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लखनऊ : कानूनन कोयला आयात करने का दबाव नहीं बना सकता ऊर्जा मंत्रालय

Fri, 03 Jun 2022 10:27 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 03 Jun 2022 10:27 PM IST
सार

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कोल इंडिया व विद्युत उत्पादन निगम के बीच अनुबंध का हवाला देते हुए कहा है कि कानूनन ऊर्जा मंत्रालय कोयला आयात करने का दबाव नहीं बना सकता है। अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी बिजलीघर चाहे तो कोयला आयात करे न चाहे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता।

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Lucknow: Ministry of Power cannot pressurize to import coal by law
कोयला आपूर्ति

विस्तार

आयातित कोयले को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के बीच रस्साकशी तेज हो गई है। कोयला आयात न करने पर घरेलू कोयले के आवंटन में कटौती की केंद्र की चेतावनी के मद्देनजर राज्य विद्युत उत्पादन निगम के आला अधिकारी हालात से निपटने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। इस बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कोल इंडिया व विद्युत उत्पादन निगम के बीच अनुबंध का हवाला देते हुए कहा है कि कानूनन ऊर्जा मंत्रालय कोयला आयात करने का दबाव नहीं बना सकता है। अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी बिजलीघर चाहे तो कोयला आयात करे न चाहे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता।

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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि कोल इंडिया और उत्पादन निगम के बीच फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट में यह प्रावधान है कि अगर कोल इंडिया किसी भी समय लिंकेज का घरेलू कोयला सप्लाई करने में दिक्कत महसूस करेगा तो वह विदेशी कोयला खरीद कर दे सकता है लेकिन इसकी सूचना तीन माह पहले दी जाएगी। आपसी सहमति होने के बाद ही कोयला आयात करने की कार्यवाही की जाएगी। अगर संबंधित बिजलीघर आयातित कोयला लेने से इन्कार करता है तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। बड़ा सवाल यह है कि कोल इंडिया और उत्पादन निगम के बीच अनुबंध में ऊर्जा मंत्रालय क्यों दखल दे रहा है? ऊर्जा मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है फिर भी वह राज्यों को घरेलू कोयले के आवंटन में कटौती की धमकी दे रहा है।
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वर्मा के मुताबिक कोयला आयात के मामले में ऊर्जा मंत्रालय की भूमिका इसलिए भी संदिग्ध नजर आ रही है क्योंकि कोयला मंत्री पहलाद जोशी ने शुक्रवार को ही ट्वीट करके बताया कि वर्ष 2020-21 के मुकाबले 2021-22 में कोयले के उत्पादन में 8.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। यानी कोयला मंत्रालय के मुताबिक देश में कोयले की कोई कमी नहीं है जबकि ऊर्जा मंत्रालय को इसमें कमी दिखाई दे रही है। विदेशी कोयले की खरीद के लिए ऊर्जा मंत्रालय राज्यों के आवंटन में कटौती करके उपभोक्ताओं को अंधेरे में धकेलने की साजिश कर रहा है।

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