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Lucknow: एलडीए के कोर्ट में अलीगंज अग्निकांड मामले की सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित, एक-दो दिन में आएगा आदेश

Fri, 10 Jul 2026 09:10 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 10 Jul 2026 09:10 AM IST
सार

अलीगंज अग्निकांड मामले में सुनवाई पूरी हो गई है जल्द ही इस पर निर्णय दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान बिल्डिंग मालिक के वकील ने कहा कि उन्हें खुद इमारत तोड़ने की अनुमति दी जाए।

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Lucknow: Hearing on the Aliganj fire incident case concluded in the LDA court; order reserved.
लखनऊ अग्निकांड की तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

अलीगंज अग्निकांड वाली बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण नोटिस पर एलडीए के विहित प्राधिकारी कोर्ट में सुनवाई बृहस्पतिवार को तीसरे दिन पूरी हो गई। बिल्डिंग मालिक और एलडीए इंजीनियर का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया है। एक-दो दिन में आदेश आने पर ही साफ होगा कि अवैध बिल्डिंग पर एलडीए खुद बुलडोजर चलाएगा या बिल्डिंग मालिक को खुद तोड़ने का मौका देगा।

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22 जून को अलीगंज स्थित एनीमेशन सेंटर की बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई थी। एलडीए के विहित प्राधिकारी अतुल कुमार की कोर्ट में सुनवाई दौरान बिल्डिंग मालिक के वकील की ओर से यह पक्ष रखा गया कि बिल्डिंग में जो भी निर्माण अवैध है उसको वह स्वयं अपने खर्चे पर गिरा लेंगे।
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वकील ने नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र पास करने की मांग भी रखी। बताया कि बिल्डिंग का मानचित्र आवासीय पास कराया गया था और बिल्डिंग को किराये पर दिया गया था। बिल्डिंग में व्यावसायिक गतिविधि किरायेदार की ओर से संचालित की जा रही थी। बिल्डिंग मालिक का इसमें कोई दोष नहीं है।

सुनवाई के दौरान वकील बिल्डिंग का मूल नक्शा नहीं पेश कर सके। कहा कि आग में नक्शा जल गया है। एलडीए चाहे तो अपने कार्यालय में जमा दूसरी प्रति से जांच कर ले। वकील ने कहा कि एलडीए ने नोटिस में यह जानकारी नहीं दी है कि मौके पर कितना निर्माण अवैध है और क्या सुधार करने पर वह वैध हो जाएगा। बिल्डिंग का जो हिस्सा अवैध है उसे वह खुद तोड़ लेंगे और उसके लिए एक महीने का समय दिया जाए। वकील ने यह भी कहा कि शमन नीति के तहत उनका मानचित्र पास कर दिया जाए क्योंकि 18 मीटर चौड़ी रोड पर आवासीय के साथ व्यावसायिक निर्माण की अनुमति अब दी जा रही है।

वकीलों की बात सुनने के बाद विहित प्राधिकारी ने एलडीए के जेई ओमपाल सिंह से जानकारी ली। जेई ने कोर्ट को बताया कि बेसमेंट सहित दो फ्लोर का नक्शा पास था लेकिन तीसरा तल पूरी तरह अवैध बना है। नक्शे में 20 मीटर बेसमेंट पास था जिसे 134 मीटर बनाया गया। सेट बैक भी नहीं छोड़ा गया। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद विहित प्राधिकारी ने आदेश सुरक्षित कर लिया है।

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