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UP News: जब एक मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने फैसला लिखाने में जताई असमर्थता, बोले- 'भूखा और थका हुआ हूं'

Sat, 28 Feb 2026 02:24 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sat, 28 Feb 2026 02:24 PM IST
सार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने फैसला लिखाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वह भूखे और थके हुए हूं। आगे पढ़ें पूरा मामला...

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Lucknow HC judge expressed his inability to write verdict After hearing case said I am hungry and tired
हाईकोर्ट सुनवाई।

विस्तार

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सूचीबद्ध मामलों की भारी संख्या के कारण एक न्यायाधीश ने एक मामले में निर्णय लिखाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वह भूखे, थके और शारीरिक रूप से फैसला लिखाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए, आदेश सुरक्षित रखा जाता है। 

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मामला बीती 24 फरवरी का है। एक मामले की सुनवाई 7.10 बजे तक करने के बाद न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने आदेश में यह टिप्पणी की है। पीठ, चंद्रलेखा सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 

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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी

यह याचिका वर्ष 2025 में ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। मई 2025 में हाईकोर्ट ने डीआरटी का आदेश निरस्त कर दोबारा सुनवाई को भेजा था। याची को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 

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25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश रद्द कर दिया था कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर नहीं मिला। हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया था कि याचिका में शीघ्र, संभव हो तो छह माह में निर्णय दिया जाए। यह अवधि 24 फरवरी 2026 को पूरी हो रही थी।

शाम 7 बजकर 10 मिनट तक चली सुनवाई

अब 24 फरवरी यानी मंगलवार को न्यायमूर्ति विद्यार्थी के समक्ष 235 मामले सूचीबद्ध थे। इनमें 92 नए थे। 4.15 बजे तक वह 29 ताजा मामलों की सुनवाई कर चुके थे। इसके बाद इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, जो शाम 7 बजकर 10 मिनट तक चली।



सुप्रीम कोर्ट की ओर से लौटाए गए मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने कहा कि वह तत्काल निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए, फैसला सुरक्षित रखा जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि उस दिन 92 नए मामले, 101 नियमित मामले, 39 नए विविध आवेदन और अतिरिक्त सूची के तीन मामले सूचीबद्ध थे। भारी कार्यभार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को ध्यान में रखते हुए संबंधित मामले की सुनवाई प्राथमिकता से की गई।

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