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UP News: हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को 14 साल में बदला, कहा- वकील से FIR लिखवाने से रिपोर्ट गलत नहीं हो जाती
Mon, 02 Mar 2026 10:08 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:08 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने एक दोषी की उम्रकैद की सजा को 14 साल में बदल दिया। कहा कि वकील से FIR लिखवाने से रिपोर्ट गलत नहीं हो जाती है। आगे पढ़ें क्या है पूरा मामला...
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लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दो महिलाओं पर एसिड हमला करके गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी व्यक्ति की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद को घटाकर 14 साल के कारावास में बदल दिया है। हालांकि अदालत ने उसकी दोष सिद्धि बरकरार रखी है।
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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर वकील की मदद से लिखवाना गलत नहीं माना जा सकता। कानूनी सहायता लेना हर व्यक्ति का अधिकार है और इससे रिपोर्ट की सच्चाई पर संदेह नहीं किया जा सकता।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने प्रतापगढ़ निवासी जगदम्बा हरिजन की अपील पर यह फैसला सुनाया। सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा दी थी। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट को सही मानते हुए दोष बरकरार रखा, लेकिन आरोपी द्वारा पहले ही लगभग 14 वर्ष जेल में बिताने के आधार पर सजा कम कर दी।
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