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सरकार बनने के बाद पहली बार आ रहे हैं पीएम, लखनऊ को बड़ी उम्मीदें
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 19 Jun 2017 05:15 PM IST
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modi
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यूपी में योगी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार मंगलवार को आधिकारिक विजिट पर लखनऊ आ रहे हैं। दो दिन के उनके कार्यक्रम के बीच राजधानी के लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं।
खासकर विकास की ओर बढ़ते लखनऊ के आर्थिक व आधारभूत ढांचे को और अधिक मजबूत करने के लिए उनसे कुछ नए प्रोजेक्ट को मंजूरी की उम्मीद की जा रही है। तेजी से बढ़ते माइग्रेशन के चलते लखनऊ पर आबादी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
ऐसे में रोजगार की संभावनाएं तलाशनी होंगी। जाम, प्रदूषण से छुटकारा भी जरूरी है। शहर के सुनियोजित विकास से जुड़े विशेषज्ञ व संस्थाएं भी इसके लिए प्रधानमंत्री को कुछ प्रस्ताव देकर मंजूरी की आस लगाए बैठी हैं।
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देखना यह है कि हाल ही में सात नए फ्लाईओवरों के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे चुके पीएम मोदी शहर को और क्या देकर जाते हैं। पीए के दौरे से शहर के विकास को रफ्तार मिलने की संभावनाएं और उम्मीद जताती एक रिपोर्ट...।
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खासकर विकास की ओर बढ़ते लखनऊ के आर्थिक व आधारभूत ढांचे को और अधिक मजबूत करने के लिए उनसे कुछ नए प्रोजेक्ट को मंजूरी की उम्मीद की जा रही है। तेजी से बढ़ते माइग्रेशन के चलते लखनऊ पर आबादी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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ऐसे में रोजगार की संभावनाएं तलाशनी होंगी। जाम, प्रदूषण से छुटकारा भी जरूरी है। शहर के सुनियोजित विकास से जुड़े विशेषज्ञ व संस्थाएं भी इसके लिए प्रधानमंत्री को कुछ प्रस्ताव देकर मंजूरी की आस लगाए बैठी हैं।
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देखना यह है कि हाल ही में सात नए फ्लाईओवरों के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे चुके पीएम मोदी शहर को और क्या देकर जाते हैं। पीए के दौरे से शहर के विकास को रफ्तार मिलने की संभावनाएं और उम्मीद जताती एक रिपोर्ट...।
सैटेलाइट सिटी से कम होगा आबादी का दबाव
डेमो
- फोटो : demo pic
लॉजिस्टिक पार्क बन जाए तो बढ़े सर्विस इंडस्ट्री
पांच हजार रुपये खर्च कर केंद्र सरकार आउटर रिंग रोड पर काम शुरू करा चुकी है। इसके बेहतर उपयोग के लिए जरूरी है कि यहां यहां ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो, जिससे लखनऊ को फायदा मिले। इसके लिए एक लॉजिस्टिक पार्क बनाया जाना चाहिए। मोहान रोड योजना में एलडीए के पास जमीन भी उपलब्ध है। इसी जगह पर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे कनेक्ट होता है।
फायदा : लॉजिस्टिक पार्क बनने के बाद पूरे देश में कहीं भी बनने वाले प्रोडक्ट को डिस्ट्रिब्यूशन के लिए यहां वेयर हाउस फेसिलिटी में रखा जा सकता है। लखनऊ की जरूरत जहां इससे पूरी होगी। वहीं बाहरी जिलों और नजदीकी प्रदेशों में आपूर्ति के लिए रोजगार भी मिलेगा। आउटर रिंग रोड के साथ ही यहां मेडी सिटी, नॉलेज पार्क, आईटी सिटी का विकास किया जा सकता है।
