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Lucknow: ट्रॉमा सेंटर पहुंची घायल महिला को भेज दिया निजी अस्पताल, इलाज के दौरान हो गई मौत
Wed, 18 Dec 2024 07:53 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 18 Dec 2024 07:53 AM IST
सार
मुन्नी देवी 30 नवंबर को सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। उनके दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी। रीढ़ में भी चोट थी।
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केजीएमयू लखनऊ
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर से मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचाने वाले दलालों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बेहतर इलाज का झांसा देकर यहां सक्रिय दलाल ने घायल हरदोई के बघौली निवासी मुन्नी देवी (66) को आईआईएम रोड स्थित फीब्स हॉस्पिटल पहुंचा दिया। मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मुन्नी देवी की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पुलिस ने उन्हें शांत कराया।
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मुन्नी देवी 30 नवंबर को सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। उनके दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी। रीढ़ में भी चोट थी। परिजन पहले उन्हें लेकर जिला अस्पताल हरदोई गए थे। वहां पर हालत गंभीर बताकर उन्हें 30 नवंबर को ही ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया था।
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बेटे शिशुपाल ने बताया कि खुद को डॉ. विनोद बताने वाले शख्स ने उनसे संपर्क किया। कथित डॉक्टर ने बताया कि वह ट्रॉमा सेंटर में तैनात है। यह भी कहा कि ट्रॉमा सेंटर में अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा। खुद को डॉक्टर बताने वाले शख्स ने कहा, हमारे बताए अस्पताल में मां को ले जाओ, वहां हर दिन महज पांच हजार का खर्च आएगा। बेहतर इलाज भी मिलेगा।
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शिशुपाल के मुताबिक, वह झांसे में आ गए और निजी अस्पताल जाने को राजी हो गए। कुछ ही देर में ट्रॉमा सेंटर में निजी अस्पताल की एंबुलेंस आ गई। ट्रॉमा सेंटर के गार्ड और स्टाफ ने निजी एंबुलेंस को मरीज को ले जाते देखा, लेकिन किसी ने टोका नहीं। कुछ ही देर में एंबुलेंस आईआईएम रोड स्थित फीब्स हॉस्पिटल पहुंच गई।
अस्पताल संचालक ने हालत नाजुक बताते हुए मुन्नी देवी को आईसीयू में भर्ती किया था। इलाज के लिए करीब ढाई लाख रुपये की मांग की गई। बेटे शिशुपाल का आरोप है, मैंने अस्पताल प्रशासन को बताया कि हमारे पास आयुष्मान कार्ड है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कार्ड पर इलाज मुहैया कराने से मना कर दिया। जबकि आयुष्मान कार्ड होने पर पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज देने का प्रावधान है।
शिशुपाल का कहना है, मुझसे ऑनलाइन करीब 25 हजार रुपये जमा कराए गए। एक लाख रुपये और देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इलाज में लापरवाही से मां की मौत हो गई। मां के इलाज से जुड़ी जांच रिपोर्ट भी हमें नहीं दी गई। वहीं, मुन्नी देवी का इलाज करने वाले फीब्स हॉस्पिटल के डॉ. नरेंद्र ने बताया कि मरीज की हालत नाजुक थी। उनकी हड्डी भी टूटी थी, जिसका ऑपरेशन संभव नहीं था।
पुलिस ने सीएमओ को लिखा पत्र
परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ लापरवाही और वसूली का आरोप लगाते हुए मड़ियांव थाने में तहरीर दी है। इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिली है। सीएमओ को पत्र लिखा गया है। सीएमओ की रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत मिलने पर कराई जाएगी जांच
शिकायत मिलने पर कमेटी गठित कर जांच कराई जाएगी। अस्पताल की लापरवाही व आयुष्मान मरीज से वसूली के साक्ष्य मिलने पर अस्पताल पर कार्रवाई होगी।-डॉ. एपी सिंह, नर्सिंग होम के नोडल
नहीं थम रहा मरीज को निजी अस्पताल पहुंचाने का खेल
गोलागंज निवासी आलम केजीएमयू में भर्ती थे। पत्नी मुस्कान के मुताबिक, 14 नवंबर को खदरा पक्का पुल स्थित एमजे हॉस्पिटल से डॉ. जुनैद नामक शख्स की कॉल आई। इस शख्स ने बेहतर इलाज का झांसा दिया। यही नहीं केजीएमयू में एंबुलेंस भिजवाकर मरीज को शिफ्ट करा लिया गया। इलाज के दौरान 15 नवंबर को आलम की मौत हो गई। पत्नी ने अस्पताल संचालक पर वसूली व इलाज में कोताही का आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर व सीएमओ से शिकायत दर्ज कराई है।
लखीमपुर के सुरेंद्र पाल सिंह की पत्नी पूनम मौर्य को बेहतर सर्जरी होने का झांसा देकर 6 नवंबर को खदरा के केडी अस्पताल पहुंचा दिया गया था। केडी अस्पताल में सर्जरी के बाद पूनम की मौत हो गई थी। मरीज को शिफ्ट कराने में केजीएमयू प्रशासन ने संविदा पर तैनात चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थी।
बड़ा सवाल : मरीज की सूचना कैसे पहुंच रही दलालों तक
मरीजों को शिफ्ट कराने के मामलों पर गौर करें तो कई सवाल उठते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरीजों की सूचना कैसे दलालों तक पहुंच रही है? यहां तक की तीमारदारों के फोन नंबर तक दलालों तक पहुंच जा रहे हैं। साफ है यह सब मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता। कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो मरीजों की सूचनाएं निजी अस्पतालों तक पहुंचाते हैं। केजीएमयू प्रशासन को इनका पता लगाकर कार्रवाई करनी होगी।