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Lucknow News: उदास निकिता को हमसफर की तलाश, सुजाता, विशाखा और पिंटू भी जी रहे तन्हाई में

Thu, 29 Dec 2022 06:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Dec 2022 06:00 AM IST
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उदास निकिता।
गौरी त्रिवेदी
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लखनऊ। उदास निकिता (मादा चिम्पैंजी) रोजाना इसी उम्मीद से बाड़े से झांकती है कि उसका साथी जैक्सन आज लौट आएगा। वह उसके साथ टीले पर बैठकर कंबल में लुका-छिपी का खेल खेलेगी, जिससे उसे अकेलापन नहीं सताएगा। निकिता की ही तरह प्राणि उद्यान में सुजाता (मादा जिराफ), विशाखा (सफेद बाघिन) और पिंटू (भालू) जैसे जानवर अकेलेपन का दर्द झेल रहे हैं। इसका इनके व्यवहार के साथ सेहत पर भी असर पड़ रहा है।
निकिता
इस मादा चिम्पैंजी को वह 2007 में मैसूर के चिड़ियाघर से यहां लाया गया था। उस वक्त इसकी उम्र 20 साल थी। पिछली जुलाई में साथी जैक्सन की मौत के बाद से निकिता अकेले है। करीब डेढ़ साल से कोई साथी नहीं मिलने से निकिता के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। अब वह उस तरह बाड़े में नहीं खेलती-कूदती जैसा जैक्सन के साथ करती थी। प्राणी उद्यान के उपनिदेशक उत्कर्ष शुक्ला का कहना है कि चिम्पैंजियों की घटती आबादी से ज्यादातर जू में इनकी संख्या शून्य हो गई है। ऐसे में कोई भी जू अपने यहां के चिम्पैंजी देने के लिए राजी नहीं होते। निकिता के लिए नर चिम्पैंजी को लाने के कई बार प्रयास किए गए। अब जोड़े में चिम्पैंजी लाने के प्रयास हो रहे है। यदि बाड़े के आस-पास जानवर की प्रजाति से मिलता-जुलता पशु है तो इनकी मनोदशा पर कम प्रभाव देखने को मिलता है। चिम्पैंजी की प्रजाति का जू में कोई भी नहीं है, इस कारण निकिता ज्यादा उदास है।
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सुजाता
यह मादा जिराफ वर्ष 2003 में अलीपुर जू से लाई गई थी। इसके साथी नर जिराफ की वर्ष 2016 में मौत हो गई। सुजाता अभी लगभग 22 साल की है। प्राणि उद्यान के चिकित्सक अशोक कुमार ने बताया कि जिस पशु का बौद्धिक स्तर तेज होता है, वह उतना ही भावात्मक होता है। साथी की मौत के बाद सुजाता ने कई दिनों तक सही से खाया तक नहीं खाया था। इतना ही नहीं कई महीनों तक वह अपने कमरे में भी नहीं गई।
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पिंटू
रांची के चिड़ियाघर से वर्ष 2017 में लखनऊ प्राणि उद्यान लाया गया यह देसी भालू अपने बाडे़ में हमेशा से अकेला ही है।
विशाखा
इस मादा बाघिन को वर्ष 2011 में भिलाई के जू से लाया गया था। साल 2017 में साथी आर्यन की मौत के बाद से यह भी अकेली है। हालांकि, इसका एक शावक (सफेद बाघ जय) इसके साथ रहता है। दूसरा शावक दिल्ली भेज दिया गया था।

अकेलेपन का जानवरों पर असर
चिड़चिड़ाहट बढ़ना, उदास रहना, चहलकदमी कम करना व कम ऊर्जावान दिखना।
यह कहता है नियम
सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियम वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार किसी भी जानवर को अकेले नहीं रखा जा सकता। फिर चाहे वह कितना भी बुजुर्ग क्यों न हो।
कोट्स
आगे भी जारी रहेगी कोशिश
हमने कई बार इन जानवरों के साथियों को लाने की कोशिश की, पर असफल रहे। इसके लिए आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।
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