सैटेलाइट सिटी से कम होगा आबादी का दबाव
शहर से बाहर 25 एकड़ से अधिक एरिया में बसाया जाने वाला शहर सैटेलाइट सिटी कहलाता है। आउटर रिंगरोड के पास एलडीए दो या अधिक सैटेलाइट सिटी बनाए जाने की योजना पर काम करना चाहता है।
फायदा : इसका फायदा यह होगा कि शहर में काम करने के लिए बढ़ रही बसावट को वहां डायवर्ट किया जा सकेगा। आउटर रिंगरोड के पास एसईजेड में काम करने वाले लोगों को वहीं रहने के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगीं।
पांच हजार रुपये खर्च कर केंद्र सरकार आउटर रिंग रोड पर काम शुरू करा चुकी है। इसके बेहतर उपयोग के लिए जरूरी है कि यहां यहां ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो, जिससे लखनऊ को फायदा मिले। इसके लिए एक लॉजिस्टिक पार्क बनाया जाना चाहिए। मोहान रोड योजना में एलडीए के पास जमीन भी उपलब्ध है। इसी जगह पर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे कनेक्ट होता है।
फायदा : लॉजिस्टिक पार्क बनने के बाद पूरे देश में कहीं भी बनने वाले प्रोडक्ट को डिस्ट्रिब्यूशन के लिए यहां वेयर हाउस फेसिलिटी में रखा जा सकता है। लखनऊ की जरूरत जहां इससे पूरी होगी। वहीं बाहरी जिलों और नजदीकी प्रदेशों में आपूर्ति के लिए रोजगार भी मिलेगा। आउटर रिंग रोड के साथ ही यहां मेडी सिटी, नॉलेज पार्क, आईटी सिटी का विकास किया जा सकता है।
सैटेलाइट सिटी से कम होगा आबादी का दबाव
शहर से बाहर 25 एकड़ से अधिक एरिया में बसाया जाने वाला शहर सैटेलाइट सिटी कहलाता है। आउटर रिंगरोड के पास एलडीए दो या अधिक सैटेलाइट सिटी बनाए जाने की योजना पर काम करना चाहता है।
फायदा : इसका फायदा यह होगा कि शहर में काम करने के लिए बढ़ रही बसावट को वहां डायवर्ट किया जा सकेगा। आउटर रिंगरोड के पास एसईजेड में काम करने वाले लोगों को वहीं रहने के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगीं।
गोमती के दोनों ओर बंधा रोड से मिलेगा नया रास्ता
डेमो
- फोटो : amar ujala
नए रोड नेटवर्क से कम होगा ट्रैफिक का दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर से गुजरने वाले पांच नेशनल हाइवे पर ट्रैफिक का काफी दबाव है। ऐसे में अगर आउटर रिंगरोड बन भी जाए, तो नेशनल हाइवे पर बढ़ रही आबादी से पुराने रोड नेटवर्क पर ट्रैफिक लोड बना ही रहेगा। ऐसे में जरूरी है कि रिंगरोड को कनेक्ट करने के लिए नए रोड नेटवर्क पर काम हो।
फायदा : नई मास्टर प्लान रोड जहां विकसित हों, वहीं मौजूदा मार्ग जैसे देवा रोड, मोहान रोड, कुर्सी रोड का विस्तार किया जाए। इन सड़कों के चौड़ीकरण के बाद ट्रैफिक का दबाव नेशनल हाइवे पर कम किया जा सकेगा।
गोमती के दोनों ओर बंधा रोड से मिलेगा नया रास्ता
विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव के मुताबिक आईआईएम एक्वाडक्ट से लेकर लामार्ट बंधा तक गोमतीनदी के दोनों तरफ बंधा रोड का निर्माण होना चाहिए। शहर के लिए यह एक नई रोड नेटवर्क की तरह काम करेगा। इन बंधा रोड के बनने के बाद लखनऊ में करीब 30 किमी लंबी नई रोड नेटवर्क होगी।
