बेहद खास हैं लखनऊ मेट्रो की बोगियां, जानें- क्या होंगी सुविधाएं
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लखनऊ मेट्रो की बोगियों ने आकार लेना शुरू कर दिया है। चेन्नई से करीब 20 किलोमीटर दूर एलस्टॉम इंडिया लिमिटेड के श्रीसिटी स्थित कारखाने में सोमवार को अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में मेट्रो की बोगियों का उत्पादन शुरू कर दिया गया।
यह बोगियां कैसी होंगी इसके लिए लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अफसरों ने 2-डी डिजाइन और 3डी मॉक अप डिजाइन का प्रजेंटेशन किया। सीएम ने इसके बाद बोगियों के निर्माण कार्य के शुभारंभ का एलान किया।
मेट्रो की बोगियों को लखनवी हेरिटेज का लुक देकर खास बनाया जा रहा है। इसमें नवाबी स्थापत्य और चिकनकारी के नमूने शामिल हैं।
एमडी कुमार केशव ने प्रजेंटेशन के दौरान लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट के अत्याधुनिक डिब्बों के लिए अपनायी गई प्रक्रिया, यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और सुरक्षा के साथ-साथ दिव्यांग यात्रिओं के उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।
20 गाड़ियों की होगी आपूर्ति, हर में होंगे चार डिब्बे
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लखनऊ मेट्रो फेज-1 ए प्रोजेक्ट के 22 किमी के लिए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए 20 गाड़ियों के लिए आपूर्ति करेगी। इनमें हर में चार डिब्बे होंगे।
इस मौके पर सपा सांसद डिंपल यादव, मुख्य सचिव आलोक रंजन, एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव, कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी, एमएलसी मधुकर जेटली, एल्स्टॉम से भारत सल्होत्रा मौजूद रहे। इस मौके पर बोगियों की 2-डी डिजाइन और 3-डी मॉकअप का रोलिंग स्टॉक के डिटेल्ड डिजाइन का अनावरण किया गया।
जानिए क्या सुविधा होंगी अपनी मेट्रो में
कुल 1100 लोग एक साथ गाड़ी में सफर कर सकेंगे, जबकि बैठने का स्थान 186 लोगों का होगा। बाकी लोग खड़े होकर सफर करेंगे। दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर पर बैठ कर सफर करने की व्यवस्था होगी।
आपातकाल की दशा में लोग सीधे ही ट्रेन ड्राइवर से एक बटन दबा कर बात कर सकेंगे। जबकि एक बोगी में कुल 18 मोबाइल चार्जिंग पोर्ट दिए जाएंगे।
बाहर इमारतों और चिनकारी का दिखेगा लुक
ट्रेन की डिजाइन शहर की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है। मेट्रो ट्रेन के बाहरी हिस्से पर शहर के अति महत्वपूर्ण ऐतिहासिक भवनों जैसे कि बड़ा-इमामबाड़ा, आसिफी मस्जिद और रूमी गेट की तर्ज पर बनाया गया है।
बाहर सुनहरे रंग का है जोकि परंपरागत रूप से उपयोग की जाने वाली चिकनकारी कला से प्रेरित है। साथ ही साथ मेट्रो कार का काला रंग हजरतगंज की एकरूपता से प्रेरित है।
ट्रेन के ऊपर तक अगल-बगल से जाती हुई एक लाल रंग की पट्टी उसकी गति तथा गतिशीलता की भावना को प्रदर्शित करती है।
दिव्यांगों, महिलाओं और बुजुर्गों का रखेंगे ख्याल
यात्रिओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते हुए लंबवत में 186 सीटें लगाई जाएंगी। दो जोन दिव्यांगों की सुविधा की दृष्टि से बनाए गए हैं। मेट्रो ट्रेन के अंदर सभी को दिखाई पड़ने वाले सुविधाजनक स्थानों पर यात्रियों को महत्वूपर्ण सूचना देने के लिये स्क्रीन लगाए गए हैं। ट्रेन के अंदर दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर स्पेसेज, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिये ब्रेल स्टिकर्स भी होंगे।
नहीं होगा ड्राइवर, होगा कार ऑपरेटर
इस ट्रेन का संचालन पूरी तरह से ऑटोमेटिक होगा। गाड़ी की सिग्नलिंग और संचालन कंप्यूटर प्रोग्राम पर आधारित होगी। गाड़ी के भीतर कंट्रोल पैनल में कार ऑपरेटर होगा। इसका काम ट्रेन की गतिविधि को गाड़ी के अंदर रहते हुए नजर में रखना होगा।
इमरजेंसी में ट्रेन ऑपरेटर से कर सकेंगे बात
यात्रिओं को ट्रेन ऑपरेटर से टॉकबैक फैसिलिटी के साथ साथ आकस्मिक संवाद की सुविधा भी होगी। सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। टॉक बैक बटंस की व्यवस्था होगी। मुसीबत में यात्री इसे दबाकर सीधे ट्रेन ऑपरेटर से बात कर सकेंगे।
यात्रियों के आराम का होगा पूरा इंतजाम
यात्रिओं की सुविधाओं के लिए ट्रेन के अंदर कम शोर, चौड़े रवाजे और अंदर यात्रिओं को सुविधा से आने जाने के लिये रास्ता, यात्रिओं आराम से खड़े रह सकें इकसे लिए हैंडिल एंड ग्रैब ड्रिल सिस्टम लगाए गए हैं।
बेहतरीन डिस्प्ले और अनाउंसमेंट के लिए कार के सामने, अंदर और बगल में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम की सुविधा कराई गई है। इसके साथ ही यात्रियों के आराम से बैठने के लिए बड़ी खिड़कियों और स्टेनलेस स्टील बकेट टाइप सीट्स की भी व्यवस्था की गई है।