लखनऊ मेट्रो परियोजना की राह में अब आया बड़ा रोड़ा
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मेट्रो रेल परियोजना के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) अनुमोदन की फाइल वापस होने से अब रोलिंग स्टॉक के टेंडर (बोगी, ट्रैक और सिग्नलिंग) को भी झटका लग सकता है।
इस टेंडर के लिए लोनिंग अथॉरिटी को भी अपनी सहमति देनी होती है। मगर बिना पीआईबी के यूरोपियन यूनियन बैंक किस तरह से अपनी सहमति देगी, ये एक बड़ा सवाल है।
1100 करोड़ रुपये के इस टेंडर के लिए आर्थिक मदद कहां से आएगी, इसको लेकर भी दिक्कतें होंगी। फिलहाल एलएमआरसी का कहना है कि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, मगर वास्तविकता यह है कि पीआईबी के बिना रोलिंग स्टॉक टेंडर अटक रहा है।
वित्त मंत्रालय ने वापस भेजी फाइल
इस रुकावट से बचने के लिए प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने भी एलएमआरसी के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। पीआईबी अनुमोदन की फाइल केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को भेज दिया था।
जहां से वित्त मंत्रालय ने इस फाइल को वापस भेज दिया है। ऐसे में लखनऊ मेट्रो परियोजना के विदेशी ऋण के साथ ही रोलिंग स्टॉक के टेंडर को भी जबरदस्त झटका लगा है।
दरअसल रोलिंग स्टॉक टेंडर करीब 1100 करोड़ रुपये का है। जिसमें न केवल विदेशी ऋण की आवश्यकता पड़ेगी बल्कि, फंडिंग एजेंसी की गारंटी की भी जरूरत एलएमआरसी को होगी। ऐसे में पीआईबी से स्वीकृति न मिलना इस टेंडर के लिए बड़ा आघात है।