुमति
दरअसल वर्ष 2012 से 2016 के बीच सपा सरकार में अधिकारियों ने 23 खनन पट्टों के नवीनीकरण की अनुमति दी थी, जबकि इस पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पाबंदी लगा रखी थी। उस दौरान पहले अखिलेश यादव और फिर गायत्री प्रजापति खनन मंत्री थे। हाईकोर्ट ने एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान अवैध तरीके से खनन पट्टे देने की सीबीआई जांच का आदेश दे दिया। जिसके बाद सीबीआई ने फतेहपुर, सोनभद्र, देवरिया, हमीरपुर, शामली, सिद्धार्थनगर, सहारनपुर आदि जिलों में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए मुकदमे दर्ज किए थे। प्रारंभिक जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला होने के प्रमाण मिले थे।