चार स्टेशनों का काम 80 प्रतिशत पूरा, जानें कितने दिनों बाद चलेगी लखनऊ में मेट्रो
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राजधानी में मेट्रो चलने में अब केवल 169 दिन बाकी हैं। ऐसे में लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) भी काम पूरा करने के लिए तेजी दिखा रही है। एक तरफ जहां आठ में से चार मेट्रो स्टेशनों का सिविल वर्क 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया है।
वहीं इन स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ियों की आपूर्ति और डिजाइन का काम चीन की कंपनी वीटीएल को दिया गया है। भारतीय कंपनी कोन इंडिया के साथ वीटीएल लखनऊ केमेट्रो स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ियां लगाएगी।
इसका प्रोटोटाइप डिजाइन चीन में ही कंपनी तैयार कर रही है। बुधवार को प्रेसवार्ता में एमडी कुमार केशव ने बताया कि जुलाई तक डिजाइन तैयार कर चीनी कंपनी हमें देगी। इसके बाद इन स्वचालित सीढ़ियों को लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं अभी हम कृष्णानगर, ट्रांसपोर्टनगर, आलमबाग और मवैया पर मेट्रो स्टेशनों का सिविल वर्क का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुके हैं। इनमें से एक पर पहली सवारी लिफ्ट लगाई जानी है।
हमारी योजना है कि पहली लिफ्ट कृष्णानगर स्टेशन पर लगे। यह हमारा सबसे पहले तैयार होने वाला मेट्रो स्टेशन होगा। अभी तक आठ लिफ्ट की आपूर्ति हमें हो चुकी है। इसी में से एक कृष्णानगर मेट्रो स्टेशन पर लगानी है।
कुमार केशव ने बताया कि अब हमारा फोकस मेट्रो के ट्रायल को शुरू करने पर है। ऐसे में हम हर उस काम को पूरा करा रहे हैं जिसकी जरूरत होगी। इसमें टेलीकॉम, अलग-अलग सुविधाओं के डिजाइन फाइनल करने और रॉलिंग स्टॉक की आपूर्ति को सुनिश्चित करना है।
मेट्रो स्टेशन और ट्रेन में विज्ञापन की नीति पर भी काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए विज्ञापनदाताओं की मांग की स्टडी कराई जा रही है। हम अपनी डेडलाइन को पूरा करेंगे।
जुलाई से भूमिगत रूट पर शुरू हो जाएगा काम
इसमें एक दिसंबर को मेट्रो का ट्रायल शुरू हो जायेगा। मेट्रो का कॉमर्शियल संचालन मार्च में एलएमआरसी शुरू कर देगा। इसके लिए हम प्रायोरिटी सेक्शन पर तैयार हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रायोरिटी सेक्शन में ट्रांसपोर्टनगर से चारबाग के बीच 8.5 किमी में से 4.446 किमी में लाइन बिछ चुकी है।
वहीं 533 में से 477 यू-गर्डर अब तक रखे जा चुके हैं। लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही अब विद्युतीकरण पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
कुमार केशव का कहना है कि जुलाई से भूमिगत रूट पर काम शुरू हो जाएगा। यहां पूरा ट्रैफिक डायवर्जन एक साथ लागू नहीं किया जाएगा। इससे बचने केलिए तीनों स्टेशनों पर एक साथ काम नहीं शुरू किया जाएगा।
एक बार में एक स्टेशन का तैयार कराया जाएगा। इससे एक ही जगह पर ट्रैफिक आंशिक रूप से बाधित होगा। इस रूट पर यूटिलिटी और भवनों के सर्वे का काम भी शुरू हो चुका है। भूमिगत सुृरंग में मेट्रो 13 मीटर तक जमीन से नीचे चलेगी।
स्टेशन भी करीब 17 मीटर नीचे बनाए जाने हैं। इनमें एंट्री के लिए लेकिन हमें 25 मीटर तक जगह चाहिए होगी। इसके निर्माण के लिए ही ट्रैफिक डायवर्जन कराना होगा। इसके लिए पूरी योजना बन चुकी है।
यहां कोई दिक्कत काम के बीच न आए ऐसे में स्मारकों की मौजूदगी को देखते हुए एएसआई और मॉन्यूमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी दी जाएगी।
निदेशक दलजीत सिंह ने बताया कि मेट्रो रूट पर मवैया के पास से गुजर रही रेलवे लाइन के ऊपर से मेट्रो गुजरेगी। ऐसे में यहां एक स्पेशल स्पान बनाया जा रहा है। इसके लिए चारबाग की तरफ से दो सेगमेंट बन चुके हैं। दूसरी तरफ से भी सेगमेंट पर काम शुरू कर दिया गया है।
आयुक्त रेलवे संरक्षा से जरूरी अनुमति के लिए भी बृहस्पतिवार को एक प्रजेंटेशन दिल्ली में दिया गया है। वहां से जल्द अनुमति का आश्वासन मिला है। एक पत्र भी रेलवे डिवीजन की तरफ से भिजवा दिया गया है।