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Lucknow News : गेमिंग में कर्जदार 10वीं के छात्र ने किया आत्मदाह, पेट्रोल डाल लगा ली थी आग
Thu, 25 Jan 2024 12:17 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 25 Jan 2024 12:17 AM IST
सार
ऑनलाइन गेमिंग में कर्जदार हुए 10वीं कक्षा के छात्र शिवा कश्यप (17) ने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। इलाज के दौरान बुधवार सुबह सिविल अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
ऑनलाइन गेमिंग में कर्जदार हुए 10वीं कक्षा के छात्र शिवा कश्यप (17) ने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। इलाज के दौरान बुधवार सुबह सिविल अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
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मूलरूप से हरदोई के रहने वाले बृजेश कश्यप बंथरा में किराये के मकान में परिवार के साथ रहते हैं। वह एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। परिवार में पत्नी मालती, बेटी माही व दिव्या के अलावा बेटा शिवा था। शिवा बंथरा के ही लाला रामस्वरूप शिक्षा संस्थान इंटर कॉलेज में पढ़ता था। परिजनों के मुताबिक वह ऑनलाइन गेम खेलने का लती था। शिवा के चचेरे भाई अनुभव ने बताया कि शिवा गेमिंग में काफी पैसे हार चुका था। गेमिंग की वजह से उसने काफी रकम उधार ले रखी थी। उधारी को लेकर वह बेहद परेशान था। ममेरे भाइयों व कुछ अन्य दोस्तों से रुपये की मांग भी कर रहा था।
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चीखें सुनकर बिलखते रहे परिजन
परिजनों के मुताबिक सोमवार सुबह शिवा ने बाइक से बोतल में पेट्रोल निकाला। इसी पेट्रोल को अपने ऊपर उड़ेलकर उसने आग लगा ली। चीखें सुनकर परिजन बाहर निकले। शिवा को आग का गोला बना देख वे बिलखने लगे। किसी तरह से कंबल आदि डालकर आग बुझाई, लेकिन तब तक शिवा 80 फीसदी से अधिक झुलस चुका था।
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10 फरवरी तक चुकानी थी उधारी
अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि शिवा पर कितनी उधारी थी। रकम किन लोगों को देनी थे, यह भी पता नहीं चला है। हालांकि यह सामने आ रहा है कि उसको उधारी की रकम दस फरवरी तक वापस करनी थी। इसलिए वह बहुत तनावग्रस्त था। इसी वजह से उसने आत्मघाती कदम उठाया।
ऑनलाइन गेम की लत बन गई गंभीर बीमारी, अभिभावक दें ध्यान
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग के डॉ. पवन गुप्ता के मुताबिक ऑनलाइन गेमिंग असल में ऑनलाइन गैंबलिंग का ही मिलाजुला रूप है। गैंबलिंग काफी पहले से नशेबाजी के रूप में मानी जाती है। ऑनलाइन गेमिंग को पूरी तरह से वैधानिक मान लिया गया है। इसका नतीजा यह है कि लोग इसके चंगुल में पड़ रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।
-अभिभावकों को भी अपने बच्चों के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। ऑनलाइन गेम की लत गंभीर बीमारी बन चुकी है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
-जिस तरह की परिस्थिति में छात्र ने आत्महत्या की है, उसके लिए सामाजिक जिम्मेदारी बनती है। इस तरह की आत्महत्या के मामलों में सामाजिक पहलू का अध्ययन करके सुधार करने की जरूरत है।