फायादा : इससे एक छोर से दूसरे छोर तक बिना शहर के अंदर जाए निकला जा सकेगा। वहीं आईआईएम, प्रबंधनगर योजना, सीजी सिटी, पुराना लखनऊ सभी इससे कनेक्ट हो जाएंगे। यहां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने वाले एंटरटेनमेंट जोन को भी मंजूरी दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर से गुजरने वाले पांच नेशनल हाइवे पर ट्रैफिक का काफी दबाव है। ऐसे में अगर आउटर रिंगरोड बन भी जाए, तो नेशनल हाइवे पर बढ़ रही आबादी से पुराने रोड नेटवर्क पर ट्रैफिक लोड बना ही रहेगा। ऐसे में जरूरी है कि रिंगरोड को कनेक्ट करने के लिए नए रोड नेटवर्क पर काम हो।
फायदा : नई मास्टर प्लान रोड जहां विकसित हों, वहीं मौजूदा मार्ग जैसे देवा रोड, मोहान रोड, कुर्सी रोड का विस्तार किया जाए। इन सड़कों के चौड़ीकरण के बाद ट्रैफिक का दबाव नेशनल हाइवे पर कम किया जा सकेगा।
गोमती के दोनों ओर बंधा रोड से मिलेगा नया रास्ता
विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव के मुताबिक आईआईएम एक्वाडक्ट से लेकर लामार्ट बंधा तक गोमतीनदी के दोनों तरफ बंधा रोड का निर्माण होना चाहिए। शहर के लिए यह एक नई रोड नेटवर्क की तरह काम करेगा। इन बंधा रोड के बनने के बाद लखनऊ में करीब 30 किमी लंबी नई रोड नेटवर्क होगी।
फायादा : इससे एक छोर से दूसरे छोर तक बिना शहर के अंदर जाए निकला जा सकेगा। वहीं आईआईएम, प्रबंधनगर योजना, सीजी सिटी, पुराना लखनऊ सभी इससे कनेक्ट हो जाएंगे। यहां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने वाले एंटरटेनमेंट जोन को भी मंजूरी दी जा सकती है।
नए टर्मिनल से सुधरेगा ट्रेन संचालन
डेमो
नए टर्मिनल से सुधरेगा ट्रेन संचालन
चारबाग पर ही ट्रेनों के संचालन का सबसे अधिक बोझ रहता है। नए रेलवे टर्मिनल बनाने के लिए मौजूदा स्टेशनों का विकास जरूरी है। गोमतीनगर के लिए पहले ही प्रस्ताव है, अब इस पर काम की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है।
वहीं उतरेठिया, आलमनगर, दिलकुशा, मानकनगर की क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ-साथ स्टेशनों तक पहुंचने के लिए पहुंच मार्ग भी जरूरी है। जैसे, गोमतीनगर रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए अभी पहुंच मार्ग लोहिया पथ पर पुल बनने के बाद से अनियोजित हो गया है। इसमें सुधार के लिए नए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलना जरूरी है।
वर्ल्ड पार्क : मनोरंजन व स्वास्थ्य के लिए जरूरी
लखनऊ में गोमतीनगर क्षेत्र में लोहिया पार्क, जनेश्वर मिश्र पार्क, कानपुर रोड पर ईको पार्क, जोनल पार्क जैसी सुविधाएं हैं। इसके उलट जानकीपुरम, बसंतकुंज और प्रबंधनगर योजना के लिए ऐसा कोई बड़ा पार्क नहीं है।
लोगों के मनोरंजन और स्वास्थ्य की जरूरत को देखते हुए प्रबंधनगर योजना में प्रस्तावित वर्ल्ड पार्क को मंजूरी मिले। करीब 800 एकड़ का यह पार्क बनने के बाद पूरे क्षेत्र का नया चेहरा सामने आएगा।
(पिछले दिनों में एलडीए के वीसी प्रभु एन सिंह, मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड्डी और पूर्व वीसी दिवाकर त्रिपाठी की आपसी सहमति से तय हुआ। इन परियोजनाओं की पीएम से घोषणा कराने की कवायद जारी है।)
चारबाग पर ही ट्रेनों के संचालन का सबसे अधिक बोझ रहता है। नए रेलवे टर्मिनल बनाने के लिए मौजूदा स्टेशनों का विकास जरूरी है। गोमतीनगर के लिए पहले ही प्रस्ताव है, अब इस पर काम की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है।
