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माफिया मुख्तार अंसारी को पेश न करने पर एमपीएमएलए कोर्ट नाराज, मुख्य सचिव और डीजीपी को रिपोर्ट देने का निर्देश
Thu, 30 Sep 2021 11:25 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 30 Sep 2021 11:25 AM IST
सार
जेल के कारापाल एसएन द्विवेदी ने 3 अप्रैल 2000 को आलमबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 मार्च 2000 को पेशी से लौटे बंदियों को जेल में लाया जा रहा था, तभी क्वारंटीन बैरक में बंद मुख्तार अंसारी के साथी यूसुफ चिश्ती, आलम, कल्लू पंडित और लालजी यादव ने बंदी चांद को बुरी तरह से मारना शुरू कर दिया।
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मुख्तार अंसारी
विस्तार
जेल में बंदी के दौरान वहां कर्मचारियों पर पथराव, जानमाल की धमकी और सरकारी कार्य में बाधा डालने के 20 साल पुराने मामले में माफिया मुख्तार अंसारी को पेश न करने पर एमपीएमएलए कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर, कारागार के अतिरिक्त महानिदेशक, बांदा के जेल अधीक्षक, जिलाधिकारी लखनऊ और संबंधित थानेदार को पत्र लिखकर मुख्तार अंसारी को पेश करने और अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार रॉय ने मामले में मुख्तार अंसारी पर आरोप तय करने के लिए 20 अक्तूबर की तारीख तय की है।
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कोर्ट ने आदेश की प्रति सभी अधिकारियों को भेजकर कहा कि यह मामला विधायक से जुड़ा होने के साथ ही 20 साल पुराना है। मगर अभियोजन कोई रुचि नहीं ले रहा है। पिछली तारीखों से अभियोजन मौखिक रूप से कह रहा है कि मुख्तार को कोर्ट में हाजिर कर देगा, लेकिन उसे बांदा जेल से लाकर हाजिर नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस वजह से आरोपी पर न तो आरोप तय हो पा रहे हैं और न ही गवाही हो पा रही है। बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश करने के लिए मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन किसी अधिकारी ने न तो कोई रिपोर्ट कोर्ट में दी और न ही आरोपी को पेश किया, जो कि अत्यंत आपत्तिजनक है।
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यह था मामला
जेल के कारापाल एसएन द्विवेदी ने 3 अप्रैल 2000 को आलमबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 मार्च 2000 को पेशी से लौटे बंदियों को जेल में लाया जा रहा था, तभी क्वारंटीन बैरक में बंद मुख्तार अंसारी के साथी यूसुफ चिश्ती, आलम, कल्लू पंडित और लालजी यादव ने बंदी चांद को बुरी तरह से मारना शुरू कर दिया। जब वादी और अन्य कर्मचारी चांद को बचाने गए तो आरोपियों ने जेल कर्मियों पर हमला करते हुए पथराव कर दिया।
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