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निर्मल गंगा सम्मेलन: पर्यावरण मंत्री बोले- जीवन के लिए हवा के बाद पानी जरूरी, पद्मश्री उमाशंकर की खास अपील

Tue, 08 Sep 2026 11:41 AM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 08 Sep 2026 11:41 AM IST
सार

लखनऊ में निर्मल गंगा और प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प पर महामंथन शुरू हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने गंगा की स्वच्छता, नदियों के संरक्षण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर चर्चा की। पद्मश्री उमाशंकर पांडेय जखनी मॉडल के अनुभव साझा करेंगे। जनभागीदारी से जल संरक्षण बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

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Lucknow: Major deliberation on a clean Ganga and a pollution-free UP; Padma Shri Umashankar Pandey to share hi
पैनल डिस्कशन में मंच पर चेयरमैन यूपी पीसीबी आरपी सिंह, वाटर मैन उमाशंकर पांडेय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निर्मल गंगा और प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को लेकर मंगलवार को राजधानी में महामंथन हुआ। अमर उजाला की ओर से उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), नमामि गंगे और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम गोमतीनगर स्थित ताज महल होटल में सुबह 10 बजे से शुरू हुआ था। 

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कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, बुंदेलखंड के जखनी मॉडल के प्रणेता पद्मश्री उमाशंकर पांडेय, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. ध्रुवसेन सिंह, पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक कुमार सिंह समेत विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में गंगा की अविरलता और स्वच्छता के साथ नदियों के संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपायों पर चर्चा की। 
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वन एवं पर्यावरण मंत्री बोले- जीवन के लिए हवा के बाद पानी सबसे जरूरी 

वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि जीवन के लिए हवा के बाद पानी सबसे जरूरी है। नदियां हमारे जीवन की धमनियों की तरह हैं, लेकिन कई नदियां धीरे-धीरे गंदे नालों में तब्दील होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के प्रति लोगों की आस्था बेहद गहरी है।

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गंगा की कसम खाने से लेकर पूजा-पाठ और जीवन के अंतिम समय में गंगाजल के उपयोग तक इसका विशेष महत्व है। ऐसे में गंगा की स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। मंत्री ने कहा कि गंगा को स्वच्छ रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। नालों के गंदे पानी को सीधे नदी में जाने से रोकना होगा। इसके साथ ही नदी में कूड़ा-कचरा डालने पर प्रभावी रोक लगानी होगी। गंगा की स्वच्छता के लिए लगातार प्रयास और निगरानी जरूरी है।

जनभागीदारी से ही स्थायी होगी स्वच्छता

मंत्री ने कहा कि कुंभ जैसे बड़े आयोजनों के बाद भी यदि गंगा प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों का खतरा नहीं बढ़ता है तो यह बेहतर व्यवस्था का संकेत है। हालांकि, इस व्यवस्था को स्थायी बनाना जरूरी है। उन्होंने आम लोगों से गंगा को केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनदायिनी नदी मानकर उसकी स्वच्छता में योगदान देने की अपील की। गंगा में कूड़ा, प्लास्टिक और अन्य गंदगी नहीं डालने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि गंगा को स्वच्छ बनाने में जनभागीदारी की सबसे बड़ी भूमिका है।

Lucknow: Major deliberation on a clean Ganga and a pollution-free UP; Padma Shri Umashankar Pandey to share hi
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना - फोटो : अमर उजाला

उमाशंकर पांडेय बोले- माता-पिता से बड़ा कोई नहीं 

'विचार मंथन' कार्यक्रम  वाटर मैन उमाशंकर पांडेय ने माता-पिता के महत्व पर बोलते हुए कहा कि इस सृष्टि में माता-पिता से बड़ा कोई नहीं है। मां त्याग और निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति होती है, जबकि पिता संबल और सुरक्षा का आधार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि माता-पिता को वृद्धाश्रम न भेजें। यदि भगवान गणेश की तरह बुद्धिमान बनना है, तो माता-पिता की परिक्रमा और सेवा करें। वहीं, प्रभु राम की तरह पूजनीय बनना है, तो उनके चरणों में सिर झुकाएं। असली हीरो हमारे माता-पिता ही हैं।


 

ध्रुव सेन सिंह बोले- आपदाओं को कोई नहीं रोक सकता 

अमर उजाला की ओर से विचार मंथन निर्मल गंगा प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश कार्यक्रम में वक्ता ध्रुव सेन सिंह ने प्रकृति, पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाओं पर बोलते हुए कहा कि प्रकृति पर्यावरण का वह भाग है जो मानव नियंत्रण से पूरी तरह परे है। कितना भी विकसित देश क्यों न हो, वह भूकंप, चक्रवात और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकता।



हालांकि, प्राकृतिक नियमों और वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखकर आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम अवश्य किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति हमें जल, वायु और स्थल मंडल (एटमॉस्फियर, हाइड्रोस्फियर, लिथोस्फियर) के रूप में जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं प्रदान करती है, जो मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक संतुलन बनाती हैं।

चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार बोले- जन्म के समय हमारा फेफड़ा पिंक होता है

चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि जन्म के समय हमारा फेफड़ा पिंक होता है। लेकिन अब प्रदूषण की मार से फेफड़ों का रंग काला होने लगा है। चिंता की बात यह है कि अब नॉन-स्मोकर्स यानी सिगरेट न पीने वालों के फेफड़े भी अब काले होने लगे हैं। यही नहीं 7-8 साल के बच्चों के फेफड़ों का भी बुरा हाल है।

जल संरक्षण से नदी संरक्षण तक पर मंथन

''निर्मल गंगा, प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश'' विषय पर होने वाली परिचर्चा में नदियों को स्वच्छ और जीवंत बनाने के साथ जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर भी विचार हुआ। जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ''खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़'' के मंत्र के साथ बुंदेलखंड में जखनी मॉडल विकसित कर चुके हैं। 

उनके प्रयासों से जखनी को देश का पहला ''जल ग्राम'' घोषित किया गया था। उनके प्रयासों से जुड़े मॉडल को अटल भूजल योजना के व्यापक अभियान से जोड़ा गया। योजना के तहत 10,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में भूजल प्रबंधन और 1,050 से अधिक जलग्राम विकसित किए गए। तीन हजार से अधिक पानी की पाठशालाओं के माध्यम से 10 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों में जल संरक्षण की जागरूकता पैदा की।

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