वहीं उतरेठिया, आलमनगर, दिलकुशा, मानकनगर की क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ-साथ स्टेशनों तक पहुंचने के लिए पहुंच मार्ग भी जरूरी है। जैसे, गोमतीनगर रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए अभी पहुंच मार्ग लोहिया पथ पर पुल बनने के बाद से अनियोजित हो गया है। इसमें सुधार के लिए नए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलना जरूरी है।
वर्ल्ड पार्क : मनोरंजन व स्वास्थ्य के लिए जरूरी
लखनऊ में गोमतीनगर क्षेत्र में लोहिया पार्क, जनेश्वर मिश्र पार्क, कानपुर रोड पर ईको पार्क, जोनल पार्क जैसी सुविधाएं हैं। इसके उलट जानकीपुरम, बसंतकुंज और प्रबंधनगर योजना के लिए ऐसा कोई बड़ा पार्क नहीं है।
लोगों के मनोरंजन और स्वास्थ्य की जरूरत को देखते हुए प्रबंधनगर योजना में प्रस्तावित वर्ल्ड पार्क को मंजूरी मिले। करीब 800 एकड़ का यह पार्क बनने के बाद पूरे क्षेत्र का नया चेहरा सामने आएगा।
(पिछले दिनों में एलडीए के वीसी प्रभु एन सिंह, मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड्डी और पूर्व वीसी दिवाकर त्रिपाठी की आपसी सहमति से तय हुआ। इन परियोजनाओं की पीएम से घोषणा कराने की कवायद जारी है।)
इकॉनोमिक हब बनने की अपार संभावनाएं
डेमो
- फोटो : demo pic
आर्थिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है राजधानी
शहर दूरी
दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी 490 किमी
मुरादाबाद-औद्योगिक क्षेत्र 350 किमी
नेपाल-अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर 190 किमी
कानपुर-औद्योगिक क्षेत्र 80 किमी
आगरा-पर्यटन क्षेत्र 330 किमी
इलाहाबाद-शैक्षिक क्षेत्र 205 किमी
वाराणसी-धार्मिक पर्यटन क्षेत्र 300 किमी
(भौगोलिक रूप से देखें तो लखनऊ इन शहरों के बीच में मौजूद है। ऐसे में यहां इकॉनोमिक हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। इससे पहले जरूरत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की नई योजनाओं और प्रोजेक्टों पर काम किया जाए। सोर्स- महायोजना 2031)
साल दर साल बढ़ रही शहर की आबादी
साल आबादी
2001 22.45 लाख
2011 28.80 लाख
2021 प्रस्तावित 45 लाख
2031 प्रस्तावित 65 लाख
(इस आबादी में से 2021 में काम करने वाले लोग 15.30 लाख और 2031 में 22.75 लाख होंगे। ऐसे में लखनऊ में नए आर्थिक जोन बनाए जाने की जरूरत होगी। ताकि इन्हेंरोजगार दिया जा सके।
सोर्स- महायोजना 2031)
शहर दूरी
दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी 490 किमी
मुरादाबाद-औद्योगिक क्षेत्र 350 किमी
नेपाल-अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर 190 किमी
कानपुर-औद्योगिक क्षेत्र 80 किमी
आगरा-पर्यटन क्षेत्र 330 किमी
इलाहाबाद-शैक्षिक क्षेत्र 205 किमी
वाराणसी-धार्मिक पर्यटन क्षेत्र 300 किमी
(भौगोलिक रूप से देखें तो लखनऊ इन शहरों के बीच में मौजूद है। ऐसे में यहां इकॉनोमिक हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। इससे पहले जरूरत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की नई योजनाओं और प्रोजेक्टों पर काम किया जाए। सोर्स- महायोजना 2031)
साल दर साल बढ़ रही शहर की आबादी
साल आबादी
2001 22.45 लाख
2011 28.80 लाख
2021 प्रस्तावित 45 लाख
2031 प्रस्तावित 65 लाख
(इस आबादी में से 2021 में काम करने वाले लोग 15.30 लाख और 2031 में 22.75 लाख होंगे। ऐसे में लखनऊ में नए आर्थिक जोन बनाए जाने की जरूरत होगी। ताकि इन्हेंरोजगार दिया जा सके।
सोर्स- महायोजना 2031)